जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि ऊर्जा की बचत ही ऊर्जा उत्पादन का सबसे सस्ता, प्रभावी और स्थायी विकल्प है। संसाधनों के विवेकपूर्ण और संयमित उपभोग की आदत ही ऊर्जा आत्मनिर्भरता की राह को प्रशस्त करेगी। उन्होंने कहा कि राजस्थान आज सौर ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में देश में अग्रणी भूमिका निभा रहा है और आने वाले समय में ऊर्जा प्रदाता राज्य के रूप में अपनी पहचान और मजबूत करेगा। गैर परंपरागत ऊर्जा स्रोतों के विकास की असीम संभावनाओं के साथ प्रदेश हरित ऊर्जा क्रांति का केंद्र बन रहा है।
मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को राजस्थान एनर्जी काॅन्क्लेव को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रप्रथम की भावना पर आधारित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ईंधन की एक-एक बूंद बचाने के मंत्र को अपनाते हुए सरकार ने राजकीय वाहनो के सीमित और संयमित उपयोग और ऊर्जा संरक्षण के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
ईवी से पहुंचे मुख्यमंत्री, ईंधन बचत का दिया संदेश
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा कार्यक्रम में इलेक्ट्रिक व्हीकल से पहुंचे और ईंधन बचत, पर्यावरण संरक्षण तथा ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने का सशक्त एवं प्रेरक संदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऊर्जा संरक्षण एवं ईंधन की बचत जनभागीदारी से जुड़ा एक व्यापक जनआंदोलन है। पेट्रोल-डीजल की बचत समय की आवश्यकता है और स्वच्छ एवं वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को अपनाकर ही भविष्य की ऊर्जा चुनौतियों का समाधान संभव है। इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में कमी आने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलती है।
निवेशकों से आह्वान – पधारो म्हारे देश
उन्होंने ऊर्जा क्षेत्र के निवेशकों से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत 2047 के संकल्प के अनुरूप राजस्थान को ऊर्जा का पावरहाउस बनाने में भागीदारी निभाने की अपील की। साथ ही, उन्होंने कहा कि निवेश की दृष्टि से भी राजस्थान देश के सबसे अनुकूल राज्यों में शामिल है। सरकार उद्योगों और निवेशकों को हर संभव सहयोग एवं बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्रगतिशील नीतियों का ही परिणाम है कि राज्य में सौर, पवन, बायो ऊर्जा, पंप स्टोरेज और ग्रीन हाइड्रोजन की परियोजनाओ में निवेश के प्रस्ताव मिले हैं, जो कि राजस्थान की अर्थव्यवस्था के लिए एक नए युग की शुरुआत है।
अक्षय ऊर्जा में राजस्थान स्थापित कर रहा प्रतिमान
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह संकल्प लिया है कि भारत वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता स्थापित करने के साथ ही, वर्ष 2070 तक नेट जीरो का लक्ष्य भी प्राप्त करेगा। राजस्थान सरकार इस लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रही है। राज्य में 828 गीगावाट सौर ऊर्जा और 284 गीगावाट पवन ऊर्जा की संभावनाएं हंै। अब तक राज्य में 47 गीगावाट से अधिक की अक्षय ऊर्जा क्षमता स्थापित हो चुकी है और राजस्थान सौर परियोजना स्थापना में देश में अग्रणी है। हमारी सरकार के कार्यकाल में 24 हजार 410 मेगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि अक्षय ऊर्जा, बायो फ्यूल, ऊर्जा भंडारण एवं ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाओं को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार ने राजस्थान एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति 2024 जारी की है।
ग्रीन एनर्जी, ई-मोबिलिटी की तरफ बढ़ा रहे मजबूत कदम
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में कृषि विद्युत भार को सौर ऊर्जा के माध्यम से पूरा करने के लिए कुसुम योजना के अंतर्गत लघु सौर परियोजनाएं कृषि भूमि पर स्थापित की जा रही हैं। योजना के तहत 4 हजार मेगावाट से अधिक की परियोजनाएं स्थापित हो चुकी हैं तथा 6500 मेगावाट की परियोजनाएं आवंटित की जा चुकी हैं। साथ ही, राज्य में राजकीय उपक्रमों एवं संयुक्त उपक्रमों द्वारा 4 हजार 670 मेगावाट के सोलर पार्क स्थापित हो चुके है। 12 हजार मेगावाट से अधिक के सोलर पार्क निर्माणाधीन हैं। राज्य सरकार द्वारा वर्तमान में 1000 से अधिक राजकीय भवनों पर सौर्यकरण किया जा चुका है। वर्चुअल एवं नेट मीटरिंग के माध्यम से 600 मेगावाट के प्लांट लगाए जाएंगे। प्रधानमंत्री ई-ड्राइव योजना के अंतर्गत राज्य में 250 स्थान चिन्हित किए गए हैं, जहां इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन की स्थापना की जाएगी।
ऊर्जा भंडारण बनेगा भविष्य की मांग की पूर्ति का आधार
उन्होंने कहा कि सरकार ने वर्ष 2030 तक 115 गीगावाट अक्षय ऊर्जा तथा 10 गीगावाट की ऊर्जा भंडारण परियोजना स्थापना का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसे वर्ष 2047 तक 290 गीगावाट किया जाएगा। 6 हजार मेगावाट बैट्री स्टोरेज क्षमता का आवंटन किया जा चुका है और 6 हजार 400 मेगावाट की परियोजना प्रक्रिया में हैं। ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हीरालाल नागर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर ऊर्जा संरक्षण एवं ईंधन बचत हमारी जिम्मेदारी है। नागरिकों को जागरूक करते हुए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देना, सोलर ऊर्जा का विस्तार करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए फास्ट चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना की जा रही है। वहीं, प्रधानमंत्री कुसुम जैसी दूरदर्शी योजनाओं के चलते प्रदेश ऊर्जा आत्मनिर्भता की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा रहा है। कार्यक्रम में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास,ऊर्जा क्षेत्र के विषय विशेषज्ञों, निवेशकों सहित अन्य गणमान्य प्रतिभागियों ने शिरकत की।


