भोपाल। मध्य प्रदेश के करीब 2.46 लाख पेंशनर्स को उनके बकाये एरियर्स (बकाया राशि) के लिए अभी और लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। एरियर्स का भुगतान न किए जाने की स्थिति में अदालतों में सरकार के खिलाफ अवमानना के मामले दर्ज हो रहे हैं। इस कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए राज्य सरकार ने सभी संबंधित विभागों को सख्त निर्देश जारी किए हैं, जिसके तहत अदालतों से स्टे ऑर्डर (स्थगन आदेश) प्राप्त करने के लिए कहा गया है।
सरकार के आदेश में क्या है प्रावधान?
राज्य सरकार द्वारा हाल ही में जारी किए गए आदेश के मुताबिक, दो अलग-अलग अवधियों के एरियर्स भुगतान को लेकर यह स्थिति बनी है:
छठवां वेतनमान: 1 जनवरी 2006 से 31 अगस्त 2008 तक यानी कुल 32 महीने का एरियर्स।
सातवां वेतनमान: 1 जनवरी 2016 से 31 मार्च 2018 तक यानी कुल 27 महीने का एरियर्स।
इस पूरे मामले में सरकार ने विभागों से अदालतों में पैरवी कर स्टे ऑर्डर लेने के निर्देश दिए हैं। आदेश में मुख्य रूप से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ के फैसलों का हवाला दिया गया है।
एरियर्स रोकने से सरकार को होगी 4400 करोड़ की बचत
पेंशनर्स के लिहाज से राज्य सरकार का यह कदम एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार:
छठवें वेतनमान के तहत लगभग 2.46 लाख पेंशनर्स को एरियर्स मिलना है, जिसके 32 महीनों के बकाये की कुल राशि करीब 400 करोड़ रुपये है।
वहीं, सातवें वेतनमान के दायरे में आने वाले करीब 4.50 लाख पेंशनर्स (जो 1 जनवरी 2016 से जुलाई 2018 तक के हैं) के एरियर्स की राशि लगभग 4000 करोड़ रुपये है।
यदि सरकार एरियर्स के भुगतान को टालने या रोकने में सफल रहती है, तो राजकोष पर पड़ने वाले इस भारी-भरकम बोझ से कुल 4400 करोड़ रुपये की बचत होगी।
सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ के पास विचाराधीन है मामला
पेंशनर्स को एरियर्स देने का यह विवाद फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के पास लंबित है। हालांकि देश के विभिन्न राज्यों के उच्च न्यायालयों ने पहले इस राशि के भुगतान के आदेश दिए थे, लेकिन हाईकोर्ट की डबल बेंच ने स्पष्ट किया है कि चूंकि यह मामला एक संवैधानिक पीठ के पास विचाराधीन है, इसलिए वहां से अंतिम निर्णय आने तक प्रतीक्षा की जानी चाहिए। वर्तमान में यह पूरा प्रकरण न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है, और आगे की कोई भी प्रशासनिक कार्रवाई संबंधित न्यायालयों के आगामी आदेशों पर ही निर्भर करेगी।


