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    ‘खड़े हनुमान कहीं नहीं जाएंगे’, उमा भारती ने मोहन यादव से कहा- हटाने का प्लान बदलें

    उज्जैन: मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेत्री उमा भारती ने उज्जैन स्थित प्रसिद्ध 'खड़े हनुमान मंदिर' को हटाए जाने के विषय पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक पत्र प्रेषित किया है। पत्र के माध्यम से उन्होंने धार्मिक आस्था और बुनियादी ढांचे के विकास के बीच संतुलन बनाए रखने का आग्रह किया है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के शासनकाल के दौरान भोपाल के कमला पार्क क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण के समय एक मस्जिद के संरक्षण हेतु मार्ग की रूपरेखा में किए गए बदलाव का विशेष रूप से उल्लेख किया है।

    'विकास और आस्था को साथ लेकर चले सरकार': उमा भारती

    मुख्यमंत्री को प्रेषित पत्र में उमा भारती ने उल्लेख किया कि मुख्यमंत्री स्वयं उज्जैन के निवासी हैं, अतः वे धर्मनगरी की गरिमा और वहां के देवस्थानों के महत्व को भली-भांति समझते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि जिस प्रकार भोपाल में आस्था का सम्मान करते हुए सड़क निर्माण का नक्शा बदल दिया गया था, उसी तर्ज पर उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर का भी सम्मानजनक और स्थाई समाधान निकाला जाना चाहिए।

    सड़क चौड़ीकरण की जद में आया मंदिर, प्रतिमा हटाने में छूटे पसीने

    आगामी सिंहस्थ महाकुंभ के दृष्टिगत उज्जैन के कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक मार्ग को 15 मीटर चौड़ा करने का कार्य प्रगति पर है। इस परियोजना की सीमा में आने वाले खड़े हनुमान मंदिर के बाहरी ढांचे को तो हटा दिया गया, किंतु मुख्य प्रतिमा को स्थानांतरित करने में प्रशासनिक तंत्र को भारी मशक्कत का सामना करना पड़ा। लगातार छह दिनों तक भारी क्रेन और मशीनों के प्रयोग के बाद भी जब प्रतिमा विस्थापित नहीं हो सकी, तब नगर निगम प्रशासन ने इस तकनीकी कार्य हेतु आईआईटी (IIT) इंदौर के विशेषज्ञों की टीम को आमंत्रित किया है।

    विश्व हिंदू परिषद और संत समाज का रुख

    मामले के तूल पकड़ने के बाद विश्व हिंदू परिषद के प्रांतीय पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि संगठन धार्मिक स्थलों के संरक्षण और नगर के विकास दोनों के पक्ष में है। विहिप नेताओं ने कहा कि महाकाल मंदिर, हरसिद्धि माता और काल भैरव की भांति खड़े हनुमान जी का स्थान भी आस्था का प्रमुख केंद्र है। संगठन जल्द ही स्थानीय संत समाज और जिला प्रशासन के साथ विचार-विमर्श कर सौहार्दपूर्ण निर्णय पर पहुंचेगा, जिससे विकास कार्य में बाधा उत्पन्न न हो और श्रद्धालुओं की भावनाएं भी आहत न हों।

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