भोजपुर। सीमा शुल्क विभाग के सेवानिवृत्त असिस्टेंट कमिश्नर रामकुमार सिंह की सनसनीखेज हत्या के मामले की छानबीन कर रही पुलिस को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। शुक्रवार की सुबह मुफस्सिल थाना क्षेत्र के सारंगपुर मोड़ के समीप पुलिस और इस हत्याकांड के मुख्य शूटर के बीच एक मुठभेड़ हो गई। पुलिस द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई में मुख्य आरोपी के पैर में गोली जा लगी, जिसके पश्चात उसे तत्काल गिरफ्तार कर इलाज के लिए आरा सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस अब इस सनसनीखेज हत्याकांड में प्रयुक्त हथियार की बरामदगी, फरार अन्य अभियुक्तों की संलिप्तता और लगभग 14 कट्ठा भूमि से जुड़े विवाद के तमाम पहलुओं को खंगालने में पूरी मुस्तैदी से जुटी हुई है।
हथियार बरामदगी के दौरान पुलिस और आरोपी में मुठभेड़
पुलिस अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुठभेड़ में घायल हुए मुख्य आरोपी की पहचान नवादा थाना क्षेत्र के चंदवा हाउसिंग कॉलोनी निवासी 22 वर्षीय पवन यादव के रूप में की गई है। पुलिस दल उसे हत्याकांड में उपयोग किए गए हथियार को बरामद करवाने के लिए सारंगपुर मोड़ के पास ले गया था, तभी आरोपी ने पुलिस अभिरक्षा से भागने की नीयत से बल पर फायरिंग शुरू कर दी। अपनी और जनता की सुरक्षा के लिए पुलिस को आत्मरक्षा में जवाबी गोलीबारी करनी पड़ी, जिसमें पवन के दाहिने पैर में घुटने के नीचे गोली लग गई। भोजपुर पुलिस अधीक्षक अवधेश दीक्षित ने घटनास्थल पर पहुंचकर पूरे हालात का जायजा लिया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
पिंटू की निशानदेही पर मुख्य शूटर तक पहुंची पुलिस
पुलिस अनुसंधान में यह बात सामने आई है कि इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड में इसके पूर्व गिरफ्तार किए गए शूटर पिंटू कुमार से पूछताछ के दौरान मिले सुरागों के आधार पर ही पुलिस पवन यादव तक पहुंच सकी है। गिरफ्तार पिंटू को इस कांड के मुख्य नामजद आरोपी चंदन सिंह का करीबी सहयोगी बताया जा रहा है, जिसका पुराना आपराधिक इतिहास रहा है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, पिंटू के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास और आबकारी अधिनियम जैसे गंभीर मामलों के लगभग 10 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। पूर्व में उसकी गिरफ्तारी के समय उसके घर से एक देसी कट्टा और जिंदा कारतूस भी बरामद किए गए थे, जिसके बाद से पुलिस लगातार कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही थी।
जमीन का पुराना विवाद और हत्या की सुनियोजित साजिश
पुलिस अधीक्षक अवधेश दीक्षित के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि रामकुमार सिंह की हत्या से पूर्व सभी षड्यंत्रकारियों ने एक गुप्त बैठक कर इस वारदात को अंजाम देने की पूरी रूपरेखा तैयार की थी। पुलिस इस पूरी घटना के पीछे 14 कट्ठा जमीन के चल रहे जमीनी विवाद को मुख्य वजह मानकर गहराई से तफ्तीश कर रही है। इस भूमि विवाद से जुड़े सभी संभावित हिस्सेदारों की शिनाख्त कर ली गई है और पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस खौफनाक साजिश में किस व्यक्ति की क्या विशिष्ट भूमिका रही थी।
पूर्व की घटनाएं और अब तक हुई गिरफ्तारियां
बीती 15 अक्टूबर 2026 को सुबह लगभग छह बजे आरा शहर के नवादा थाना क्षेत्र के अंतर्गत कनकपुरी मोहल्ले में जैन कॉलेज के पूर्वी गेट के समीप अपराधियों ने टहलने निकले सेवानिवृत्त अधिकारी रामकुमार सिंह पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर उनकी हत्या कर दी थी। इस दुस्साहसिक घटना के उपरांत मृतक की पत्नी के औपचारिक बयान पर नवादा थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसके बाद मामले के खुलासे के लिए एसडीपीओ सदर-1 के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था। पुलिस इस प्रकरण में अब तक मनोज कुमार सिंह उर्फ लक्की, चंदन सिंह, अभिषेक कुमार और टीपू सहित कई आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज चुकी है, तथा पिंटू व पवन यादव की गिरफ्तारी को इस हत्याकांड के पर्दाफाश की दिशा में सबसे बड़ा मील का पत्थर मान रही है।



