वाशिंगटन: अमेरिकी क्षेत्र गुआम में ब्राउन ट्री स्नेक की बेकाबू होती आबादी के पीछे का बड़ा कारण वैज्ञानिकों ने खोज निकाला है। इन सांपों के जीनोम (डीएनए) का विस्तृत अध्ययन करने के बाद वैज्ञानिकों ने 19 हजार से अधिक ऐसे आनुवंशिक बदलावों की पहचान की है, जिन्होंने इन्हें नए वातावरण में ढलने और तेजी से पनपने में मदद की।
मालवाहक जहाजों से गुआम पहुंचे थे सांप
करीब 80 वर्ष पहले कुछ ब्राउन ट्री स्नेक मालवाहक जहाजों के जरिए ऑस्ट्रेलिया से गुआम आए थे। शुरुआत में बेहद कम संख्या होने के बावजूद समय के साथ इनकी आबादी इतनी तेजी से बढ़ी कि आज गुआम के कुछ इलाकों में प्रति वर्ग मील लगभग 30 हजार सांप पाए जाते हैं। इन सांपों ने कई स्थानीय पक्षी प्रजातियों को लगभग विलुप्त कर दिया है और हर साल बिजली नेटवर्क को सैकड़ों बार बाधित करते हैं।
लॉन्ग-रीड जीनोम सीक्वेंसिंग से खुला रहस्य
यूनिवर्सिटी एट बफेलो के शोधकर्ताओं ने 'लॉन्ग-रीड जीनोम सीक्वेंसिंग' तकनीक का उपयोग कर यह जानने का प्रयास किया कि कम आनुवंशिक विविधता के बावजूद इनकी आबादी कैसे बढ़ी। जीनोम विश्लेषण में 19 हजार से अधिक छिपे हुए आनुवंशिक बदलाव सामने आए, जो पारंपरिक तकनीकों से पकड़ में नहीं आते थे। इन बदलावों का सबसे बड़ा असर सांपों की सूंघने की क्षमता और रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) से जुड़े जीन पर पड़ा है।
सूंघने की क्षमता ने बढ़ाई आबादी, अपनों को शिकार बनाने से बचा
ब्राउन ट्री स्नेक अपनी दोमुंही जीभ से हवा में मौजूद रासायनिक संकेतों को सूंघकर शिकार करते हैं। बेहतर सूंघने की क्षमता ने इन्हें गुआम के नए माहौल में तेजी से शिकार ढूंढने में सक्षम बनाया। इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया में यह प्रजाति कभी-कभी अन्य सांपों को खा जाती है, लेकिन गुआम में विकसित सूंघने की क्षमता के कारण ये एक-दूसरे को आसानी से पहचान लेते हैं और आपस में शिकार नहीं करते, जिससे इनकी संख्या लगातार बढ़ती गई।
अन्य जीव प्रजातियों के अध्ययन में मिलेगी मदद
शोधकर्ताओं के अनुसार, यह खोज केवल गुआम के ब्राउन ट्री स्नेक तक सीमित नहीं है। इस अध्ययन से यह समझने में भी मदद मिलेगी कि किस तरह बेहद कम संख्या से शुरू होने वाली अन्य जीव प्रजातियों में भी छिपी हुई आनुवंशिक क्षमता मौजूद हो सकती है, जो उन्हें विपरीत परिस्थितियों में ढलने में मदद करती है।

