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    राजस्थान PTI भर्ती में बड़ा फर्जीवाड़ा, JS यूनिवर्सिटी की मान्यता रद्द

    जयपुर।राजस्थान की शारीरिक शिक्षा अध्यापक भर्ती परीक्षा (पीटीआई) 2022 में सामने आए फर्जी डिग्री प्रकरण की आंच अब उत्तर प्रदेश तक पहुंच गई है। उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले की शिकोहाबाद स्थित जेएस यूनिवर्सिटी पर फर्जी बीपीएड डिग्रियां बेचने के गंभीर आरोपों के बाद योगी सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए विश्वविद्यालय की मान्यता समाप्त कर दी है। यह कार्रवाई राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की जांच के बाद सामने आए तथ्यों के आधार पर की गई है।दरअसल, पीटीआई भर्ती 2022 की जांच के दौरान राजस्थान SOG ने खुलासा किया था कि बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने दलालों के माध्यम से जेएस यूनिवर्सिटी से बैकडेट में बीपीएड की फर्जी डिग्रियां हासिल की थीं। इन डिग्रियों के आधार पर अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में आवेदन किया और कई उम्मीदवार नौकरी पाने में भी सफल हो गए।

    SOG जांच में हुआ बड़ा खुलासा

    SOG की विस्तृत जांच में सामने आया कि करीब 2 हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने जेएस यूनिवर्सिटी से संदिग्ध और फर्जी डिग्रियां प्राप्त कर आवेदन किया था। इस मामले में अब तक करीब 165 अभ्यर्थियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। जांच एजेंसी ने इसे संगठित फर्जीवाड़ा बताया, जिसमें यूनिवर्सिटी, दलाल और अभ्यर्थी की मिलीभगत सामने आई।

    यूनिवर्सिटी सर्वर की जांच से सच्चाई उजागर

    SOG ने जब जेएस यूनिवर्सिटी के सर्वर और शैक्षणिक रिकॉर्ड का डेटा खंगाला तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच में पता चला कि वर्ष 2017 से 2022 के बीच इस यूनिवर्सिटी से डिग्री हासिल कर 203 अभ्यर्थियों ने सरकारी नौकरी प्राप्त की। लेकिन जब इन डिग्रियों की वैधता की जांच की गई तो सिर्फ एक ही अभ्यर्थी की डिग्री सही पाई गई। बाकी सभी डिग्रियां नियमों के खिलाफ, बैकडेट में जारी या पूरी तरह फर्जी पाई गईं।

    यूपी सरकार का प्रोएक्टिव एक्शन

    राजस्थान SOG की रिपोर्ट और तथ्यों के आधार पर उत्तर प्रदेश सरकार ने सख्त रुख अपनाया। यूपी कैबिनेट ने जेएस यूनिवर्सिटी की मान्यता रद्द करने का फैसला लिया। माना जा रहा है कि यह फैसला न केवल इस यूनिवर्सिटी के खिलाफ बल्कि अन्य फर्जी डिग्री रैकेट्स के लिए भी एक कड़ा संदेश है।

    आलोक राज का बयान: ‘देर है, अंधेर नहीं’

    इस पूरे मामले पर राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के अध्यक्ष मेजर जनरल आलोक राज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, “देर है अंधेर नहीं। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की पहल और राजस्थान SOG के सॉलिड एक्शन की वजह से योगी सरकार ने प्रोएक्टिव एक्शन लिया है। जेएस यूनिवर्सिटी, जिन्होंने खूब फर्जी डिग्रियां बेचीं, उनकी मान्यता यूपी कैबिनेट ने रद्द कर दी है। उम्मीद है युवा इससे सबक लेंगे और सीधे रास्ते पर चलेंगे।”

    भविष्य की भर्तियों पर असर

    इस कार्रवाई के बाद पीटीआई भर्ती सहित अन्य भर्तियों में शामिल अभ्यर्थियों की डिग्रियों की दोबारा जांच तेज होने की संभावना है। साथ ही, जिन अभ्यर्थियों ने फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी हासिल की है, उन पर भी सेवा समाप्ति और आपराधिक कार्रवाई की तलवार लटकती नजर आ रही है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्रों के खिलाफ अब और भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।
     

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