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    BEST बस सेवा में बड़ा बदलाव, सरकार ने निजी साझेदारी के प्रस्ताव पर लगाई मुहर

    मुंबई। आर्थिक संकट से जूझ रहे बेस्ट (BEST) उपक्रम के 22 डिपो के पुनर्विकास और आधुनिकीकरण के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के प्रस्ताव को मुंबई नगर निगम की आम सभा में पास कर दिया गया है। बैठक के दौरान सत्ताधारी पक्ष बीजेपी, शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) ने अपने बहुमत के बल पर इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। वहीं शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे), भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए इसे बेस्ट का निजीकरण करार दिया।

    विपक्ष का तीखा हमला और श्वेत पत्र की मांग

    शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ कॉर्पोरेटर यशोधन फांसे और सचिन पडवाल ने 22 डिपो को निजी कंपनियों को सौंपने पर गंभीर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि नगर निगम को बेस्ट की जमीनों का निजीकरण करने के बजाय उपक्रम को खुद मजबूत करने की दिशा में काम करना चाहिए। वहीं कांग्रेस के समूह नेता अशरफ आजमी ने पहले लीज पर दिए गए चार डिपो के नतीजों को लेकर 'श्वेत पत्र' जारी करने की मांग की। विपक्ष ने चेतावनी दी कि यदि जमीनों को निजी हाथों में सौंपा गया तो मुंबई की जनता और परिवहन व्यवस्था पर इसका बुरा असर पड़ेगा।

    सत्ताधारी दल की सफाई: जमीन बेची नहीं, लीज पर दी जा रही है

    विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए बीजेपी कॉर्पोरेटर प्रवीण छेड़ा और प्रकाश दरेकर ने स्पष्ट किया कि बेस्ट की जमीनों का मालिकाना हक स्थानांतरित नहीं किया जा रहा है और न ही इन्हें बेचा जा रहा है। उन्होंने कहा कि नियमों के तहत जमीनों को सिर्फ लीज पर दिया जा रहा है। इस व्यवस्था से मिलने वाले राजस्व का उपयोग नई बसें खरीदने और बुनियादी ढांचे को सुधारने में किया जाएगा, जिससे मुंबई की जनता को बेहतर परिवहन सेवाएं मिल सकेंगी।

    बेस्ट प्रशासन का पक्ष और भविष्य की योजनाएं

    प्रस्ताव पर अपनी बात रखते हुए बेस्ट की जनरल मैनेजर सोनिया सेठी ने बताया कि शहर में यात्रियों की जरूरतों को पूरा करने के लिए करीब 10,000 बसों की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान में केवल 2,800 बसें ही संचालित हो पा रही हैं। बेस्ट के कई डिपो जर्जर स्थिति में हैं और आधुनिक इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने हेतु भारी फंड की दरकार है। पीपीपी मॉडल के जरिए करीब 5,000 नई बसें खरीदने और लगभग 28,000 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसका उपयोग कर्मचारियों के आवास और व्यवस्था के सुधार में होगा।

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