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    कांग्रेस में बड़ा फेरबदल संभव, पायलट-मदेरणा-हरीश चौधरी की बढ़ सकती है जिम्मेदारी

    जयपुर: ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के भीतर आने वाले दिनों में राष्ट्रीय स्तर पर बहुत बड़ा संगठनात्मक प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिल सकता है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में इस समय राष्ट्रीय महासचिवों, सचिवों और अलग-अलग राज्यों के प्रभारियों की नई नियुक्तियों को लेकर बेहद गोपनीय और गहन मंथन का दौर चल रहा है। देश के विभिन्न राज्यों में क्षेत्रीय स्तर पर संगठन खड़ा करने का काम पूरा होने के बाद अब कांग्रेस का पूरा ध्यान केंद्रीय टीम को दुरुस्त करने पर है। इसी कड़ी में हाल ही में आलाकमान ने प्रयोग के तौर पर तीन राज्यों के प्रभारियों को बदला है और अग्रिम संगठन सेवादल में भी नए चेहरे शामिल किए हैं। राजनैतिक गलियारों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक राष्ट्रीय टीम में बदलाव का यह पूरा खाका अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है, जिस पर अंतिम मुहर दिल्ली में होने वाली बैठक के बाद लग जाएगी।

    खड़गे, राहुल और वेणुगोपाल की तिकड़ी ने तैयार किया पदाधिकारियों का 'प्रोग्रेस कार्ड'

    कांग्रेस मुख्यालय में राष्ट्रीय टीम का हिस्सा बनकर काम कर रहे मौजूदा पदाधिकारियों के कामकाज और उनकी जमीनी सक्रियता को लेकर एक कड़ा पैमाना तय किया गया है। पार्टी के आंतरिक सूत्रों के मुताबिक इस विषय पर राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के बीच कई दौर की उच्च स्तरीय मंत्रणा पूरी हो चुकी है। संगठन महासचिव ने सभी राष्ट्रीय महासचिवों और सचिवों के काम का पूरा लेखा-जोखा और एक विस्तृत परफॉर्मेंस रिपोर्ट तैयार कर ली है। अब इसी प्रोग्रेस कार्ड के आधार पर यह फैसला लिया जाएगा कि किस नेता की केंद्रीय संगठन से छुट्टी होगी और किसे उसके अच्छे काम का इनाम देते हुए प्रमोट किया जाएगा।

    परफॉर्मेंस की कसौटी पर राजस्थान के नौ बड़े चेहरे, इस्तीफों पर भी होगा फैसला

    इस पूरे फेरबदल का सबसे बड़ा असर राजस्थान के उन नौ बड़े नेताओं पर पड़ने की उम्मीद है जो वर्तमान में दिल्ली दरबार में अहम पदों पर काबिज हैं। इस सूची में भंवर जितेंद्र सिंह, सचिन पायलट, हरीश चौधरी, रेहाना रियाज, दानिश अबरार, संजना जाटव, धीरज गुर्जर, दिव्या मदेरणा और विजय जांगिड़ जैसे कद्दावर नाम शामिल हैं। वर्तमान में इनमें से भंवर जितेंद्र सिंह और सचिन पायलट बतौर राष्ट्रीय महासचिव बड़ी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, वहीं हरीश चौधरी के पास मध्य प्रदेश के प्रभारी का जिम्मा है। इसी बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री भंवर जितेंद्र सिंह द्वारा असम विधानसभा चुनाव में पार्टी के कमजोर प्रदर्शन के बाद नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए दिए गए इस्तीफे पर भी अब अंतिम निर्णय लिया जा सकता है, क्योंकि उनका इस्तीफा तकनीकी रूप से अभी तक पेंडिंग रखा गया है। आगामी राज्यों के चुनावों को देखते हुए कमजोर परफॉर्मेंस वाले नेताओं की विदाई लगभग तय मानी जा रही है।

    पंजाब और राजस्थान में नए अध्यक्षों की सुगबुगाहट से बदलेगा दिल्ली का समीकरण

    राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यों के भीतर होने वाले नए बदलाव सीधे तौर पर दिल्ली के केंद्रीय संगठन के ढांचे को भी प्रभावित करेंगे। उदाहरण के तौर पर वर्तमान में राजस्थान के प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा को पंजाब कांग्रेस की कमान सौंपे जाने की सियासी चर्चाएं बेहद गर्म हैं, जिसके चलते राजस्थान में एक नए राष्ट्रीय प्रभारी की एंट्री तय मानी जा रही है। इसके साथ ही राजस्थान के पूर्व उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट को दोबारा से जयपुर भेजकर प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने की अटकलें भी तेज हैं। यदि पायलट को राज्य की मुख्य कमान मिलती है, तो एआईसीसी में उनकी जगह किसी अन्य वरिष्ठ राष्ट्रीय नेता को महासचिव पद की जिम्मेदारी सौंपनी होगी। फिलहाल इन तमाम बड़े नामों के अंतिम नामों की सूची पर आलाकमान का आधिकारिक फैसला आना बाकी है।

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