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    खुद को सुप्रीम कोर्ट का लीगल एडवाइजर बताने वाला शख्स गिरफ्तार, HC वीडियो से छेड़छाड़ का आरोप

    सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में सोशल मीडिया पर न्यायपालिका की छवि धूमिल करने और खुद को सर्वोच्च न्यायालय का कानूनी सलाहकार बताने वाले एक शातिर युवक को पुलिस ने दबोच लिया है। आरोपी ने जबलपुर उच्च न्यायालय की लाइव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की एक क्लिप को एडिट कर उस पर अमर्यादित टिप्पणियां की थीं। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी को उसके निवास क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया है, जिसके बाद उसे स्थानीय अदालत में पेश कर जेल भेज दिया गया है।

    उच्च न्यायालय की वीडियो क्लिप से छेड़छाड़ कर खुद को बताया कानूनी सलाहकार

    पुलिस प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार यह पूरा मामला करीब चार महीने पुराना है, जिसमें आरोपी अमित कुमार तिवारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर 'प्रचंड प्रहार' नाम से एक अकाउंट संचालित कर रहा था। आरोपी ने जबलपुर हाईकोर्ट की लाइव अदालती कार्यवाही का एक आधिकारिक वीडियो डाउनलोड किया और उसमें चालाकी से कांट-छांट की। वीडियो को इस तरह पेश किया गया जैसे वह खुद सुप्रीम कोर्ट का लीगल एडवाइजर हो और हाईकोर्ट के न्यायाधीश को ही दिशा-निर्देश दे रहा हो, जिसके बाद इस भ्रामक वीडियो को इंटरनेट पर वायरल कर दिया गया।

    माननीय उच्च न्यायालय के संज्ञान लेते ही हरकत में आया पुलिस तंत्र

    अदालत की गरिमा और सुरक्षा से जुड़े इस गंभीर वीडियो के सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित होने के बाद जबलपुर उच्च न्यायालय ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया। उच्च न्यायालय की ओर से दिए गए कड़े निर्देशों के बाद प्रारंभिक तौर पर जबलपुर के सिविल लाइन थाने में एक शून्य (जीरो) प्राथमिकी दर्ज की गई। इसके बाद मामले की संवेदनशीलता और आरोपी की लोकेशन को देखते हुए केस डायरी को अग्रिम तफ्तीश और कानूनी कार्रवाई के लिए सिंगरौली के बैढ़न थाने स्थानांतरित कर दिया गया।

    विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जब्त

    केस ट्रांसफर होते ही स्थानीय बैढ़न थाना पुलिस और खुटार चौकी की टीम ने जालसाज को पिपराझाँपी इलाके से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की कड़ी पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपना अपराध पूरी तरह स्वीकार कर लिया है और माना है कि उसी ने व्यूज पाने के चक्कर में इस फर्जी वीडियो को तैयार किया था। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी के पास से वीडियो एडिटिंग और उसे सोशल मीडिया पर अपलोड करने में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स को साक्ष्य के रूप में जब्त कर लिया है।

    संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ भ्रामक प्रचार करने वालों को पुलिस की सख्त चेतावनी

    इस पूरे घटनाक्रम पर जिला पुलिस अधीक्षक शियाज के एम ने सख्त रुख अपनाते हुए आम जनता और सोशल मीडिया यूजर्स के लिए एक जरूरी हिदायत जारी की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि माननीय अदालतों या किसी भी अन्य संवैधानिक पदों और संस्थाओं के खिलाफ इंटरनेट पर भ्रामक, मनगढ़ंत और आपत्तिजनक सामग्री का प्रसार करना एक अक्षम्य और गंभीर अपराध है। पुलिस की साइबर सेल टीम ऐसे सभी संदिग्ध सोशल मीडिया अकाउंट्स पर पैनी नजर रख रही है और कानून का उल्लंघन करने वाले तत्वों के खिलाफ भविष्य में भी ऐसी ही कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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