मुंबई/जालना। मराठा आरक्षण की मांग को लेकर जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में मनोज जरांगे पाटिल की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल सोमवार को 10वें दिन में प्रवेश कर गई। महाराष्ट्र सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों पर कोई ठोस प्रगति न होने से नाराज जरांगे ने पानी पीने और किसी भी तरह का चिकित्सकीय उपचार लेने से पूरी तरह मना कर दिया है। उन्होंने दोटूक चेतावनी दी है कि यदि 12 सितंबर तक सरकार ने उनकी मांगें पूरी नहीं कीं, तो वे अपने समर्थकों के साथ मुंबई कूच करेंगे।
पानी और इलाज लेने से इनकार, स्वास्थ्य चिंताजनक
29 अगस्त से अनशन पर बैठे जरांगे पाटिल ने पहले सरकार से मिले दो दिवसीय आश्वासन के बाद पानी और सलाइन लेने पर सहमति जताई थी। हालांकि, तय सीमा में मांगे पूरी न होने का आरोप लगाते हुए उन्होंने शनिवार से जल का त्याग कर दिया है। लगातार 10 दिनों से जारी इस कठोर अनशन के कारण उनके स्वास्थ्य में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है, लेकिन वे बिना किसी समझौते के अपनी मांगों पर अडिग हैं।
क्या हैं मराठा आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें?
कुनबी प्रमाणपत्र का वितरण: सेवानिवृत्त न्यायाधीश शिंदे समिति द्वारा चिह्नित 58 लाख कुनबी दस्तावेजों के आधार पर मराठा समुदाय को तत्काल कुनबी (ओबीसी) प्रमाण पत्र जारी किए जाएं।
हैदराबाद गजेटियर लागू करना: क्षेत्र के मराठा समुदाय के अधिकारों की सुरक्षा के लिए हैदराबाद गजेटियर के प्रावधानों को पूरी तरह लागू किया जाए।
नया पृथक मंत्रालय: मराठा और कुनबी समाज के समग्र विकास एवं कल्याण के लिए एक अलग मंत्रालय का गठन किया जाए।
मुकदमों की वापसी व बजट जारी करना: मराठा आरक्षण आंदोलनों के दौरान प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी पुलिस केस वापस लिए जाएं और 'सारथी' (SARATHI) संस्था के लिए पर्याप्त बजटीय फंड जारी किया जाए।


