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    Homeस्वास्थ्यकोरोना का नया वैरिएंट ‘सिकाडा’, 23 देशों में फैलाव

    कोरोना का नया वैरिएंट ‘सिकाडा’, 23 देशों में फैलाव

    साल 2020-23 के बीच पूरी दुनिया को लगभग रोक देने वाला कोरोनावायरस अब एक नए वैरिएंट के साथ फिर से एक्टिव होता दिख रहा है। प्रारंभिक अध्ययनों में पाया गया कि ये वैरिएंट तेजी से फैल सकता है और उन लोगों को भी संक्रमित करने की क्षमता वाला हो सकता है जो पहले के संक्रमण और वैक्सीन से इम्युनिटी बना चुके थे।अब हालिया रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि देखते ही देखते ये वायरस यूके सहित 23 देशों में फैल चुका है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में फिलाहाल ये तो स्पष्ट नहीं किया गया है कि इससे कितने लोग संक्रमित हुए हैं पर विशेषज्ञों की टीम लगातार इसे चिंताजनक मानते हुए लोगों को अलर्ट कर रही है। 

    अगर आसान भाषा में समझें तो वायरस वही है, लेकिन इसका व्यवहार थोड़ा बदल गया है। इसके खतरे को देखते हुए वैज्ञानिकों की टीम फिर से कमजोर इम्युनिटी वालों को वैक्सीन लगाने की सलाह दे रही है।

    क्या कोरोना का ये नया वैरिएंट एक नई लहर का कारण बनने वाला है? फिर से मास्क और वैक्सीनेशन की जरूरत पड़ने जा रही है, आइए इसे विस्तार से समझते हैं?

    इम्युनिटी को चकमा देने की क्षमता वाला है ये नया वैरिएंट

    सिकाडा वैरिएंट के फैलने की रफ्तार और इसकी प्रकृति को देखते हुए अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि ये नया वैरिएंट जल्द ही यूके में सबसे ज्यादा फैलने वाला स्ट्रेन बन सकता है। इसके चलते विशेषज्ञों ने मांग की है कि कोविड वैक्सीन को प्री-स्कूल टीकाकरण कार्यक्रमों में शामिल किया जाए।

    • फिलहाल ये वैरिएंट यूके सहित 23 देशों में रिपोर्ट किया जा चुका है। 
    • विशेषज्ञों को चिंता है कि इसमें देखे गए म्यूटेशन इसे मौजूदा वैक्सीन से मिलने वाली इम्युनिटी से बचने में मदद कर सकते हैं।
    • वैसे तो इसके लक्षण मूल वायरस जैसे ही हैं, हालांकि इससे स्कूल जाने वाले बच्चों में ज्यादा खतरा होने की आशंका जताई गई है। 
    • अभी तक इस वैरिएंट से संक्रमितों में वही पुराने लक्षण जैसे थकान, बुखार और बदन दर्द, गले में खराश जैसी समस्याएं ही देखी गई हैं। 

    बच्चों में जोखिमों को लेकर अलर्ट कर रहे हैं विशेषज्ञ

    बच्चों को इस नए वैरिएंट से ज्यादा सतर्क रहने को लेकर अलर्ट किया जा रहा है। 

    इस बारे में लीड्स यूनिवर्सिटी के वायरल ऑन्कोलॉजिस्ट प्रोफेसर स्टीफन ग्रिफिन कहते हैं, इसकी एक वजह जॉइंट कमिटी ऑन वैक्सीनेशन एंड इम्यूनाइजेशन (जेसीवीआई) की 'दूरदर्शिता की कमी वाली' सलाह है, जिसमें बच्चों के लिए वैक्सीन को 'वैकल्पिक' रखने की बात कही गई थी।

    • अभी इस वायरस की गति को देखकर ऐसा नहीं लगता कि यह कोई तेजी से फैलने वाली महामारी की लहर है। यह पिछले साल की तरह ही धीरे-धीरे बढ़ने वाला ही लग रहा है। 
    • फिर भी, ज्यादा संक्रमण का मतलब है कि वायरस के म्यूटेशन की संभावना भी ज्यादा हो जाती है। 
    • ऐसी स्थिति में  इस बात का भी खतरा रहता है कि म्यूटेशन के बाद वायरस में ऐसे बदलाव आ जाएं जो नई मुसीबतों का कारण बन सकते हैं। 

    पिछली लहरों के दौरान  दोबारा संक्रमण होने और बच्चों में लॉन्ग कोविड के जोखिमों को ध्यान में नहीं रखा गया था। ऐसे में हमें यह याद रखना चाहिए कि अभी भी बहुत से लोग वैक्सीन से मिलने वाली सुरक्षा से वंचित हैं। ये वायरस पहले से ही वैक्सीन से बनी इम्युनिटी को चकमा देने वाला पाया गया है, ऐसे में खतरा और भी ज्यादा हो सकता है।

    75 म्यूटेशन वाला वायरस, फिर से वैक्सीनेशन की सलाह

    इस वैरिएंट को लेकर जो शुरुआती विश्लेषण किया गया है उससे पता चलता है कि इस वैरिएंट के स्पाइक प्रोटीन में अब तक लगभग 75 म्यूटेशन हो चुके हैं, जिससे यह इम्यून सिस्टम के लिए एक बिल्कुल नया खतरा बन गया है। 

    • ईस्ट एंग्लिया यूनिवर्सिटी के माइक्रोबायोलॉजिस्ट प्रोफेसर पॉल हंटर बताते हैं, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि इससे गंभीर रोगों का खतरा या मौतों में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। 
    • यह कोई हैरानी की बात नहीं है कि एक नए वेरिएंट के बारे में पता चला है। असल मुद्दा यह है कि क्या यह नया वैरिएंट पब्लिक हेल्थ के लिए कोई बड़ा खतरा पैदा करता है? 
    • इस बात की पूरी आशंका है कि कोई भी नया वैरिएंट जो दूसरे वैरिएंट्स से ज्यादा तेजी से फैलता है, वह इन्फेक्शन बढ़ाता है लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि इससे बीमारी का बोझ भी बढ़ जाएगा।

    फिर से वैक्सीनेशन की पड़ेगी जरूरत

    विशेषज्ञों ने कहा, असल समस्या यह है कि वैक्सीनेशन की दर लगातार गिर रही है। प्रोफेसर ग्रिफ्रिन कहते हैं, हमें यह याद रखना चाहिए कि  वैक्सीन्स की वजह से ही आजकल गंभीर कोविड होने के मामलों में काफी कमी आई है। लेकिन यह सुरक्षा तभी  ज्यादा असरदार होगी, जब वैक्सीनेशन हाल ही में करवाया गया हो।नए खतरे को देखते हुए फिर से जोखिम समूह वालों को फिर से वैक्सीन लगवानी चाहिए। विशेषतौर पर स्कूल जाने वाले बच्चों को फिर से टीके दिए जाने चाहिए।

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