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    NHM घोटाले में अफसरों की बढ़ीं मुश्किलें, 22 दिन बाद भी जवाब नहीं दे सके अधिकारी

    जबलपुर: जबलपुर के स्वास्थ्य विभाग में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत 58 लाख रुपये के बड़े घोटाले का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है। शहरी स्वास्थ्य केंद्रों (संजीवनी क्लीनिकों) का राष्ट्रीय मानकों के अनुसार प्रमाणीकरण न कराने पर एनएचएम की अपर मिशन संचालक दिशा प्रणव नागवंशी ने जबलपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) समेत चार अधिकारियों को 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया था। अधिकारियों को 15 दिन के भीतर जवाब देना था, लेकिन नोटिस जारी होने के 22 दिन बीत जाने के बाद भी अफसरों ने अब तक कोई जवाब नहीं दिया है।

    अधिकारियों को चेतावनी दी गई है कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं मिला, तो खर्च की गई पूरी राशि उन्हीं से वसूली जाएगी। अब इस मामले में रिकवरी और एफआईआर (FIR) दर्ज होने की संभावना बढ़ गई है।

    लाखों खर्च, पर काम जीरो

    साल 2025-26 में जबलपुर जिले की 58 संजीवनी क्लीनिकों को नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड (NQAS) के मानकों के तहत अपग्रेड करने के लिए प्रति क्लीनिक एक लाख रुपये के हिसाब से कुल 58 लाख रुपये दिए गए थे। इनमें से 56.98 लाख रुपये कागजों पर खर्च भी कर दिए गए। लेकिन जब राज्य स्तर पर इसकी समीक्षा की गई, तो पता चला कि जिले की एक भी स्वास्थ्य संस्था का प्रमाणीकरण (Certification) नहीं हुआ है और न ही क्लीनिकों को मानकों के अनुरूप तैयार किया गया।

    पुराने कामों को नया दिखाकर घोटाला

    इस घोटाले में सहायक शहरी कार्यक्रम प्रबंधक संदीप नामदेव पर गंभीर आरोप हैं। जांच में सामने आया है कि एनक्यूएएस प्रमाणीकरण के नाम पर केवल कागजी औपचारिकताएं पूरी की गईं। संजीवनी क्लीनिकों में सिर्फ रंग-रोगन करवाकर और पुराने समय में हुए कामों को दोबारा नया दिखाकर सरकारी बजट ठिकाने लगा दिया गया। राज्य स्तर से आई जांच टीम ने इस गड़बड़ी पर सख्त नाराजगी जताई है।

    नियम ताक पर रखकर चहेते वेंडरों को फायदा

    नियमों के अनुसार, 58 लाख रुपये के इस काम के लिए खुली निविदा (ओपन टेंडर) प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी। लेकिन आरोप है कि जिला लेखा प्रबंधक रेखा साहू और एपीएम संदीप नामदेव ने मिलकर नियमों को दरकिनार किया। उन्होंने लोकल लेवल पर सामग्री की खरीदी दिखाकर अपने पसंदीदा वेंडरों को फायदा पहुंचाया। प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि रेखा साहू के ऊंचे रसूख और राजनीतिक दबाव के कारण यह मामला लंबे समय तक दबा रहा और भोपाल से 4 मई को नोटिस जारी होने के बाद भी इसे छुपाने की कोशिश की गई।

    इन चार अधिकारियों से मांगा गया है जवाब

    एनएचएम ने इसे बेहद गंभीर लापरवाही मानते हुए जिन चार अधिकारियों को नोटिस थमाया है, उनके नाम इस प्रकार हैं:

    • डॉ. नवीन कोठारी (CMHO)

    • संदीप नामदेव (सहायक शहरी कार्यक्रम प्रबंधक)

    • शिखा गर्ग (जिला क्वालिटी मॉनिटर)

    • रेखा साहू (जिला लेखा प्रबंधक)

    'मैं तो एक महीने पहले ही आया हूं' — वर्तमान CMHO

    इस पूरे मामले पर वर्तमान सीएमएचओ डॉ. नवीन कोठारी ने खुद का बचाव करते हुए कहा है कि उन्हें पद संभाले अभी एक महीना ही हुआ है। जिस समय यह पूरा घटनाक्रम और भुगतान हुआ, उस समय डॉ. संजय मिश्रा सीएमएचओ और आदित्य सिंह डीपीएम (DPM) थे। डॉ. कोठारी का तर्क है कि पुराने समय में लिए गए फैसलों और भुगतानों के लिए वर्तमान अधिकारियों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

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