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    निकिता ने बीमारी के बावजूद 12वीं की परीक्षा दी थी

    श्रीगंगानगर। राजस्थान में 12वीं बोर्ड का रिजल्ट मंगलवार (31 मार्च) को घोषित कर दिया गया. वहीं इस बोर्ड परीक्षा में कमाल कर देने वाली श्रीगंगानगर के रावला गांव की निकिता के परिवार के लिए ये दिन भावुक कर देने वाला था. दरअसल, निकिता ने तेज बुखार के दौरान 12वीं बोर्ड के एग्जाम दिए और कुछ दिन बाद तबीयत ज़्यादा बिगड़ने के बाद निकिता ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया. वहीं मगंलवार को जब रिजल्ट आया तो निकिता के 93 फीसदी नंबर आए. रिजल्ट आने के बाद तमाम बच्चों के घर खुशी का माहौल था लेकिन निकिता के घर बेटी का रिजल्ट देख परिवार मे मातम का छाया हुआ है. परिवार ने बताया की पेपर देने के कुछ दिन बाद उसकी तबियत खराब हो गई थी, जिसके चलते अधिक डायबटीज होने से निकिता की मौत हो गई. निकिता की मौत रिजल्ट आने से 20 दिन पहले हुई. वह कलेक्टर बनना चाहती थी लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था।

    परीक्षा के बाद ज्यादा बीमार हो गई थी निकिता

    श्रीगंगानगर  के राजकीय उच्च माध्यमिक विधालय रावला में पढ़ने वाली छात्रा परीक्षा की जंग में तो जीत गई लेकिन जिंदगी की जंग से परीक्षा परिणाम आने से पहले ही हार गई. कक्षा 12वीं की छात्रा निकिता ने इस वर्ष कला वर्ग में 12वीं  की परीक्षा दी थी. परीक्षा होने के बाद निकिता अचानक बीमार हो गई. इसके बाद निकिता के परिजन उसे इलाज के लिए लेकर गए तो डॉक्टर की टीम ने उसे बीकानेर भेज दिया।

    पढ़ाई में होनहार थी निकिता

    बीकानेर में पीलिया से पीड़ित निकिता ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. वहीं आज जारी हुए परीक्षा परिणाम में निकिता के 93.80% अंक आए हैं. निकिता के परिजनों के भी बेटी के निधन के बाद बुरा हाल है. निकिता के पिता मंगल सिंह व माता चरनजीत कोर ने बताया कि उनकी बेटी पढाई में बहुत ही होनहार थी लेकिन भगवान को कुछ और मंजूर था।

    तेज बुखार में दिए पेपर

    वहीं निकिता की दो ओर बहने हैं जिसमे एक बहिन बड़ी भिंदर कोर जो कि अपने ननिहाल में बीएसटीसी कर रही है तो उसकी छोटी बहन निशु 10 कक्षा पास की है और छोटा भाई अरमान सिंह है उसमें भी इसी वर्ष कक्षा 8वीं पास की है. और निकिता के माता पिता मजूदरी करते है. निकिता के पिता ने बताया कि निकिता को पेपर देने के दौरान ही तेज बुखार हो गया था और बुखार में ही उसने पेपर दिए।

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