सुबह नींद खुलते ही कई लोग सबसे पहले अपनी हथेलियों को देखते हैं. यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है. बड़े-बुजुर्ग भी बच्चों को सुबह उठकर हथेली देखने की सलाह देते हैं. मान्यता है कि इससे दिन की शुरुआत शुभ होती है और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है. बल्लभगढ़ के महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि सुबह उठते ही सबसे पहले अपने दोनों हाथों को आपस में मसलना चाहिए और फिर हथेलियों का दर्शन करना चाहिए. वास्तु शास्त्र में इसका विशेष महत्व बताया गया है. जब हम अपनी हथेलियों को देखते हैं तो उसमें मां लक्ष्मी, मां सरस्वती और भगवान के स्वरूप का स्मरण करते हैं. इससे दिन की शुरुआत अच्छे विचारों के साथ होती है. महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि जब हम सुबह अपनी हथेलियों का दर्शन करते हैं तो यह भगवान गोविंद के दर्शन के समान है. इससे मन में सकारात्मकता आती है और पूरे दिन अच्छा महसूस होता है.
महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि जो व्यक्ति ब्रह्म मुहूर्त में उठ जाता है उसके लिए यह सबसे उत्तम समय माना गया है. हालांकि जो लोग किसी कारणवश ब्रह्म मुहूर्त में नहीं उठ पाते उन्हें भी सूर्य उदय से पहले उठने का प्रयास करना चाहिए. सूर्य निकलने के बाद अधिक देर तक सोना शास्त्रों में उचित नहीं माना गया है. सुबह उठते ही माता धरती को प्रणाम करना चाहिए. भगवान राम भी सुबह उठकर धरती माता को प्रणाम करते थे. हमारे शास्त्रों में ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं जो हमें अच्छे संस्कार और अनुशासित जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं.
महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि सुबह की शुरुआत अच्छे विचारों, भगवान के स्मरण और हथेली दर्शन से की जाए तो मन शांत रहता है और दिनभर सकारात्मक सोच बनी रहती है. यही कारण है कि आज भी कई परिवारों में सुबह उठकर हथेली देखने की परंपरा निभाई जाती है.


