More
    Homeराजस्थानजयपुरनिकाय-पंचायत चुनाव को लेकर राजस्थान में सियासी हलचल तेज, तीसरे मोर्चे से...

    निकाय-पंचायत चुनाव को लेकर राजस्थान में सियासी हलचल तेज, तीसरे मोर्चे से बढ़ेगी चुनौती?

    जयपुर: राजस्थान में लंबे समय से लंबित चले आ रहे स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों को लेकर राजनीतिक पारा अब तेजी से चढ़ने लगा है। हाल ही में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में ओबीसी आयोग की रिपोर्ट को औपचारिक मंजूरी मिलने और कानून मंत्री जोगराम पटेल द्वारा पंद्रह से सत्रह अगस्त के बीच निकाय चुनावों के लिए आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया पूरी किए जाने के संकेत दिए जाने के बाद से राजनीतिक गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है। आरक्षण तय होने की इस प्रक्रिया के तुरंत बाद चुनाव का प्रस्ताव राज्य निर्वाचन आयोग को भेज दिया जाएगा, जिसके बाद आधिकारिक चुनावी कार्यक्रम जारी होने की तस्वीर पूरी तरह से साफ हो जाएगी।

    पारंपरिक दोतरफा मुकाबले के बजाय त्रिकोणीय या बहुकोणीय संघर्ष के आसार

    स्थानीय निकाय चुनावों की इस सरगर्मी के बीच भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता और निष्कासित नेता कृष्ण कुमार जानू ने बड़ा राजनीतिक दावा करते हुए कहा है कि इस बार के स्थानीय चुनाव केवल पारंपरिक रूप से बीजेपी और कांग्रेस के आमने-सामने के मुकाबले तक सीमित नहीं रहने वाले हैं। उनके अनुसार, दक्षिण राजस्थान के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में 'भारत आदिवासी पार्टी' (BAP), जबकि प्रदेश के अन्य हिस्सों में 'राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी' (RLP), 'बहुजन समाज पार्टी' (BSP) और मजबूत निर्दलीय उम्मीदवारों की सक्रियता पूरे चुनावी समीकरण को बदलकर रख सकती है।

    दक्षिण राजस्थान में बीएपी और क्षेत्रीय दलों की मजबूत होती चुनौती

    कृष्ण कुमार जानू का मानना है कि जनता के एक वर्ग में दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रति उपजी नाराजगी यदि वोटों के रूप में तब्दील होती है, तो कांग्रेस और बीजेपी दोनों के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। विशेष रूप से दक्षिण राजस्थान में कांग्रेस द्वारा कई स्थानीय नेताओं को अपने पाले में लाने के बावजूद बीएपी का अपना ठोस संगठनात्मक आधार कायम है, जो आगामी पंचायत चुनावों में दोनों दलों को कड़ी टक्कर देगा। इसके अलावा, क्षेत्रीय स्तर पर मजबूत पकड़ रखने वाले निर्दलीय विधायक और स्थानीय क्षत्रप भी चुनाव परिणामों को प्रभावित करने की पूरी क्षमता रखते हैं।

    कांग्रेस के संगठन और बीजेपी की विकासात्मक योजनाओं पर सवाल

    कांग्रेस पार्टी की जमीनी स्थिति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने आंतरिक गुटबाजी और नेतृत्व की खींचतान का हवाला दिया तथा कहा कि यद्यपि पार्टी वर्ष 2028 में सरकार बनाने के दावे कर रही है, किंतु ये स्थानीय निकाय चुनाव कांग्रेस के संगठन और उसकी जमीनी पकड़ की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होंगे। इसके साथ ही उन्होंने सत्तारूढ़ बीजेपी सरकार की कार्यप्रणाली, यमुना जल समझौते और विकास योजनाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि कागजी घोषणाओं के बजाय धरातल पर वास्तविक बदलाव का दिखना बेहद जरूरी है।

    आरक्षण प्रक्रिया और परिसीमन के बाद स्पष्ट होगा असली मुकाबला

    आगामी पंद्रह अगस्त के आसपास होने वाली आरक्षण की लॉटरी और वार्ड परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य के स्थानीय चुनावों का असली राजनीतिक परिदृश्य जनता के सामने आ जाएगा। युवाओं, बेरोजगारी और विभिन्न स्थानीय मुद्दों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच जुबानी जंग भी तेज हो गई है। अब सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि क्या राजस्थान के यह निकाय और पंचायत चुनाव हमेशा की तरह दो दलों की लड़ाई बनकर रह जाएंगे या फिर क्षेत्रीय दल और तीसरे मोर्चे की सक्रियता से चुनावी गणित पूरी तरह उलट जाएगा।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here