सुनाम: पंजाब में नगर निकाय चुनावों की सुगबुगाहट के बीच सुनाम में सियासी पारा उस वक्त चढ़ गया जब नामांकन के लिए जरूरी अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) न मिलने से नाराज समूचा विपक्ष एक सुर में प्रशासन के खिलाफ सड़कों पर उतर आया।
विपक्षी दलों का एकजुट प्रदर्शन और कार्यालय का घेराव
नगर निकाय चुनाव की दहलीज पर खड़े सुनाम में गुरुवार को उस समय एक अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो गई जब भाजपा, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल के नेता और उम्मीदवार एक साथ मिलकर नगर परिषद कार्यालय पहुंच गए। भाजपा जिलाध्यक्ष दामन बाजवा के नेतृत्व में एकजुट हुए विपक्षी उम्मीदवारों ने प्रशासनिक ढुलमुल रवैये के खिलाफ कड़ा रोष जाहिर करते हुए कार्यकारी अधिकारी (EO) के दफ्तर का घेराव कर दिया। आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने कार्यालय के भीतर से कुर्सियां हटाकर फर्श पर ही दरी बिछा दी और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की, जिससे पूरा परिसर घंटों तक हंगामे की भेंट चढ़ा रहा।
एनओसी के मुद्दे पर बढ़ा सत्तापक्ष और विपक्ष का टकराव
विपक्षी नेताओं ने प्रशासन पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया में निष्पक्षता को ताक पर रखकर केवल सत्ताधारी दल के करीबियों को प्राथमिकता दी जा रही है। कांग्रेस नेता जसविंदर धीमान और अकाली दल के अमनबीर सिंह चैरी सहित अन्य नेताओं का तर्क था कि विपक्ष के उम्मीदवारों को मामूली तकनीकी खामियों का बहाना बनाकर एनओसी देने से रोका जा रहा है, जबकि सरकार समर्थित लोगों को रातों-रात प्रमाण पत्र बांटे जा रहे हैं। विपक्षी दलों ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित करने की एक सोची-समझी साजिश करार देते हुए दफ्तर के भीतर ही डेरा डाल लिया।
अधिकारियों की अनुपस्थिति ने बढ़ाया उम्मीदवारों का गुस्सा
घंटों इंतजार करने के बाद भी जब कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा और न ही प्रमाण पत्र जारी किए गए, तो प्रत्याशियों का धैर्य जवाब दे गया। नाराज उम्मीदवारों ने दफ्तर की कुर्सियां एक तरफ धकेल दीं और जमीन पर बैठकर यह स्पष्ट कर दिया कि जब तक उन्हें एनओसी नहीं मिल जाती, वे वहां से टस से मस नहीं होंगे। प्रदर्शनकारियों की दोटूक चेतावनी थी कि प्रशासन को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी और सरकार के दबाव में काम करने के बजाय सभी उम्मीदवारों को समान अवसर प्रदान करने होंगे।
भारी दबाव के बाद प्रशासन ने जारी किए प्रमाण पत्र
लगातार बढ़ते हंगामे और विपक्षी दलों की एकजुटता को देखते हुए आखिरकार प्रशासनिक अधिकारी दफ्तर पहुंचे और स्थिति को संभालने की कोशिश की। गहन चर्चा और उम्मीदवारों के कड़े रुख के बाद ईओ ने कई प्रतीक्षारत उम्मीदवारों को मौके पर ही एनओसी जारी करना शुरू कर दिया, जिसके बाद ही प्रदर्शनकारी शांत हुए। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिन्होंने साफ किया कि यदि भविष्य में भी चुनाव प्रक्रिया में पक्षपात की कोशिश हुई तो इससे भी बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा।


