नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में जारी गिरावट का दौर अब चुनिंदा शेयरों तक सीमित न रहकर पूरे बाजार में फैल चुका है। प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, बृहस्पतिवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। प्रमुख संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 570.59 अंक यानी 0.79% की बड़ी गिरावट के साथ 71,909.70 अंक के स्तर पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान सेंसेक्स में एक समय 1,187.41 अंकों तक की भारी गिरावट दर्ज की गई थी, जिसके चलते यह लुढ़ककर 71,292.88 के अपने एक साल के सबसे निचले स्तर पर जा पहुँचा। इसी प्रकार, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी (Nifty) भी 198.50 अंक यानी 0.88% टूटकर 22,421.95 अंक पर बंद हुआ। इसके साथ ही, निफ्टी लगातार आठवें सप्ताह कमजोर होता हुआ पिछले 25 वर्षों के इतिहास की सबसे लंबी साप्ताहिक गिरावट के दौर में प्रवेश कर चुका है।
निफ्टी में ऐतिहासिक गिरावट और मंदी की आशंका
पिछले नौ हफ्तों के दौरान निफ्टी सूचकांक में लगभग 2,156 अंक यानी करीब 8.7 प्रतिशत की भारी गिरावट आ चुकी है। अकेले सितंबर महीने में निफ्टी में 6.1% की सुस्ती दर्ज की गई। इस वर्ष जनवरी के महीने में बने 26,373 के अपने सर्वकालिक उच्च (Record High) स्तर से बाजार लगभग 15% नीचे आ चुका है। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि यदि निफ्टी अपने रिकॉर्ड स्तर से 20 प्रतिशत या उससे अधिक नीचे फिसल जाता है, तो तकनीकी रूप से भारतीय शेयर बाजार लंबे समय तक चलने वाले मंदी (Bear Market) के दौर में पहुँच जाएगा। ऐतिहासिक आँकड़ों पर नजर डालें तो इससे पहले वर्ष 2001 में निफ्टी लगातार नौ हफ्तों तक लगातार गिरा था, जबकि वर्ष 1993 में निफ्टी के नाम लगातार 10 हफ्तों तक मंदी दर्ज करने का अनचाहा रिकॉर्ड दर्ज है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा ताबड़तोड़ बिकवाली
भारतीय शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की निरंतर और भारी बिकवाली वर्तमान में निवेशकों और विशेषज्ञों के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के आधिकारिक आँकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने बृहस्पतिवार को भारतीय पूँजी बाजार से 9,484.22 करोड़ रुपये की भारी रकम बाहर निकाल ली।
इससे पहले बुधवार को विदेशी निवेशकों ने 10,148 करोड़ रुपये और मंगलवार को 10,743 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे। केवल तीन कारोबारी दिवसों के भीतर ही उनकी कुल बिकवाली का आँकड़ा 29,000 करोड़ रुपये को पार कर गया है। विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार हो रही इस पूँजी निकासी के कारण बाजार में निवेशकों की खरीदारी की भावना (Buying Sentiment) बेहद कमजोर पड़ गई है।
व्यापक स्तर पर फैली कमजोरी और शेयरों की स्थिति
प्रमुख ब्रोकरेज फर्म आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज (ICICI Securities) की एक रिपोर्ट के अनुसार, 'निफ्टी 500' (Nifty 500) में शामिल लगभग 80 प्रतिशत शेयर वर्तमान में अपने 50-दिवसीय साधारण औसत भाव (50-Day Moving Average) से काफी नीचे कारोबार कर रहे हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि मौजूदा कमजोरी केवल कुछ चुनिंदा बड़े शेयरों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर बाजार के एक बहुत बड़े हिस्से पर दिखाई दे रहा है।
बाजार की अगली चाल और विशेषज्ञों की राय
इस बारे में चर्चा करते हुए सेबी (SEBI) रजिस्टर्ड शोध विश्लेषक विपिन डिक्सेना ने बताया कि तकनीकी रूप से निफ्टी इस समय लगभग 22,400 के महत्वपूर्ण समर्थन (Support) स्तर के आसपास टिका हुआ है। यदि यह समर्थन स्तर टूटता है, तो बाजार पर 22,200 से लेकर 22,000 अंक तक फिसलने का दबाव और अधिक बढ़ सकता है। वहीं, ऊपर की दिशा में 22,600 से 22,800 अंक का दायरा बाजार के लिए तत्काल प्रतिरोध (Resistance) का काम करेगा।


