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    Homeराज्यमध्यप्रदेशकंकड़ वाले चावल और सड़ी सब्जियां, आदिवासी हॉस्टल की छात्राएं पहुंचीं कलेक्ट्रेट

    कंकड़ वाले चावल और सड़ी सब्जियां, आदिवासी हॉस्टल की छात्राएं पहुंचीं कलेक्ट्रेट

    ग्वालियर: मध्य प्रदेश सरकार आदिवासी छात्रों के लिए कई योजनाएं और सुविधाएं चला रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है। इसका ताजा उदाहरण ग्वालियर में सामने आया, जहां शारदा विहार स्थित पीएमए आदिवासी छात्रावास में रहने वाली 20 से अधिक छात्रा अपने ही हॉस्टल की दयनीय स्थिति का खुलासा करने कलेक्ट्रेट आईं। छात्राओं ने न केवल खराब भोजन और गंदगी की शिकायत की, बल्कि अधीक्षिका पर जातिगत भेदभाव और धमकी देने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए।

    गुणवत्ताहीन भोजन परोसा जा रहा

    छात्राओं का कहना है कि उन्हें गुणवत्ताहीन भोजन परोसा जाता है, जिसमें कई बार कीड़े तक पाए जाते हैं। साफ-सफाई की स्थिति भी बेहद खराब है। टीकमगढ़ से आई एक छात्रा ने बताया कि साल भर से वे खराब भोजन और अस्वच्छ वातावरण में रहने को मजबूर हैं। छात्राओं ने अधीक्षिका राखी शर्मा पर आरोप लगाया कि वे बार-बार शिकायत करने के बावजूद उन्हें डांटकर भगा देती हैं। कहती हैं कि तुम्हारे घर में भी ऐसा खाना नहीं मिलता होगा। विरोध करने पर वे कहती हैं कि उनकी पहुंच ऊपर तक है, कोई उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

    नाइट वॉचमैन है एचआईवी ग्रस्त

    एक और गंभीर आरोप हॉस्टल में तैनात महिला नाइट वॉचमैन को लेकर लगाया गया। छात्राओं का कहना है कि उस महिला का पति एचआईवी ग्रसित है और बेटे की भी इसी कारण मृत्यु हो चुकी है। छात्राओं को आशंका है कि कहीं वह महिला स्वयं भी एचआईवी पॉजिटिव न हो। उन्होंने मेडिकल जांच की मांग की है ताकि डर और भ्रम दूर हो सके।

    पांच बार दे चुकी है आवेदन

    छात्राओं ने बताया कि वे यह शिकायत पहली बार नहीं कर रही हैं। इससे पहले भी पांच बार आवेदन दे चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस बार जब मीडिया ने जनजाति कल्याण विभाग के प्रभारी सहायक आयुक्त राजेश वर्मा से सवाल किया तो वे कैमरे से बचते नजर आए।

    वार्डन के व्यवहार से खुश नहीं

    छात्राओं की बातों में उनकी पीड़ा साफ झलकती है। ममता और चांदनी नामक छात्राओं ने मीडिया के सामने वार्डन के व्यवहार और खराब व्यवस्थाओं को लेकर खुलकर बात की। हालांकि प्रशासन ने जांच का आश्वासन दिया है, लेकिन यह देखना बाकी है कि इस बार छात्राओं की आवाज सुनी जाएगी या फिर एक और आवेदन सरकारी फाइलों में गुम हो जाएगा।

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