रायपुर: राजधानी रायपुर में प्रतिबंधित नशीली दवाओं की अवैध बिक्री के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स और थाना गंज पुलिस की संयुक्त टीम ने एक्सप्रेस-वे रोड पर घेराबंदी कर दो तस्करों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के पास से 200 नग नाइट्रोसन-10 प्रतिबंधित टेबलेट, 70 हजार रुपये नकद और दो मोबाइल फोन जब्त किए हैं, जिनकी कुल कीमत लगभग 1.70 लाख रुपये आंकी गई है।
मुखबिर की सूचना पर गंज पुलिस और एंटी नारकोटिक्स टीम की कार्रवाई
पुलिस उपायुक्त क्राइम एवं साइबर स्मृतिक राजनाला और पुलिस उपायुक्त मध्य क्षेत्र तारकेश्वर पटेल के निर्देशन में पुलिस को मुखबिर से सटीक सूचना मिली थी। सूचना में बताया गया कि गंज थाना क्षेत्र में एक्सप्रेस-वे रोड पर श्री हरि श्याम जनरल स्टोर्स के पास दो संदिग्ध युवक प्रतिबंधित दवाओं की तस्करी की फिराक में खड़े हैं। सूचना के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए गठित टीम ने मौके पर पहुंचकर दोनों संदिग्धों को घेराबंदी कर दबोच लिया।
महासमुंद के रहने वाले हैं दोनों आरोपी, नहीं दिखा सके वैध दस्तावेज
पकड़े गए आरोपियों की पहचान चंद्रशेखर परमार (27) और अभिषेक कोसले (19) के रूप में हुई है, जो महासमुंद जिले के निवासी हैं। तलाशी लेने पर उनके कब्जे से नाइट्रोसन-10 की 200 गोलियां बरामद हुईं। दवाओं के भंडारण और बिक्री से जुड़े वैध दस्तावेज मांगे जाने पर आरोपी कोई भी लाइसेंस या कागजात पेश नहीं कर सके। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर सभी सामग्रियां जब्त कर लीं।
NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज, सप्लाई चेन की जांच जारी
पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ थाना गंज में अपराध क्रमांक 239/26 के तहत एनडीपीएस (NDPS) एक्ट की धारा 22(ग) के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस अब इस बात की गहनता से जांच कर रही है कि प्रतिबंधित दवाओं की यह खेप कहां से लाई गई थी और इसे किन लोगों तक पहुंचाया जाना था।
आरोपी चंद्रशेखर परमार का रहा है आपराधिक रिकॉर्ड
पूछताछ के दौरान सामने आया कि मुख्य आरोपी चंद्रशेखर परमार का पूर्व में भी आपराधिक इतिहास रहा है। वह वर्ष 2024 में महासमुंद जिले के कोतवाली थाने में दर्ज हत्या के एक मामले में जेल जा चुका है। पुलिस फिलहाल दोनों आरोपियों से नशीली दवाओं के नेटवर्क और सप्लाई चेन से जुड़े अन्य लोगों के बारे में पूछताछ कर रही है।


