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    थरूर ने युवाओं को चेताया, कहा- सोशल मीडिया मत नहीं बदलता, वोट ज़रूरी है

    नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर इन दिनों 'कॉकरोच जनता पार्टी' अभियान तेजी से सुर्खियां बटोर रहा है। इस बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने देश के युवाओं और खासकर 'जेन-जी' पीढ़ी को एक महत्वपूर्ण सलाह दी है। उन्होंने एक लेख के जरिए युवाओं से कहा है कि सोशल मीडिया जागरूकता फैलाने के लिए एक बेहतरीन जरिया तो हो सकता है, लेकिन अगर देश में कोई वास्तविक बदलाव लाना है, तो लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा बनना बेहद जरूरी है।

    इंस्टाग्राम आपका मंच है, बैलट बॉक्स नहीं

    शशि थरूर का मानना है कि 'कॉकरोच जनता पार्टी' जैसे सोशल मीडिया अभियानों ने उन युवाओं की आवाज को सामने रखा है जो रोजगार, सरकारी परीक्षाओं और प्रशासनिक व्यवस्था से निराश हैं। उन्होंने युवाओं को जमीनी हकीकत से जोड़ते हुए कहा, "इंस्टाग्राम आपका सार्वजनिक मंच तो बन सकता है, लेकिन यह बैलट बॉक्स (मतपेटी) नहीं है।" उन्होंने युवाओं को नसीहत दी कि वे केवल सोशल मीडिया पर निराशा जाहिर करने के बजाय अपने स्थानीय विधायकों और सांसदों के दफ्तरों तक पहुंचें, उनसे सवाल करें और उन्हें जवाबदेह बनाएं। साथ ही व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें।

    संगठित होकर उठाएं आवाज, कानूनी रास्ता अपनाएं

    कांग्रेस सांसद ने युवाओं को संगठित रहने और तथ्यों के साथ अपनी मांगों को रखने की सलाह दी है। उनका कहना है कि जब जनता का दबाव संगठित और तथ्यात्मक होता है, तो मीडिया और जनप्रतिनिधियों को भी उस पर ध्यान देना ही पड़ता है। इसके लिए उन्होंने युवाओं को छात्र संगठनों, कानूनी सहायता समूहों और नीतियों पर काम करने वाली संस्थाओं से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए याद दिलाया कि दुनिया के सफल जनआंदोलन सिर्फ प्रदर्शनों से नहीं, बल्कि मजबूत संगठन, नीति-निर्माण और कानूनी लड़ाइयों के दम पर ही कामयाब हुए हैं।

    क्या है ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ अभियान?

    आपको बता दें कि सोशल मीडिया पर शुरू हुआ 'कॉकरोच जनता पार्टी' अभियान पिछले कुछ महीनों में युवाओं के बीच चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। इस अनोखे अभियान की शुरुआत अभिजीत दिपके ने की है, जो आगामी 6 जून को भारत वापस लौट रहे हैं। यह अभियान मुख्य रूप से युवाओं के रोजगार, परीक्षा प्रणाली में सुधार और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर सोशल मीडिया पर चलाया जा रहा है, जिसे लेकर अब राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में भी बयानबाजी तेज हो गई है।

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