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    खरमास में सूर्यदेव की इस तरह साधना से चमकेगा भाग्य, इन चीजों के दान से पितृ और ग्रह दोष से मिलेगी राहत

    खरमास का नाम सुनते ही अक्सर लोगों के मन में यह बात आती है कि इस दौरान कोई शुभ काम नहीं करना चाहिए. सच भी है कि खरमास में विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य वर्जित माने गए हैं. लेकिन, बहुत कम लोग जानते हैं कि यही समय सूर्यदेव की साधना के लिए बेहद खास और फलदायी माना गया है. खरमास (मलमास) में पूजा, जप, तप और दान का विशेष महत्व शास्त्रों में बताया गया है. यह समय बाह्य कर्मकांड से अधिक आंतरिक साधना का माना गया है. खरमास कोई अशुभ समय नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, साधना और पुण्य संचय का श्रेष्ठ अवसर है. जो व्यक्ति इस काल में पूजा, जप, तप और दान करता है, उसे आने वाले समय में ग्रहों का अनुकूल फल, मानसिक शांति और जीवन में स्थिर उन्नति प्राप्त होती है.

    14 जनवरी को होगा खरमास का समापन
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब सूर्यदेव धनु राशि में प्रवेश करते हैं, तब लगभग एक मास की अवधि को खरमास कहा जाता है. यह काल आत्मिक शुद्धि, आत्मबल बढ़ाने और अंदरूनी ऊर्जा को मजबूत करने के लिए उत्तम होता है. साथ ही इस काल में सूर्य की गति धर्म व आत्मचिंतन की ओर मानी जाती है, इसलिए विवाह, गृहप्रवेश जैसे शुभ व मांगलिक कर्म वर्जित होते हैं. इस बार 16 दिसंबर 2025 से खरमास की शुरुआत हो चुकी है, जो 14 जनवरी 2026 तक रहेगा.

    खरमास में साधना से आते हैं बड़े बदलाव
    ज्योतिष को सूर्यदेव को आत्मविश्वास, तेज, यश और मान-सम्मान का प्रतीक माना गया है. कहा जाता है कि अगर किसी व्यक्ति के जीवन में बार-बार अपमान, असफलता या आत्मविश्वास की कमी महसूस हो रही हो, तो कहीं ना कहीं सूर्य कमजोर हो सकता है. ऐसे में खरमास के दौरान की गई सूर्य साधना जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है. यह साधना ना सिर्फ मन को मजबूत बनाती है, बल्कि समाज में प्रतिष्ठा भी बढ़ाती है. खरमास में साधना व पूजा, जप-तप करने से अंदरूनी ऊर्जा को बल मिलता है और सभी पाप क्षय हो जाते हैं.

    खरमास में हर दिन करें यह कार्य
    खरमास में रोज सुबह स्नान के बाद सूर्य को अर्घ्य देना बहुत शुभ माना जाता है. अर्घ्य देते समय सूर्यदेव का ध्यान करें और उनके नामों का स्मरण करें. इससे मन शांत होता है और दिन की शुरुआत ऊर्जा के साथ होती है. खरमास में दान को सबसे श्रेष्ठ कर्म माना गया है. लाल किताब और धर्मशास्त्रों के अनुसार, इस समय किया गया दान दरिद्रता नाश करता है, पितृ दोष और ग्रह दोष में राहत देता है. खरमास में अन्न दान, तिल, गुड़, कंबल, वस्त्र, गाय, ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान करें.

    हर दिन करें सूर्य चालीसा का पाठ
    खरमास में हर दिन सूर्य चालीसा का पाठ भी अत्यंत फलदायी माना गया है. धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, अगर खरमास में सूर्यदेव की चालीसा का पाठ किया जाए, तो वह प्रसन्न होकर साधक पर अपनी कृपा बरसाते हैं. इसके प्रभाव से व्यक्ति का आत्मविश्वास और समाज में सम्मान बढ़ता है. ज्योतिषियों के मुताबिक, सूर्य चालीसा से कुंडली में सूर्य का स्थान मजबूत होता है, जिससे साधक के मान-सम्मान में वृद्धि, बेहतर नेतृत्व क्षमता, उच्च पद और पिता के साथ रिश्ता मजबूत होता है.

     

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