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    अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ा, 14 शर्तों को ट्रंप ने ठुकराया

    वाशिंगटन / तेहरान: ईरान और अमेरिका के बीच जारी भीषण सैन्य तनाव के बीच दुनिया ने थोड़ी राहत की सांस ली है। पिछले कुछ दिनों से लगातार ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि दोनों पक्ष जल्द ही एक बड़े युद्ध में आमने-सामने होंगे। अमेरिका की ओर से मिल रही लगातार धमकियों और ईरान के कड़े पलटवार के बाद यह माना जा रहा था कि अगले 24 से 48 घंटों के भीतर खाड़ी क्षेत्र फिर से जंग के मैदान में तब्दील हो जाएगा। हालांकि, वैश्विक स्तर पर तेल की आसमान छूती कीमतों और आपूर्ति के संकट के बीच, अब एक सकारात्मक खबर सामने आई है कि अमेरिका ने ईरान पर होने वाले अपने आगामी हमलों की योजना को फिलहाल टालने का फैसला किया है।

    खाड़ी देशों की अपील पर राष्ट्रपति ट्रंप ने रोके हमले

    मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में चरम पर पहुंचे इस संकट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा और रणनीतिक बयान जारी किया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि उन्होंने ईरान के खिलाफ प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है। उनके मुताबिक, यह महत्वपूर्ण निर्णय कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे प्रमुख खाड़ी देशों के विशेष अनुरोध और मध्यस्थता की मांग के बाद लिया गया है। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि इस फैसले के बाद अब अमेरिका और ईरान के बीच बेहद गंभीर कूटनीतिक बातचीत का दौर शुरू हो चुका है।

    ईरानी राष्ट्रपति का रुख, बातचीत का मतलब आत्मसमर्पण नहीं

    दूसरी ओर, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अमेरिका के साथ चल रही इस कूटनीतिक वार्ता को लेकर अपने देश का रुख पूरी तरह साफ कर दिया है। उन्होंने अपने बयान में कड़े लहजे में कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत की मेज पर बैठने का मतलब यह कतई नहीं निकाला जाना चाहिए कि ईरान ने घुटने टेक दिए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि तेहरान इस वार्ता में अपने पूरे सम्मान, सैन्य ताकत और अपने राष्ट्रीय व संप्रभु अधिकारों की रक्षा की शर्त पर ही शामिल हुआ है और देश के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

    युद्धविराम के बावजूद इजरायल और लेबनान में खूनी संघर्ष जारी

    एक तरफ जहां खाड़ी में ईरान-अमेरिका युद्ध का खतरा कुछ टला है, वहीं दूसरी तरफ इजरायल और लेबनान के बीच का हिंसक संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है। अमेरिकी मध्यस्थता के जरिए युद्धविराम की अवधि बढ़ाए जाने के बावजूद सोमवार को इजरायली लड़ाकू विमानों ने लेबनान में बमबारी की, जिसमें कम से कम सात लोगों की मौत हो गई। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, बीते 2 मार्च से लेकर अब तक हुए इजरायली हमलों और सैन्य ऑपरेशनों में 3,020 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि 9,273 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

    अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में गाजा सहायता जहाजों को रोकने पर विवाद

    इन हमलों के अलावा, गाजा के पीड़ित नागरिकों के लिए मानवीय राहत सामग्री ले जा रहे जहाजों (सहायता बेड़े) को रोकने को लेकर इजरायल की वैश्विक स्तर पर चौतरफा आलोचना और घेराबंदी शुरू हो गई है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायली बलों ने अंतरराष्ट्रीय जलसीमा का उल्लंघन करते हुए गाजा सहायता बेड़े के कई जहाजों को बीच समुद्र में ही बंधक बना लिया। बताया जा रहा है कि इस कार्रवाई के दौरान इजरायली नौसेना ने करीब 47 नौकाओं को अपने कब्जे में ले लिया और राहत सामग्री पहुंचाने जा रहे सैकड़ों अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया है।

    वैश्विक नियमों के उल्लंघन पर दुनिया भर में आक्रोश

    इजरायल द्वारा अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में की गई इस बड़ी सैन्य कार्रवाई के बाद कई देशों, वैश्विक नेताओं और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने अपनी तीव्र नाराजगी और आक्रोश जाहिर किया है। मानवाधिकार संस्थाओं का साफ तौर पर कहना है कि अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत खुले समुद्र (इंटरनेशनल वॉटर्स) में मानवीय सहायता ले जा रहे असैन्य जहाजों को बलपूर्वक रोकना अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का खुला उल्लंघन है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते इस चौतरफा तनाव, ईरान-अमेरिका वार्ता के भविष्य, लेबनान में लगातार गिरती लाशों और गाजा सहायता बेड़े पर हुए इस नए विवाद ने पूरी दुनिया को एक बार फिर एक महासंकट के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।

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