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    अलवर में विश्व शांति पर रंगमंच संगोष्ठी, पद्मश्री गफरुद्दीन मेवाती का अभिनंदन

    इप्टा के रंगमंच आयोजन में शांति, संवाद और कला की भूमिका पर मंथन

    अलवर। इप्टा अलवर द्वारा विश्व रंगमंच दिवस के अवसर पर स्थानीय राजगुप्ता सभागार (बर्फ खाना रोड) में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस दौरान विश्व शांति एवं रंगमंच विषय पर संगोष्ठी आयोजित हुई, जिसमें रंगमंच की सामाजिक भूमिका और शांति स्थापना में उसकी उपयोगिता पर गंभीर मंथन किया गया। साथ ही अलवर के गौरव पद्मश्री गफरुद्दीन मेवाती का भी हर्षोल्लास के साथ भव्य अभिनंदन किया गया।

    कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रसिद्ध एवं वरिष्ठ रंगकर्मी दौलत वैध रहे, जबकि नीलाभ पंडित (प्रसिद्ध रंगकर्मी, लेखक एवं साहित्यकार) और भरत मीणा (प्रसिद्ध साहित्यकार) विशिष्ट वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजस्थान इप्टा के अध्यक्ष जगदीश शर्मा ने की।

    संगोष्ठी की शुरुआत करते हुए नीलाभ पंडित ने कहा कि आज विश्व युद्ध की विभीषिकाओं के बादलों से घिरा हुआ है, जिससे समस्त कलाएं प्रभावित हो रही हैं। ऐसे समय में रंगकर्म को और अधिक मजबूत बनाते हुए नए नाटकों का सृजन करना होगा, ताकि युद्ध की त्रासदियों का पर्दाफाश किया जा सके।

    जलेस के सचिव एवं शिक्षक भरत मीणा ने कहा कि इप्टा सदैव शांति प्रयासों में रंगमंच का प्रभावी उपयोग करती आई है। उन्होंने कहा कि रंगकर्मियों को मुस्कुराहट को हथियार बनाकर समाज में प्रेम, संवाद और शांति का संदेश फैलाना चाहिए। उन्होंने ढाई आखर प्रेम यात्रा के प्रसंगों को भी शांति प्रयासों की मिसाल बताया।

    मुख्य वक्ता दौलत वैध ने कहा कि आज के दौर में रंगकर्म की उपयोगिता सर्वोपरि है। रंगमंच संवाद का माध्यम है, इसलिए यह विश्व शांति के प्रयासों में अत्यंत सार्थक है। उन्होंने फिल्मकार राजकपूर के गीत “किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार…” का उल्लेख करते हुए कहा कि रंगमंच का काम भी समाज के दर्द को महसूस कर उसे अभिव्यक्त करना है। यही उसे शांति का सच्चा दूत बनाता है।

    इस अवसर पर अलवर के गौरव पद्मश्री गफरुद्दीन मेवाती का शॉल ओढ़ाकर और मालाएं पहनाकर इप्टा सदस्यों द्वारा भव्य अभिनंदन किया गया, जिस पर सभागार तालियों से गूंज उठा।

    अध्यक्षीय उद्बोधन में जगदीश शर्मा ने कहा कि विश्व में चल रहे अनेक युद्धों के पीछे दौलत की पिपासा बड़ा कारण है। रंगमंच को ऐसा माहौल तैयार करना चाहिए, जिसमें युद्ध के दुष्परिणामों को प्रभावी ढंग से समाज के सामने रखा जा सके। उन्होंने कहा कि विश्व शांति के लिए रंगमंच आज अत्यंत आवश्यक है।

    अलवर के इतिहासकार हरिशंकर गोयल ने भी हथियारों के निर्माण पर रोक लगाने का आह्वान किया और रंगमंच को अधिक शक्तिशाली बनाने की दिशा में कार्य करने पर बल दिया।

    कार्यक्रम में महेंद्र सिंह, प्रदीप माथुर, संदीप शर्मा, मोहम्मद रफीक, माला शर्मा, सर्वेश जैन, मंजू चौहान, नारायण मुटरेजा, अखिलेश, मोहन लाल गुप्ता, महेंद्र गुप्ता, देवेंद्र शर्मा, भोला राम शर्मा और प्रदीप पंचोली सहित बड़ी संख्या में गणमान्य श्रोता उपस्थित रहे।

    अंत में इप्टा अलवर के अध्यक्ष कान्ति जैन ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का सुगठित संचालन राजेश महिवाल ने किया।

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