महावर धर्मशाला में चल रही शिव महापुराण कथा के चतुर्थ दिवस पर डॉ. शिवम साधक ने बताया कि काम से बचना है तो भगवान शिव की शरण में जाना होगा। डॉ. एस.सी. मित्तल और परिवार ने व्यासपीठ की पूजा की।
मिशनसच न्यूज, अलवर। महावर धर्मशाला में आयोजित शिव महापुराण कथा के चतुर्थ दिवस पर व्यासपीठ से कथा वाचक डॉ. शिवम साधक जी महाराज ने कहा कि “यदि जीवन में काम (वासना) से बचना है तो भगवान के चरणों की शरण लेनी होगी।” उन्होंने कथा के माध्यम से कामदेव की उत्पत्ति से लेकर भगवान शिव की समाधि भंग की कथा को विस्तार से सुनाया।
डॉ. साधक ने कहा कि ब्रह्मा जी ने जब कामदेव की रचना की, तब उसका प्रभाव स्वयं ब्रह्मा जी पर पड़ गया और उनका मन विचलित हो गया। फिर भी ब्रह्मा जी ने कामदेव को श्राप नहीं दिया क्योंकि बुद्धिमान व्यक्ति जिस वस्तु को बनाता है, उसे नष्ट नहीं करता।
शिव की समाधि भंग करने का प्रसंग
कथा में आगे बताया गया कि ब्रह्मा जी को आदेश मिला कि भोले बाबा की समाधि भंग की जाए। इसके लिए कामदेव को भेजा गया, परंतु उनकी सारी चेष्टाएं निष्फल रहीं। अंततः भगवान विष्णु ने ब्रह्मा जी से कहा कि “यदि शिव की समाधि को भंग करना है तो भगवती की आराधना करो।”
ब्रह्मा जी ने तपस्या करके माँ भगवती से वरदान माँगा कि वह सती के रूप में जन्म लें और भगवान शिव की अर्धांगिनी बनें। परिणामस्वरूप सती जी का जन्म दक्ष प्रजापति के घर हुआ और आगे चलकर उनका विवाह भगवान शिव से हुआ।
भगवान शिव की परीक्षा और विनाश का संकेत
डॉ. साधक ने कहा कि “जब किसी के मन में अपने से बड़ों की परीक्षा लेने की इच्छा हो तो समझ लेना कि विनाश की घड़ी निकट है।” इसी प्रसंग में भगवान शिव व सती ने कुंभराज ऋषि की कथा में भाग लिया, परंतु सती का मन विचलित हो गया और भ्रम उत्पन्न हुआ।
कथा में उन्होंने यह भी कहा कि यदि भूलवश भी शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ जाए तो भी भगवान शिव प्रसन्न होकर अपने भक्तों पर कृपा करते हैं।
श्रद्धा और भक्ति का माहौल
इस अवसर पर व्यासपीठ की पूजा अलवर के प्रतिष्ठित समाजसेवी एवं मित्तल हॉस्पिटल के निदेशक वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एस. सी. मित्तल एवं उनकी धर्मपत्नी अल्का मित्तल द्वारा की गई। उनके साथ गिरीश गुप्ता (डायरेक्टर एडमिनिस्ट्रेशन, मित्तल हॉस्पिटल), उनकी पत्नी यामिनी गुप्ता और उनकी माताजी गंगा गुप्ता भी उपस्थित रहीं।
पूजा के बाद महाआरती में सभी श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
आयोजन समिति
कथा आयोजन में मदनलाल गुप्ता गाटर वाले, उनकी पत्नी रेशम देवी, डॉ. एस. सी. मित्तल, अल्का मित्तल, मुक्ता मित्तल, मंजू गुप्ता, सुभाष मित्तल, अनिल खंडेलवाल, गिरिराज, गंगा गुप्ता, यामिनी गुप्ता, सुनीता जैन, डॉ. कुमुद गुप्ता, मंजू पालीवाल, संतोष सुनेजा, सुनीता मित्तल, राजकुमारी, वर्षा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।


