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    पूर्व सैनिक पात्रता नियम पर बढ़ा असंतोष

    RPSC भर्तियों में UPSC जैसी व्यवस्था लागू करने की मांग, सैनिक संगठनों ने सौंपा ज्ञापन

    जयपुर। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की भर्तियों में पूर्व सैनिक (Ex-Serviceman) आरक्षण पात्रता से जुड़े नियमों को लेकर सैनिक समुदाय में असंतोष बढ़ता जा रहा है। सेवारत सैनिकों और पूर्व सैनिक संगठनों ने राज्य सरकार से मांग की है कि वर्तमान पात्रता नियमों में संशोधन कर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तर्ज पर अधिक व्यावहारिक व्यवस्था लागू की जाए।

    सैनिक संगठनों का कहना है कि वर्तमान नियमों के अनुसार Ex-Serviceman आरक्षण का लाभ लेने के लिए अभ्यर्थी का आवेदन की अंतिम तिथि से एक वर्ष के भीतर सेवानिवृत्त होना अनिवार्य है। इस प्रावधान के कारण बड़ी संख्या में सेवारत सैनिक आरक्षण के लाभ से वंचित रह जाते हैं।

    भर्ती प्रक्रिया लंबी, सैनिकों को हो रहा नुकसान

    प्रतिनिधियों के अनुसार एक सैनिक 20 से 30 वर्षों तक देश की सेवा करता है, जबकि RPSC की भर्ती प्रक्रिया पूर्ण होने में सामान्यतः दो से तीन वर्ष का समय लग जाता है। इस दौरान कई अभ्यर्थी सेना से सेवानिवृत्त होकर वास्तविक रूप से पूर्व सैनिक की श्रेणी में आ जाते हैं, लेकिन आवेदन के समय लागू एक वर्ष की शर्त के कारण उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाता।

    सैनिक संगठनों का तर्क है कि भर्ती प्रक्रिया की वास्तविक स्थिति को देखते हुए पात्रता निर्धारण के नियमों में बदलाव आवश्यक है, ताकि पात्र अभ्यर्थियों को न्याय मिल सके।

    सैनिकों ने रखीं प्रमुख मांगें

    पूर्व सैनिक संगठनों द्वारा प्रस्तुत ज्ञापन में कई महत्वपूर्ण मांगें रखी गई हैं। इनमें Ex-Serviceman पात्रता का निर्धारण आवेदन की अंतिम तिथि के बजाय अंतिम परिणाम अथवा नियुक्ति तिथि के आधार पर करने की मांग शामिल है।

    इसके अलावा UPSC की तरह सेवारत सैनिकों को एनओसी (NOC) और अंडरटेकिंग के आधार पर आवेदन की अनुमति देने, अंतिम चयन के बाद तीन माह के भीतर सेवा से मुक्त होने की सुविधा प्रदान करने तथा आवेदन तिथि से एक वर्ष के भीतर सेवानिवृत्ति की अनिवार्य शर्त समाप्त करने की मांग भी की गई है।

    आरक्षण की मूल भावना को बनाए रखने की अपील

    सैनिक संगठनों का कहना है कि Ex-Serviceman आरक्षण का मूल उद्देश्य सेना से सेवानिवृत्त कर्मियों को नागरिक जीवन में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। यदि कोई सैनिक भर्ती प्रक्रिया पूर्ण होने से पहले सेवानिवृत्त हो चुका है तो केवल तकनीकी कारणों से उसे आरक्षण लाभ से वंचित करना उचित नहीं माना जा सकता।

    सरकार से नियमों की समीक्षा का आग्रह

    पूर्व सैनिकों ने राज्य सरकार, कार्मिक विभाग और RPSC से नियमों की समीक्षा कर आवश्यक संशोधन करने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे सेना से नागरिक जीवन में आने वाले हजारों सैनिकों को समान अवसर मिल सकेंगे और आरक्षण व्यवस्था की मूल भावना भी सुरक्षित रहेगी।

    पूर्व सैनिक प्रतिनिधियों ने कहा कि देश की सेवा कर चुके सैनिकों को उनके अधिकारों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए तथा पात्रता नियमों में समयानुकूल सुधार किया जाना आवश्यक है।

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