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    मूंग फसल में ‘पैराक्यूटा डिक्लोराइड’ पर रोक लगाने की मांग, मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन

    पैराक्यूटा डिक्लोराइड के दुष्प्रभाव को लेकर किसान महापंचायत ने उठाई प्रतिबंध की मांग

    जयपुर। किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने राजस्थान सरकार से मूंग की फसल में उपयोग किए जाने वाले घातक खरपतवार नाशक ‘पैराक्यूटा डिक्लोराइड’ पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित कर जनस्वास्थ्य और किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कार्रवाई की अपील की है।

    ज्ञापन में बताया गया कि मूंग की फसल को कटाई के समय एक साथ सुखाने के लिए ‘पैराक्यूटा डिक्लोराइड’ नामक गैर चयनात्मक खरपतवारनाशी के उपयोग की आशंका है। विशेषज्ञों के अध्ययन के अनुसार यह अत्यंत विषैला रसायन है, जो फेफड़ों, गुर्दों और यकृत को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है तथा कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। भारत की राष्ट्रीय औषधि पत्रिका में भी इसके दुष्प्रभावों को लेकर अध्ययन प्रकाशित किए जा चुके हैं।

    रामपाल जाट ने कहा कि तेलंगाना राज्य में इसकी बिक्री पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है, जबकि ओडिशा सरकार वर्ष 2023 में ही इस पर रोक लगा चुकी है। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश में जायद मूंग की फसल में इसके दुष्प्रभाव सामने आने के बाद उपभोक्ताओं में भी चिंता बढ़ी है और लोग ऐसी फसल से दूरी बनाने लगे हैं।

    ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि राजस्थान देश में खरीफ मूंग उत्पादन में प्रथम स्थान पर है और देश के कुल उत्पादन का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा राजस्थान में उत्पादित होता है। यदि इस खरपतवारनाशी का उपयोग जारी रहा तो राजस्थान की मूंग की मांग और किसानों को मिलने वाले दामों पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।

    किसान महापंचायत ने राज्य सरकार से मांग की है कि जनहित में तत्काल 90 दिन के लिए इस खरपतवारनाशी पर प्रतिबंध लगाया जाए और केंद्र सरकार से स्थायी प्रतिबंध के लिए पत्राचार किया जाए। साथ ही राजस्थान की मूंग को “कीट एवं खरपतवारनाशी मुक्त” घोषित कर उसकी ब्रांडिंग और प्रचार-प्रसार करने की भी मांग की गई है, ताकि उपभोक्ताओं को गुणवत्तायुक्त एवं स्वास्थ्यवर्धक मूंग उपलब्ध हो सके और किसानों को बेहतर मूल्य मिल सके।

    रामपाल जाट ने कहा कि यदि सरकार समय रहते कार्रवाई करती है तो इससे किसानों को आर्थिक लाभ मिलेगा, उपभोक्ताओं का स्वास्थ्य सुरक्षित रहेगा और राजस्थान की कृषि उपज की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।

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