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    मोक्ष सप्तमी पर भीलवाड़ा में उतरा इन्द्रलोक, पार्श्वनाथ प्रभु की भक्ति में सजा सम्मेदशिखर

    पुलकसागर महाराज के सानिध्य में मोक्ष सप्तमी पर निकली भव्य रथयात्रा, 40 फीट की जीवंत झांकी और 23 निर्वाण लड्डुओं ने मोहा मन

    भीलवाड़ा। जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक दिवस मोक्ष सप्तमी पर भीलवाड़ा की धरा पर बुधवार को श्रद्धा, भक्ति और जैन संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागर महाराज ससंघ के सानिध्य में भीलवाड़ा में पहली बार भव्य मंगल रथयात्रा निकाली गई। रथयात्रा के दौरान ऐसा दृश्य नजर आया मानो भक्ति के बीच साक्षात इन्द्रलोक उतर आया हो।

    सकल दिगंबर जैन समाज एवं श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के तत्वावधान में आयोजित इस भव्य आयोजन में सकल जैन समाज के साथ सर्व समाज के लोगों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम स्थल चित्रकूटधाम में भगवान पार्श्वनाथ सहित जैन तीर्थंकरों की निर्वाण भूमि सम्मेदशिखर महातीर्थ की विशाल जीवंत रचना श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही।

    पांच एरावत हाथी और 10 सुसज्जित हाथी बने आकर्षण

    मंगल रथयात्रा सूर्यमहल से शुरू हुई। रथयात्रा में शामिल होने के लिए शास्त्रीनगर स्थित पार्श्वनाथ मंदिर से श्रीजी भगवान को रथ में विराजमान कर सूर्यमहल लाया गया। बैंडबाजों की मधुर स्वर लहरियों और जयकारों के बीच आचार्य पुलकसागर महाराज ससंघ के सानिध्य में रथयात्रा आगे बढ़ी।

    रथयात्रा का मुख्य आकर्षण उत्तर प्रदेश के बड़ौत से आए पांच एरावत हाथी रहे, जिन पर सौधर्म इन्द्र और इन्द्राणी सवार थे। श्रीजी के रथ के आगे 10 विशेष रूप से सुसज्जित हाथी चल रहे थे। भगवान पार्श्वनाथ के जीवन चरित्र और विभिन्न प्रसंगों को प्रदर्शित करती सात विशेष झांकियों ने भी श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।

    महिला मंडलों की श्राविकाएं विशाल ध्वज-पताकाएं लेकर सबसे आगे चल रही थीं। ढोल, मंजीरे और भक्ति गीतों के बीच पूरा मार्ग भगवान पार्श्वनाथ के जयकारों से गूंज उठा।

    शहरवासियों ने देखा सम्मेदशिखर का जीवंत स्वरूप

    मंगल रथयात्रा बड़ला चौराहा, राजीव गांधी सर्किल और नेताजी सुभाष मार्केट होते हुए चित्रकूटधाम पहुंची। मार्ग में जगह-जगह शहरवासी इस भव्य धार्मिक आयोजन को देखने के लिए उमड़ पड़े।

    चित्रकूटधाम में आचार्य पुलकसागर महाराज ससंघ के सानिध्य में चिंतामणि पार्श्वनाथ का भव्य दरबार सजाया गया। यहां 40 फीट लंबी और 12 फीट ऊंची सम्मेदशिखर की विशाल जीवंत झांकी तैयार की गई, जो श्रद्धा और आस्था का केंद्र बन गई।

    झांकी के शिखर पर विराजमान भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा के समक्ष सबसे पहले सौधर्म इन्द्र ने अभिषेक किया। इसके बाद इन्द्र-इन्द्राणी बने श्रावक-श्राविकाओं ने कतारबद्ध होकर भगवान का अभिषेक किया। पूरा दृश्य श्रद्धालुओं को देव वंदना की अनुभूति करा रहा था।

    पाटनी परिवार ने कराई सम्मेदशिखर तीर्थ वंदना

    संघपति बनने का सौभाग्य सरोजदेवी, मनीष, अभिषेक एवं राहुल पाटनी परिवार को प्राप्त हुआ। पाटनी परिवार के सदस्यों ने धर्म ध्वज के साथ आगे चलकर आचार्य पुलकसागर महाराज ससंघ को सम्मेदशिखर की तीर्थ वंदना कराई। मुनि संघ के साथ सौधर्म इन्द्र-इन्द्राणी और समाज के प्रमुख श्रावक-श्राविकाओं ने भी वंदना में सहभागिता की।

    भगवान पार्श्वनाथ को शांतिधारा का लाभ गुलाबचंद, मनीष एवं नीरज शाह परिवार ने प्राप्त किया। वहीं सम्मेदशिखर की जीवंत रचना पर भगवान पार्श्वनाथ को 23 किलो का निर्वाण लड्डू समर्पित करने का सौभाग्य पारसमल, महावीरसिंह एवं राहुल चौधरी परिवार को मिला।

    इसके अलावा 23 पुण्यार्जक परिवारों द्वारा भगवान पार्श्वनाथ को 23 निर्वाण लड्डू अर्पित किए गए। आयोजन समिति की ओर से सभी लाभार्थी परिवारों का स्वागत किया गया।

    चातुर्मास दे रहा सकल जैन एकता का संदेश

    आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि पूरा विश्व भगवान पार्श्वनाथ की भक्ति में डूबा हुआ है। जैन समाज के विभिन्न वर्ग अपनी-अपनी परंपराओं के अनुसार निर्वाण महोत्सव मना रहे हैं। उन्होंने कहा कि भीलवाड़ा का यह चातुर्मास पूरे देश में सकल जैन एकता का संदेश दे रहा है।

    उन्होंने कहा कि हम सभी एक धर्म के अनुयायी हैं और हमारे आराध्य देव एक हैं। चातुर्मास के दो मुख्य कलश लाभार्थी परिवारों में एक दिगंबर और एक श्वेतांबर जैन परिवार है। इसी प्रकार भगवान पार्श्वनाथ के निर्वाण कल्याणक पर 23 किलो का निर्वाण लड्डू अर्पित करने का सौभाग्य श्वेतांबर जैन समाज के प्रमुख समाजसेवी महावीरसिंह चौधरी परिवार को मिला।

    आचार्यश्री ने कहा कि इस आयोजन में कोई दिगंबर, श्वेतांबर, तेरापंथी या स्थानकवासी नहीं, बल्कि सभी केवल जैन हैं।

    30 अगस्त तक जारी रहेगा ज्ञान गंगा महोत्सव

    श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि ज्ञान गंगा महोत्सव के तहत 30 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह 8:30 से 10 बजे तक चित्रकूटधाम में आचार्य पुलकसागर महाराज के प्रवचन होंगे। शाम 7 से 8 बजे तक आनंद यात्रा एवं आरती का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें शहर के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु पहुंचकर धर्मलाभ ले रहे हैं।

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