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    Homeधर्म-समाजसत्य परेशान हो सकता पर परास्त कभी नहीं हो सकता-आचार्य पुलकसागर

    सत्य परेशान हो सकता पर परास्त कभी नहीं हो सकता-आचार्य पुलकसागर

    पर्युषण में पांचवे दिन उत्तम सत्य धर्म की आराधना,श्रद्धाभाव से भगवान का अभिषेक, आचार्य पुलकसागर महाराज ससंघ के सानिध्य में पर्युषण की भक्ति आराधना जारी

    भीलवाड़ा। श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागरजी महाराज संसघ के सानिध्य में शास्त्रीनगर स्थित सूर्यमहल में दशलक्षण (पर्युषण) महापर्व की आराधना के तहत पांचवे दिन रविवार को श्रद्धा एवं भक्ति भाव से उत्तम सत्य धर्म का पूजन एवं आराधना की गई। भगवान का अभिषेक करने चक्रवती के साथ इन्द्र रूप में श्रावक उमड़े। भगवान की भक्ति में श्रावक श्राविकाएं झूम उठे ओर जमकर नाचते गाते रहे।

    आचार्य पुलकसागर महाराज ने उत्तम सत्य धर्म का संदेश देते हुए कहा कि सत्य का मार्ग कठिन ओर कांटो भरा होता है लेकिन उस पर चलने वाले की हमेशा जीत होती है। झूठ के सहारे कुछ समय सफलता भले मिल जाए लेकिन शांति नहीं मिलेगी। भगवान महावीर के अनुयायी बने जिन्होंने हमेशा सत्य को जाना, समझा ओर जीया।

    सच बोलना आसान नहीं है उसे प्रताड़ना भी सहनी पड़ती है। झूठ सुनना किसी को पसंद नहीं पर झूठ बोलना सबको पसंद है। आज झूठ सम्मानित होता ओर सच अपमानित रहता है पर याद रहे सत्य परेशान हो सकता पर परास्त कभी नहीं हो सकता।

    आचार्यश्री ने कहा कि जो युद्ध में भी अहिंसा व करूणा को देखता है वह जैन धर्म है। हमेशा सत्य में जीने का प्रयास करे। जब तक जीवन से लोभ लालच समाप्त नहीं होगा तब तक सत्य व सच का अवतरण नहीं हो सकता। लोभ लालच में फंसा व्यक्ति कभी उत्तम सत्य जी नहीं सकता। मौन लेने से कोई सत्यवादी नहीं हो जाता। सत्य मुख से कम मन से अधिक प्रकट हुआ करता है।

    उन्होंने कहा कि झूठ मन से पैदा होता ओर जुबान से प्रकट होता है। सत्य के लिए मन की साधना जरूरी है। सत्य बोलना बड़ी बात नहीं सत्य को जानना बड़ी बात है। उत्तम सत्य को जानने में भगवान ऋषभदेव को एक हजार वर्ष, भगवान महावीर को 12 वर्ष ओर बाहुबली भगवान को 12 माह लग गए। कई जन्म लेने के बाद भी जीवात्मा उत्तम सत्य को नहीं जान पाती है।

    आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि सत्य में जीने की साधना करे। लोग कहते सत्य कड़वा होता है जबकि हकीकत ये है कि सत्य नहीं हमारा मन कड़वा होता है। सच को मीठा बनाने का प्रयास करे। हमारे जीवन में सत्य की प्रस्तुति भी प्रभावशाली होनी चाहिए। कई बार झूठ की प्रस्तुति ऐसी होती है कि वह सच प्रतीत होने लगता है।

    पूज्य तरूणसागर महाराज से आत्मीय सम्बन्धों की चर्चा

    आचार्य पुलकसागर महाराज ने प्रवचन के दौरान जेयष्ठ गुरू भ्रात पूज्य तरूणसागर महाराज के साथ आत्मीय सम्बन्धों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि गुरूदेव पुष्पदंत सागर महाराज के आदेश पर वह उनके प्रथम शिष्य तरूणसागर के साथ तीन वर्ष तक रहे। वह उनके शिक्षा गुरू थे।

    हमारी जोड़ी राम लक्ष्मण जैसी थी ओर कभी उनकी आज्ञा की अवज्ञा नहीं की ओर वह कभी मुझसे तेज नहीं बोले। सन्यास जीने का जो मजा उनके साथ आया वह कभी नहीं आया। उनके उपकारों को मैं कभी नहीं भूला सकता। उनके दिए संस्कारों से मेरी भाषा परिष्कृत हुई। तरूणसागर महाराज पहले संत थे जो लाल किले से बोले ओर संसद व कई विधानसभाओं में उद्बोधन दिए।

    आचार्यश्री ने कहा कि 52 वर्ष की उम्र में जिस दिन दिल्ली में उनकी समाधि हुई तब मेरे आंसूओं की बाढ़ ने धैर्य का बांध तोड़ दिया था। मैने जीवन में धर्म के संस्कार गुरूदेव से ओर प्रभावना के संस्कार तरूणसागर से प्राप्त किए।

    सुबह से रात तक परमात्मा की भक्ति में समर्पित श्रद्धालु

    श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि पर्युषण में आयोजित पाप नाशनम् शिविर में शामिल सैकड़ो श्रद्धालु प्रातःकाल से लेकर रात्रि तक परमात्मा की पूजा अर्चना व भक्ति में समर्पित है।

    पूर्यषण के पांचवे दिन चक्रवती बनकर भगवान का अभिषेक करने का सौभाग्य ने सुरेश जैन मुंबई एवं कंचनदेवी छाबड़ा ने प्राप्त किया। शांतिधारा का सौभाग्य श्रेयल, अदिति जैन ने प्राप्त किया। दशलक्षण महापर्व के छठे दिन सोमवार को सुगंध दशमी पर उत्तम संयम धर्म की आराधना होगी।

    चातुर्मास समिति के संयोजक मनीष शाह एवं सह संयोजक लोकेश अजमेरा के अनुसार पाप नाशनम शिविर एवं पर्युषण की दस दिवसीय आराधना अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर 25 सितम्बर को पूर्ण होगी। इस दौरान प्रतिदिन सुबह 5.30 से 6.30 बजे तक योग ध्यान एवं आचार्य भक्ति हो रही है।

    सुबह 7 बजे से भगवान का अभिषेक, शांतिधारा व दशलक्षण धर्म पूजन हो रहा है। सुबह 9.15 से 10.15 बजे तक आचार्य पुलकसागर महाराज के प्रवचन हो रहे है। शाम 4 बजे से धार्मिक कक्षाएं हो रही है। शाम 5.30 से 6.30 बजे तक प्रतिक्रमण एवं ध्यान साधना का आयोजन होता है। शाम को 6.30 बजे आरती के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम के माध्यम से परमात्मा की भक्ति हो रही है।

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