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    अखिलेश के ड्रीम प्रोजेक्ट पर योगी सरकार का फैसला, JPNIC को निजी हाथों में सौंपा गया

    लखनऊ| उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट 'जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर' (JPNIC) को लेकर एक बड़ा और अहम फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई हालिया कैबिनेट बैठक में जेपीएनआईसी को निजी हाथों में सौंपने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इस प्रस्ताव के तहत इस भव्य परिसर को वृंदावन बॉटलर्स एंड रॉकवुड होटल्स को आगामी 30 वर्षों के लिए लीज पर दे दिया गया है, जिसके बाद से राज्य की राजनीति गरमा गई है।

    क्या हैं लीज और अनुबंध की मुख्य शर्तें?

    समझौते के नियमों के अनुसार, चुनी गई निजी कंपनियों को अनुबंध मिलने के बाद अगले दो साल के भीतर अपने खुद के संसाधनों से जेपीएनआईसी के सभी अधूरे पड़े कार्यों को पूरा करना होगा और इसका व्यावसायिक संचालन शुरू करना होगा। संचालन शुरू होने के बाद ये कंपनियां लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) को हर साल 6 करोड़ रुपये का भुगतान करेंगी, जिसमें प्रतिवर्ष 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रावधान भी रखा गया है।

    इसके अलावा, अनुबंध की शर्तों के तहत कंपनियों को 25 करोड़ रुपये की परफॉर्मेंस गारंटी प्राधिकरण के पास जमा करानी होगी, जबकि स्वीकृति पत्र मिलते ही कंसोर्टियम द्वारा एलडीए को 10.11 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाएगा। लीज से प्राप्त होने वाली इस राशि को ब्याज सहित एलडीए द्वारा सरकार को वापस लौटाया जाएगा।

    अखिलेश सरकार में शुरू हुआ था निर्माण, 9 साल से थी बंद

    राजधानी के सबसे प्राइम लोकेशन गोमती नगर क्षेत्र में स्थित जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर का निर्माण कार्य वर्ष 2013 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यकाल के दौरान शुरू किया गया था। इस आधुनिक इमारत को दिल्ली के प्रसिद्ध 'इंडिया हैबिटेट सेंटर' की तर्ज पर डिजाइन करवाया गया था और इसे अखिलेश यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट माना जाता था।

    इस पर कुल 850 करोड़ रुपये की लागत आई थी। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव ने इसका उद्घाटन भी कर दिया था, हालांकि उस समय इसके कुछ आंतरिक काम अधूरे रह गए थे। साल 2017 में उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद जब योगी आदित्यनाथ की सरकार आई, तो जेपीएनआईसी के निर्माण में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे, जिसके बाद से यह शानदार इमारत पूरी तरह बंद पड़ी थी। पिछले नौ वर्षों से वीरान पड़ी इस आलीशान इमारत के कई बहुमूल्य उपकरण देखरेख के अभाव में खराब हो चुके हैं। अब आगामी चुनावों से पहले सरकार ने इसके जीर्णोद्धार के लिए इसे निजी कंपनियों को सौंपने का निर्णय लिया है। इस परिसर में 107 कमरों का होटल, जिम, स्पा सेंटर, सैलून, रेस्टोरेंट, हेलीपैड, दो बड़े कन्वेंशन हॉल और स्विमिंग पूल जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

    राजनीतिक सरगर्मी और अखिलेश यादव का तंज

    योगी सरकार के इस फैसले के सामने आते ही राज्य में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी ने जेपीएनआईसी को निजी हाथों में सौंपे जाने के कदम पर तीखा ऐतराज जताया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर कड़ा तंज कसते हुए कहा, "यह सरकार है या कोई दुकानदार!" उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि अब तो बस पूरी सरकार को ही ठेके पर देना या बेचना बाकी रह गया है।

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