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    संयम से आत्मशुद्धि और संस्कारों की राह होती है प्रशस्त — आचार्य विमर्शसागर जी महाराज

    दसलक्षण महापर्व के छठे दिन उत्तम संयम धर्म की आराधना, चंद्र तीर्थ मंडपम् में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब — 350 शिविरार्थी ले रहे उपासक धर्म संस्कार शिविर में प्रशिक्षण

    देहरा तिजारा। दसलक्षण महापर्व के छठे दिन उत्तम संयम धर्म की आराधना श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के साथ की गई। देहरा तिजारा स्थित चंद्र तीर्थ मंडपम् में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में सहभागिता रही। सुबह से ही मंदिर परिसर में धार्मिक गतिविधियों का सिलसिला शुरू हो गया और पूरा वातावरण जिनेंद्र भक्ति एवं धर्ममय भावनाओं से सराबोर नजर आया।

    इस अवसर पर दिगम्बराचार्य भावलिंगी संत श्री 108 विमर्शसागर जी महामुनिराज ने उत्तम संयम धर्म की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संयम मनुष्य के जीवन को अनुशासन, मर्यादा और आत्मकल्याण की दिशा प्रदान करता है। इन्द्रियों को विषयों से हटाकर आत्मा की ओर लगाना ही संयम की वास्तविक साधना है। मन, वचन और कर्म पर नियंत्रण रखते हुए अहिंसा, जीवदया और सदाचार का पालन करना उत्तम संयम धर्म का स्वरूप है।

    भोग नहीं, संयम से मिलती है आत्मिक शांति

    मंदिर अध्यक्ष मुकेश जैन और प्रचार मंत्री उमंग जैन ने बताया कि आचार्य श्री ने कहा कि मनुष्य बाहरी सुखों की प्राप्ति के लिए निरंतर दौड़ता रहता है, लेकिन वास्तविक शांति बाहरी साधनों में नहीं, बल्कि आत्मसंयम में निहित है। इच्छाओं का विस्तार जितना अधिक होता है, मन उतना ही अशांत होता जाता है। संयम इच्छाओं को मर्यादित करता है और व्यक्ति को आत्मचिंतन की ओर ले जाता है।

    उन्होंने कहा कि संयम केवल साधु-संतों का विषय नहीं है, बल्कि प्रत्येक श्रावक को अपने दैनिक जीवन में संयम को अपनाने का प्रयास करना चाहिए। भोजन, वाणी, व्यवहार, विचार और इन्द्रियों पर नियंत्रण रखते हुए जीवन को धर्ममय बनाना ही संयम की दिशा में कदम है।

    350 शिविरार्थी ले रहे धर्म और संस्कारों की शिक्षा

    दसलक्षण महापर्व के अवसर पर चंद्र तीर्थ मंडपम् में उपासक धर्म संस्कार शिविर भी विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस शिविर में लगभग 350 शिविरार्थी धर्म, संस्कार, जैन सिद्धांत और जीवन मूल्यों की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।शिविर के माध्यम से बच्चों, युवाओं एवं समाज के अन्य वर्गों में धार्मिक संस्कारों को मजबूत करने तथा जैन धर्म के सिद्धांतों को व्यवहारिक जीवन से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। शिविरार्थियों में भी धार्मिक गतिविधियों को लेकर उत्साह दिखाई दे रहा है।

    धर्मसभा में उपस्थित श्रद्धालुओं ने उत्तम संयम धर्म के संदेश को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर में भक्ति एवं धार्मिक वातावरण बना रहा।

    कार्यक्रम में मंदिर अध्यक्ष मुकेश जैन, महामंत्री नरेंद्र जैन, कोषाध्यक्ष शिंभू जैन, प्रचार मंत्री उमंग जैन, चातुर्मास अध्यक्ष सुरेश जैन सहित अनिल जैन, अमन जैन, नरेंद्र जैन, रवि जैन, सचिन जैन, राकेश जैन एवं मिंकू जैन सहित समाज के अनेक पदाधिकारी एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।द

    सलक्षण महापर्व के छठे दिन उत्तम संयम धर्म की आराधना के साथ श्रद्धालुओं ने इन्द्रिय संयम, जीवदया, अहिंसा, सदाचार और आत्मचिंतन को जीवन में अपनाने का संदेश लिया। चंद्र तीर्थ मंडपम् में चल रहे धार्मिक एवं संस्कारमय आयोजनों से देहरा तिजारा का वातावरण पूरी तरह धर्ममय बना हुआ है।

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