भोपाल। राजधानी की मशहूर वीआईपी रोड सुरक्षा व्यवस्था के दावों के विपरीत हादसों का सबब बनती जा रही है। कहने को वीआईपी मानी जाने वाली यह पांच किलोमीटर लंबी सड़क सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों से महरूम है। इस पूरे मार्ग पर सात ऐसे खतरनाक और अंधे मोड़ हैं, जहां वाहन चालकों की जरा सी लापरवाही जानलेवा दुर्घटना में तब्दील हो सकती है। राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) की बस पलटने के एक दिन बाद भी बुधवार को प्रशासन या यातायात पुलिस की ओर से सुरक्षा के कोई नए कदम नहीं उठाए गए। ट्रैफिक पुलिस अमला रेतघाट पर चालानी कार्रवाई में मुस्तैद रहा, लेकिन खतरनाक मोड़ों पर न तो रफ्तार रोकने के इंतजाम दिखे और न ही कोई चेतावनी बोर्ड। नतीजतन, इस मार्ग पर वाहन 90 किलोमीटर प्रति घंटे से भी अधिक की रफ्तार से दौड़ते नजर आए। गौरतलब है कि इसी स्थान पर पूर्व में एक ऑयल टैंकर और निजी संस्थान की बस भी पलट चुकी है।
संवेदनशील मोड़ों पर न संकेतक और न ही स्पीड ब्रेकर
वीआईपी रोड की बनावट और तीखे मोड़ चालकों के लिए लगातार जोखिम पैदा कर रहे हैं। यातायात विशेषज्ञों और पूर्व पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इन दुर्घटना संभावित स्थलों पर गति सीमा दर्शाने वाले बोर्ड, चेतावनी संकेतक और सीसीटीवी कैमरे लगाया जाना बेहद अनिवार्य है। इसके अलावा, तेज रफ्तार पर लगाम लगाने के लिए स्पीड गवर्नर और आधुनिक स्पीड ब्रेकर बनाए जाने की सख्त जरूरत है। नगर निगम, लोक निर्माण विभाग (PWD) और यातायात पुलिस के संयुक्त तकनीकी निरीक्षण के माध्यम से सड़क की खामियों को दूर कर ही दोबारा होने वाले हादसों को रोका जा सकता है।
स्कूल-कॉलेज बसों की रफ्तार और स्पीड गवर्नर पर उठे सवाल
इस भीषण हादसे के बाद शैक्षणिक संस्थानों की बसों में स्पीड गवर्नर जैसे अनिवार्य सुरक्षा उपकरणों की कार्यशीलता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बसों की नियंत्रित रफ्तार सुनिश्चित करने के लिए यातायात पुलिस द्वारा कोई नियमित चेकिंग अभियान न चलाया जाना भी लापरवाही को दर्शाता है। बेकाबू रफ्तार से चलने वाली ये बसें न केवल सवार विद्यार्थियों बल्कि सड़क पर चल रहे अन्य राहगीरों के लिए भी बड़ा खतरा साबित हो रही हैं।
अस्पताल में भर्ती घायलों की हालत में सुधार, मन में हादसे का खौफ
करबला के पास मंगलवार को हुए RGPV बस हादसे में घायल विद्यार्थियों की स्थिति में अब सुधार देखने को मिल रहा है। गंभीर रूप से घायल छात्र अजय परमार को बुधवार को होश आ गया और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण बिगड़ी हालत के बाद अब उसे आईसीयू से इमरजेंसी वार्ड में शिफ्ट किया गया है। चिकित्सकों द्वारा उसके कंधे का ऑपरेशन किया जाएगा। अन्य घायल छात्रों—बसंत कुमार और खुशी गौड़ का भी इलाज जारी है। हालांकि, शारीरिक चोटों के इलाज के बीच छात्र-छात्राओं के मन में हादसे का खौफ इस कदर घर कर गया है कि वे तेज रफ्तार वाहनों को देखकर ही सिहर उठते हैं।


