नई दिल्ली में आयोजित 16वें सीएसआर सम्मेलन में समृद्ध भारत अभियान के निदेशक सीताराम गुप्ता ने ग्रामीण विकास व गरीबी उन्मूलन के लिए नीतियों में बदलाव की जरूरत बताई।
मिशनसच न्यूज नई दिल्ली। राजधानी में आयोजित 16वें कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) सम्मेलन में देशभर के उद्योग जगत, सामाजिक संगठनों, नीति विशेषज्ञों और विकास क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस वार्षिक सम्मेलन में समृद्ध भारत अभियान के निदेशक एवं प्रख्यात सामाजिक विचारक सीताराम गुप्ता मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। गुप्ता ने ग्रामीण विकास, गरीबी उन्मूलन और सामाजिक परिवर्तन के लिए सीएसआर की नीतियों एवं कार्यक्रमों में आवश्यक सुधारों पर जोर देते हुए अपने विचार प्रस्तुत किए।
सम्मेलन में उपस्थित प्रतिनिधियों ने सीएसआर क्षेत्र में हो रहे कार्यों, नवाचारों और चुनौतियों पर चर्चा की। कार्यक्रम में देश के प्रमुख कॉर्पोरेट समूहों तथा सामाजिक संस्थाओं के विशेषज्ञों ने अपने अनुभव और सुझाव साझा किए। मुख्य वक्ता सीताराम गुप्ता ने कहा कि देश की सामुदायिक विकास संरचना को मजबूत करने के लिए सीएसआर को सिर्फ दान या सामाजिक योगदान के रूप में नहीं, बल्कि एक ठोस नीति-उन्मुख माध्यम के रूप में देखना चाहिए, जो आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन को टिकाऊ रूप देता है।
उन्होंने कहा कि यदि सीएसआर परियोजनाएं परिवार की आय वृद्धि, कौशल विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय आजीविका के उन्नयन पर केंद्रित हों, तो इसका प्रत्यक्ष असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दिखाई देगा। गुप्ता ने बताया कि वर्तमान में कई कंपनियां सीएसआर के तहत विकासात्मक कार्य कर रही हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में वास्तविक प्रभाव तब बढ़ेगा जब समुदाय की सहभागिता को प्राथमिकता दी जाएगी और परियोजनाओं को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप डिजाइन किया जाएगा।
सीताराम गुप्ता ने कहा कि देश के ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तलाशना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योगों, कौशल उन्नयन और नए रोजगार मॉडल विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उनके अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में सीएसआर के माध्यम से किए गए अनेक कार्यों से आजीविका के अवसर तो बने हैं, लेकिन इन पहलों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सरकारी सहयोग, नीति समन्वय और समुदाय की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से आए सीएसआर निदेशकों, नीति विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गुप्ता के विचारों की सराहना की। उन्हें व्यावहारिक, भविष्यदर्शी और नीति-अनुकूल बताया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि सीएसआर को सिर्फ एक सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि भविष्य की अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव के रूप में देखा जाना चाहिए।
कार्यक्रम में प्रमुख वक्ताओं में डॉ. लीना देशपांडे (भारत फोर्ज), डॉ. सुषिल भालचंद्रा मुंगेरकर (ई पॉवर), एडवोकेट सादिया रोहमा खान (नीति विशेषज्ञ), डॉ. बनिता वर्दिया (जायदस लाइफ), डॉ. नीलम गुप्ता (आरोह फ़ाउंडेशन), फिरोज सिद्दीकी (एफटा कंस्ट्रक्शन्स), अरुण अरोड़ा (चेतक फाउंडेशन) आदि शामिल थे। इन विशेषज्ञों ने अपने संबोधन में बताया कि भविष्य की अर्थव्यवस्था में सीएसआर एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जो शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, रोजगार और ग्रामीण विकास को गति देता है।
सम्मेलन के प्रारंभ में आयोजक रुसैन कुमार ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम न केवल कंपनियों के अनुभव साझा करने का मंच प्रदान करते हैं, बल्कि नए विचारों और रणनीतियों को भी गति देते हैं। उन्होंने बताया कि सीएसआर के जरिए देश में अनेक विकासात्मक योजनाएं क्रियान्वित हो रही हैं, जिनके प्रभाव को बढ़ाने के लिए सहयोगी मॉडल की आवश्यकता है।
कार्यक्रम का समापन भारत में सीएसआर नीति के जनक माने जाने वाले श्री भास्कर चटर्जी की अध्यक्षता में हुआ। उन्होंने वह ऐतिहासिक नीति दस्तावेज तैयार किया था जिसने भारत में सीएसआर खर्च को अनिवार्य बनाया। यह दस्तावेज उस समय संसद में ध्वनि मत से पारित हुआ जब श्री सचिन पायलट भारत सरकार में कॉर्पोरेट मंत्री थे। समापन सत्र में श्री चटर्जी द्वारा इंडिया सीएसआर अवार्ड प्रदान किए गए, जिनमें उत्कृष्ट सीएसआर परियोजनाओं, संगठनों और कॉर्पोरेट समूहों को सम्मानित किया गया।
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