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    मंदसौर नीमच के बाद रतलाम में GBS की दस्तक, क्या दूषित पानी से फैल रहा गुलियन बेरी सिंड्रोम

    रतलाम: मध्य प्रदेश के नीमच और मंदसौर जिलों के बाद अब रतलाम में भी जीबीएस यानी गुलियन बेरी सिंड्रोम का एक मरीज मिला है. इसके बाद रतलाम के सखवाल नगर क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की जलप्रदाय विभाग की टीम ने पेयजल पाइपलाइन में आने वाले पानी के सैंपल लिए हैं. पश्चिम मध्य प्रदेश के तीसरे जिले में अब जीबीएस का मरीज मिलने के बाद इस बात की पुष्टि हुई है कि यह बीमारी फैल रही है.

    GBS होने की वजह कहीं दूषित पानी तो नहीं

    वहीं, नीमच के मनासा, मंदसौर के गरोठ-सुवासरा और अब रतलाम के सखवाल नगर में भी दूषित पानी की वजह से इस बीमारी के फैलने की संभावना जताई जा रही है. इसी वजह से तीनों जिलों में स्वास्थ्य विभाग और विशेषज्ञ टीमों द्वारा पेयजल पाइपलाइन से आने वाले पानी के नमूने एकत्रित किए गए हैं. हालांकि उनकी रिपोर्ट आना अभी बाकी है, लेकिन यह सवाल जरूर खड़ा हो रहा है कि क्या दूषित पानी पीने की वजह से लोगों में यह बीमारी फैल रही है.

    दूषित पानी का इस्तेमाल न करें

    दुर्लभ किस्म की बीमारी गुलियन बेरी सिंड्रोम के इक्का दुक्का मरीज बीते कुछ सालों में मंदसौर और नीमच जिले में सामने आए थे, लेकिन इस बार नीमच के मनासा में मरीजों की बढ़ी हुई संख्या और उसके बाद मंदसौर रतलाम में भी मरीज मिलने से स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है. स्वास्थ्य विभाग के साथ स्थानीय प्रशासन भी अलर्ट पर है. लोगों को स्वच्छता रखने और दूषित पानी का इस्तेमाल नहीं करने व इस बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर दिखाने की सलाह भी दी जा रही है.

     

    रतलाम में GBS का मरीज मिलने पर कांग्रेस ने पूछा सवाल

    रतलाम में दूषित पानी को लेकर एनजीटी तक में लड़ाई लड़ने वाले कांग्रेस पार्षद सलीम बागवान ने इस मामले में स्वास्थ्य विभाग और रतलाम नगर निगम से सवाल किए हैं कि क्या जीबीएस जैसी खतरनाक बीमारी रतलाम में फैल रही है और इसके फैलने के क्या कारण है? कहीं, दूषित पानी की वजह से तो यह नहीं फैल रही है. संक्रामक रोगों के विशेषज्ञ डॉक्टर गौरव बोरीवली ने बताया कि "इस बीमारी के फैलने का सही कारण तो नहीं बताया जा सकता है, लेकिन दूषित पानी, दूषित व बासी भोजन से हुए वायरस और बैक्टीरियल इनफेक्शन से इस बीमारी के होने की संभावना रहती है.

     

    इसके लक्षणों में इस रहस्यमय बीमारी में मरीज की मांसपेशियां कमजोर हो जाती है. पैरों में झुनझुनी और सुन्नपन के लक्षण दिखाई देते हैं. मरीज का बैलेंस नहीं बन पाता है. जिससे वह खड़ा नहीं हो सकता है. यह पैरों से शुरू होकर शरीर के ऊपरी हिस्से तक फैलता है. इसमें मरीज का श्वसन तंत्र भी प्रभावित होता है.

    रतलाम में भी मिला मरीज

    रतलाम के सखवाल नगर में 16 वर्षीय बालक को जीबीएस होने की पुष्टि हुई है जिसका उपचार इंदौर के निजी अस्पताल में चल रहा है. स्थानीय पार्षद राजीव रावत ने बताया कि पीड़ित बालक के पिता से उसके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली गई है फिलहाल उसकी तबीयत में सुधार हो रहा है. वहीं, क्षेत्र में अन्य लोगों की भी जांच करवाई जा रही है. इस वार्ड में होने पानी की सप्लाई के भी नमूने लिए गए हैं.

     

    बहरहाल नीमच के बाद मंदसौर रतलाम में भी जीबीएस के मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन की टीम में लगातार प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सर्वे कर लोगों को इस बीमारी के बारे में जागरूक कर रही है. वहीं पानी के सैंपल भी इन क्षेत्रों से लिए गए हैं. जिनकी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि आखिर यह बीमारी फैली कैसे है.

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