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    Homeराजस्थानअलवरगांव से उठी उड़ान, बिना कोचिंग अरिहंत जैन की बड़ी सफलता

    गांव से उठी उड़ान, बिना कोचिंग अरिहंत जैन की बड़ी सफलता

    RAS 2024 में 28वीं रैंक के साथ सफलता की मिसाल, संघर्ष और रणनीति ने दिलाई पहचान

    अलवर। जिले के छोटे से गांव परवैनी (रैणी ब्लॉक) के निवासी अरिहंत जैन ने बिना किसी कोचिंग के राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) परीक्षा 2024 में 28वीं रैंक हासिल कर एक नई मिसाल कायम की है। उनकी इस सफलता ने यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादे और सही दिशा से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

    अरिहंत की यह उपलब्धि अचानक नहीं मिली, बल्कि इसके पीछे वर्षों की मेहनत, अनुशासन और आत्म-विश्लेषण छिपा है। जैसे ही परिणाम घोषित हुआ, उनके घर बधाई देने वालों का तांता लग गया। इस दौरान उनकी मां इंद्रा जैन भावुक हो उठीं और गर्व से कहा कि उन्हें अपने बेटे पर नाज है। पिता जिनेंद्र जैन ने भी बेटे की इस सफलता को उसकी कड़ी मेहनत का परिणाम बताया। दोनों ही माता-पिता सरकारी शिक्षक हैं।

    यह अरिहंत का दूसरा प्रयास था। वर्ष 2021 में वे इंटरव्यू तक पहुंचे थे, लेकिन अंतिम चयन से चूक गए। हालांकि उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी कमजोरियों को पहचाना और उन्हें सुधारने पर ध्यान दिया। इसका परिणाम यह रहा कि RAS 2023 में उन्होंने 81वीं रैंक प्राप्त कर राजस्थान लेखा सेवा में चयन पाया और वर्तमान में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्होंने प्रशासनिक सेवा के अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा और 2024 में 28वीं रैंक के साथ सफलता हासिल की।

    अरिहंत की पढ़ाई का तरीका पारंपरिक नहीं था। उन्होंने घंटों पढ़ाई करने के बजाय टास्क बेस्ड स्टडी को अपनाया। हर दिन एक लक्ष्य निर्धारित कर उसे पूरा करने पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने गांव में रहकर ही अधिकांश तैयारी की और किसी बड़े कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया।

    उनके माता-पिता शिक्षक होने के कारण घर में शिक्षा का अच्छा माहौल मिला। असफलता के समय परिवार ने उन्हें निराश नहीं होने दिया। अरिहंत अपनी सफलता का श्रेय आरपीएस अंकित जैन और जिला समाज कल्याण अधिकारी दिवाकर जैन के मार्गदर्शन को भी देते हैं।

    अरिहंत जैन ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए तीन महत्वपूर्ण सुझाव दिए—

    • सकारात्मकता बनाए रखें
    • अच्छे मित्रों का साथ चुनें
    • निरंतर आत्म-विश्लेषण करें

    अरिहंत जैन की यह सफलता न केवल अलवर बल्कि पूरे प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि बड़े सपनों को पूरा करने के लिए संसाधनों से ज्यादा जरूरी है दृढ़ संकल्प और सही रणनीति।

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