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    Dual Post Ban: हाईकोर्ट सख्त, RSRTC एमडी को दूसरे पद से हटाने का आदेश

    जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार के उस प्रशासनिक आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें एक ही अधिकारी को दो परस्पर विरोधी जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। अदालत ने स्पष्ट रूप से 'हितों के टकराव' (Conflict of Interest) का हवाला देते हुए राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (RSRTC) के प्रबंध निदेशक पुरुषोत्तम शर्मा को परिवहन आयुक्त के पद पर कार्य करने से रोक दिया है।

    हाईकोर्ट का कड़ा रुख: 'खिलाड़ी और रेफरी एक ही व्यक्ति नहीं हो सकता', परिवहन आयुक्त की नियुक्ति पर रोक

    जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य के परिवहन विभाग में नियुक्तियों को लेकर एक बड़ा आदेश जारी किया है। न्यायमूर्ति आनंद शर्मा की एकल पीठ ने साफ किया है कि कोई भी प्रशासनिक अधिकारी एक साथ ऐसे दो पदों पर आसीन नहीं रह सकता, जहाँ उसके निर्णय निष्पक्षता को प्रभावित करते हों। इसी आधार पर अदालत ने पुरुषोत्तम शर्मा के परिवहन आयुक्त के रूप में कार्य करने पर अंतरिम रोक लगा दी है।

    क्या है पूरा विवाद?

    यह मामला 'ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट बस ओनर्स एसोसिएशन' द्वारा दायर याचिका के बाद सामने आया। याचिका में राज्य सरकार के 21 नवंबर 2025 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत रोडवेज (RSRTC) के एमडी पुरुषोत्तम शर्मा को परिवहन आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया था।

    अदालत की महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ और दलीलें

    अदालत ने सुनवाई के दौरान कुछ बेहद सख्त और तार्किक टिप्पणियाँ कीं:

    • हितों का टकराव: याचिकाकर्ता के वकीलों ने तर्क दिया कि रोडवेज स्वयं एक बस ऑपरेटर है। ऐसे में उसका प्रमुख यदि पूरे राज्य के परिवहन नियमों का नियामक (Regulator) बन जाएगा, तो निजी बस ऑपरेटरों के साथ निष्पक्ष न्याय संभव नहीं होगा।

    • कानूनी प्रावधान: मामले में मोटर वाहन अधिनियम की धारा 68(2) का हवाला दिया गया। यह धारा स्पष्ट करती है कि परिवहन व्यवसाय में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हित रखने वाला कोई भी व्यक्ति परिवहन प्राधिकरण का हिस्सा नहीं हो सकता।

    • रेफरी बनाम खिलाड़ी: अदालत ने इस स्थिति को समझाते हुए कहा कि जिस व्यक्ति का अपना हित दांव पर लगा हो, उसे ही नियमों को लागू करने वाला 'रेफरी' नहीं बनाया जा सकता।


    सरकार की दलील हुई खारिज

    राज्य सरकार की ओर से अदालत में यह तर्क दिया गया कि परिवहन आयुक्त अकेले फैसला नहीं लेते, बल्कि वे एक बोर्ड का हिस्सा होते हैं। हालांकि, न्यायमूर्ति आनंद शर्मा इस दलील से सहमत नहीं हुए। कोर्ट ने माना कि परिवहन आयुक्त के पास परमिट जारी करने और क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरणों पर नियंत्रण जैसे व्यापक अधिकार होते हैं, जो बेहद संवेदनशील हैं।

    अगली सुनवाई और वर्तमान स्थिति

    • रोक बरकरार: अदालत ने 21 नवंबर 2025 के सरकारी आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है।

    • नोटिस जारी: पुरुषोत्तम शर्मा और संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।

    • अगली तारीख: मामले की अगली सुनवाई 18 मई 2026 को तय की गई है। तब तक पुरुषोत्तम शर्मा परिवहन आयुक्त की शक्तियों का प्रयोग नहीं कर पाएंगे।

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