किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और टिकाऊ खेती को अपनाने के लिए किया प्रेरित
अलवर। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर कृषि विभाग द्वारा ग्राम पंचायत मिलकपुर (रामगढ़) में विशेष ग्राम सभा एवं संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को पर्यावरण संरक्षण, धरती माता के संरक्षण तथा कृषि क्षेत्र में टिकाऊ एवं आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए जागरूक करना रहा।
कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक पी.सी. मीणा ने बताया कि आयोजित ग्राम सभा में कृषि अधिकारियों एवं कृषि वैज्ञानिकों ने ग्रामीणों और किसानों को पर्यावरण संरक्षण के महत्व से अवगत कराया। साथ ही प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने तथा जल संरक्षण के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी गई।
टिकाऊ खेती अपनाने पर दिया जोर
संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने किसानों को ऐसी कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया, जो पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ उत्पादन बढ़ाने में भी सहायक हों। किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, संतुलित उर्वरक उपयोग, जल संरक्षण एवं प्राकृतिक खेती के महत्व के बारे में जानकारी प्रदान की गई।
विशेषज्ञों ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण और कृषि विकास एक-दूसरे के पूरक हैं। टिकाऊ कृषि तकनीकों को अपनाकर किसान उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी कर सकते हैं।
किसानों को वितरित किए गए बाजरा मिनी किट
कार्यक्रम के दौरान पीआई फाउंडेशन, उदयपुर की ओर से किसानों को निःशुल्क बाजरा मिनी किट वितरित किए गए। इस पहल का उद्देश्य किसानों को उन्नत बीजों और बेहतर कृषि तकनीकों से जोड़ना तथा मोटे अनाजों के उत्पादन को बढ़ावा देना है।
संगोष्ठी में कृषि विज्ञान केंद्र नौगावां के प्रभारी एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सुभाष चंद यादव ने किसानों को वैज्ञानिक खेती के लाभ बताए। उन्होंने जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच टिकाऊ कृषि प्रणाली अपनाने पर बल दिया।
कार्यक्रम में रामनिवास कन्हैयालाल यादव, कृषि पर्यवेक्षक महेंद्र कुमार यादव सहित बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया और पर्यावरण संरक्षण के साथ आधुनिक खेती को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।
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