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    जबलपुर में रेलवे पुलिस की जांच व्यवस्था होगी और मजबूत, ई-विवेचना एप पर मिला प्रशिक्षण

    जबलपुर: रेलवे पुलिस अधीक्षक (SRP) कार्यालय में शुक्रवार को पुलिस विवेचकों के लिए एक दिवसीय महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण पुलिस अधीक्षक (रेल) सुंदर सिंह कनेश के निर्देशन और वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। इस सत्र का मुख्य उद्देश्य 'ई-विवेचना' ऐप और सीसीटीएनएस (CCTNS) के माध्यम से पुलिस कार्यप्रणाली को पूरी तरह डिजिटल और आधुनिक बनाना है। राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो द्वारा विवेचना हेतु प्रदान किए गए टैबलेट्स का प्रभावी उपयोग करने के लिए जिले के विभिन्न थाना और चौकियों के विवेचकों को विस्तार से जानकारी दी गई।

    डिजिटल प्रक्रियाओं का हुआ व्यावहारिक अभ्यास

    प्रशिक्षण के दौरान प्रभारी सीसीटीएनएस गोपाल सिंह राजपूत और उनकी टीम ने विवेचकों को कई महत्वपूर्ण तकनीकी पहलुओं से रूबरू कराया। कार्यशाला में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया:

    • ई-विवेचना और ई-साक्ष्य: केस डायरी संधारण, अपराध विवरण फॉर्म (IIF-2) और संपत्ति जब्ती पत्रक (IIF-4) को डिजिटल तरीके से भरने का प्रशिक्षण दिया गया।

    • नए कानून और प्रक्रियाएं: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 35(3) के तहत नोटिस जारी करने, गिरफ्तारी पत्रक (IIF-3) तैयार करने और पंचनामा विवरण जोड़ने की विधि समझाई गई।

    • मेडिको-लीगल और पोस्टमार्टम: एम.एल.सी. (M.L.C.) रिपोर्ट तैयार करने और पोस्टमार्टम निवेदन की डिजिटल प्रक्रिया का अभ्यास कराया गया।

    • अज्ञात शव और निवारक कार्रवाई: अप्राकृतिक मृत्यु का पंजीकरण और प्रिवेंटिव एक्शन से जुड़े मॉड्यूल्स पर डेटा क्वालिटी को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया।

    हाईटेक होगी जांच: वीडियोग्राफी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य पर जोर

    रेल पुलिस इकाई जबलपुर के विभिन्न थानों से आए कुल 20 विवेचकों ने इस सत्र में हिस्सा लिया। वर्तमान दौर में डिजिटल साक्ष्य की महत्ता को देखते हुए, उन्हें नवीन आपराधिक कानूनों के तहत साक्ष्य संकलन की बारीकियां सिखाई गईं।

    • साक्ष्य प्रबंधन: अपराध स्थल की वीडियोग्राफी करने, साक्ष्यों को सुरक्षित रूप से स्टोर करने और डिजिटल साक्ष्य अपलोड करने का 'हैंड्स-ऑन' अभ्यास कराया गया।

    • पारदर्शिता: प्रशिक्षण का मुख्य लक्ष्य विवेचना की गुणवत्ता में सुधार करना और साक्ष्य संकलन की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तकनीक-आधारित बनाना है ताकि न्यायिक प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

    कार्यशाला के समापन पर प्रतिभागियों ने इसे वर्तमान पुलिसिंग के लिए अत्यंत उपयोगी बताया। अधिकारियों का मानना है कि ई-साक्ष्य और डिजिटल प्रबंधन जैसे टूल्स भविष्य में पुलिस की कार्यक्षमता को कई गुना बढ़ा देंगे।

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