महिला टी20 विश्व कप 2026 में श्रीलंकाई महिला क्रिकेट टीम का निराशाजनक और लचर प्रदर्शन लगातार जारी है। वेस्टइंडीज के खिलाफ मिली करारी शिकस्त के साथ ही टूर्नामेंट में श्रीलंका की सेमीफाइनल में पहुंचने की उम्मीदें लगभग मटियामेट हो गई हैं। टीम की इस लगातार नाकामी और खराब खेल से कप्तान चामरी अटापट्टू बेहद आहत और निराश हैं। उन्होंने इस शर्मनाक हार की पूरी नैतिक जिम्मेदारी किसी अन्य खिलाड़ी पर डालने के बजाय खुद अपने कंधों पर ली है।
'18 साल के करियर का सबसे बड़ा दर्द, कप्तान के तौर पर मैं नाकाम रही'
वेस्टइंडीज से मैच गंवाने के बाद श्रीलंकाई कप्तान चामरी अटापट्टू भावुक हो गईं और उन्होंने कहा, "इस वक्त मेरे दिल में जो दुख और निराशा है, उसे शब्दों में बयां करना मुमकिन नहीं है। मैंने अपने देश की राष्ट्रीय टीम के लिए लगभग 18 वर्षों तक क्रिकेट खेला है, लेकिन यह मेरे करियर की सबसे बड़ी कसक रहेगी कि मैं कभी भी अपनी टीम को विश्व कप के सेमीफाइनल तक ले जाने में कामयाब नहीं हो सकी। भले ही एक व्यक्तिगत खिलाड़ी के तौर पर मैंने मैदान पर कई बड़े कीर्तिमान और उपलब्धियां हासिल की हों, लेकिन एक कप्तान के तौर पर मैं पूरी तरह विफल रही हूं। मुझे लगता है कि किसी भी नेतृत्वकर्ता के लिए यह बहुत बड़ा दर्द है, और अब मुझे जिंदगीभर इसी मलाल के साथ जीना होगा।"
श्रीलंका के लिए सेमीफाइनल के रास्ते पूरी तरह बंद, इंग्लैंड-इंडीज मजबूत
इस वैश्विक टूर्नामेंट में श्रीलंका ने अब तक कुल तीन मुकाबले खेले हैं, जिनमें से दो मैचों में उसे एकतरफा हार का सामना करना पड़ा है। इस लचर प्रदर्शन के बाद श्रीलंका की नॉकआउट स्टेज में पहुंचने की उम्मीदें गणितीय रूप से बेहद धुंधली हो चुकी हैं। ग्रुप-बी के समीकरणों को देखें तो इंग्लैंड और वेस्टइंडीज की टीमों ने अपने तीनों ही शुरुआती मुकाबलों में शानदार जीत दर्ज कर अंक तालिका में शीर्ष स्थान पर कब्जा जमाया हुआ है।
ऐसे में इस ग्रुप से सेमीफाइनल में जाने की सबसे बड़ी दावेदार भी यही दोनों टीमें हैं। श्रीलंका की टीम यदि अपने आगामी दोनों मैच जीत भी जाती है, तो वह अधिकतम छह अंकों तक ही पहुंच पाएगी, जो क्वालीफाई करने के लिए पर्याप्त नहीं होंगे। श्रीलंका को अपने अगले दो औपचारिक मैच स्कॉटलैंड और आयरलैंड के खिलाफ खेलने हैं।
'मुझे अधिक जिम्मेदारी से खेलना चाहिए था, मैंने आखिरी मौका खो दिया'
कप्तान अटापट्टू ने आत्ममंथन करते हुए आगे कहा, "मैदान पर मैंने अपनी तरफ से हर मुमकिन कोशिश की, लेकिन मुझे लगता है कि टीम की सबसे अनुभवी खिलाड़ी होने के नाते मुझे क्रीज पर और अधिक जिम्मेदारी के साथ बल्लेबाजी करनी चाहिए थी। अगर मैं वेस्टइंडीज के खिलाफ विकेट पर टिककर खेलती, तो मैच का नतीजा कुछ और हो सकता था और हम जीत दर्ज कर सकते थे। मुझे हार के लिए अपनी टीम के युवा खिलाड़ियों को दोष देना बिल्कुल पसंद नहीं है। मैं व्यक्तिगत रूप से बहुत दुखी हूं क्योंकि मुझे अहसास हो चुका है कि मैंने विश्व कप जीतने का अपना आखिरी सुनहरा मौका भी हमेशा के लिए खो दिया है।"
कैरेबियाई गेंदबाजों के सामने 100 रन भी नहीं बना सकी श्रीलंकाई टीम
यदि मुकाबले की बात करें, तो वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले बल्लेबाजी करने उतरी श्रीलंका की बल्लेबाजी बेहद गैर-जिम्मेदाराना रही। पूरी टीम ताश के पत्तों की तरह बिखर गई और महज 98 रनों के मामूली स्कोर पर ऑलआउट हो गई। टीम की कोई भी शीर्ष क्रम की बल्लेबाज क्रीज पर रुककर कैरेबियाई गेंदबाजों की रणनीति का सामना नहीं कर सकी।
जवाब में वेस्टइंडीज की महिला टीम ने 99 रनों के इस आसान लक्ष्य को मात्र 5 विकेट खोकर 16.1 ओवरों में ही बेहद आसानी से हासिल कर लिया। श्रीलंकाई गेंदबाजों ने शुरुआती सफलताएं हासिल कर मैच में वापसी का प्रयास जरूर किया, लेकिन कम स्कोर के कारण वे अपनी टीम की हार को टालने में पूरी तरह नाकाम रहीं।


