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    उज्जैन में आस्था का महापर्व, तीन अलग रथों पर निकलेंगे प्रभु जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा

    उज्जैन: धार्मिक नगरी उज्जैन में गुरुवार को श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का एक अनूठा संगम देखने को मिलेगा, जब अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (इस्कॉन) की ओर से भगवान जगन्नाथ की भव्य और पारंपरिक रथयात्रा निकाली जाएगी। इस्कॉन प्रबंधन द्वारा इस महाआयोजन की सभी तैयारियां और सुरक्षा व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं।

    इस वर्ष की रथयात्रा की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक खूबी यह है कि भक्तगण अपने आराध्य भगवान जगन्नाथ, उनके अग्रज बलभद्र (बलराम) और लाडली बहन सुभद्रा को एक ही रथ के बजाय तीन अलग-अलग भव्य और विशाल पारंपरिक रथों पर विराजमान देख सकेंगे। हर साल की तरह इस बार भी अवंतिका नगरी में पुरी जैसा ही अद्भुत उल्लास देखने को मिल रहा है, जहाँ श्रद्धालु अपने भगवान का स्वागत करने के लिए पलक पांवड़े बिछाए उत्सुकता से इंतजार कर रहे हैं।

    त्रिवेणी रथों का दिव्य दर्शन: नदीघोष, तालध्वज और दर्पदलन रथों पर विराजेंगे तीनों विग्रह

    इस वर्ष भक्तों का उत्साह दोगुना हो गया है क्योंकि उन्हें तीनों पवित्र विग्रहों के अलग-अलग रथों पर दिव्य दर्शन प्राप्त होंगे। इन तीनों रथों को सनातन परंपरा के अनुसार बेहद खूबसूरती और कलात्मकता से सजाया गया है:

    • नदीघोष रथ: जगत के स्वामी प्रभु जगन्नाथ स्वयं 33 फीट ऊंचे भव्य 'नदीघोष' नामक रथ पर सवार होकर भक्तों को दर्शन देंगे।

    • तालध्वज रथ: भगवान के बड़े भाई और शक्ति के प्रतीक दाऊ बलराम 'तालध्वज' रथ पर विराजमान रहेंगे।

    • दर्पदलन रथ: लाडली बहन माता सुभद्रा के लिए विशेष रूप से 'दर्पदलन' रथ तैयार किया गया है, जिस पर वे सवार होंगी।

    जापान के मोतियों और बंगाल की कारीगरी से महकेंगे प्रभु के रेशमी वस्त्र

    भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहन के लिए इस बार अत्यंत विशेष और अलौकिक पोशाकें तैयार करवाई गई हैं। इन वस्त्रों को तैयार करने के लिए विशेष रूप से जापान से उच्च गुणवत्ता वाले असली मोती, हीरे (डायमंड), सुनहरी जरी और रेशमी धागे मंगाए गए थे।

    पश्चिम बंगाल से आए 10 सिद्धहस्त और कुशल कारीगरों ने लगातार दो महीने तक दिन-रात कठिन परिश्रम करके इन रेशमी वस्त्रों को अंतिम रूप दिया है। इन वस्त्रों पर विभिन्न प्रकार के पवित्र धार्मिक प्रतीकों, शंख, चक्र और गदा की बेहद बारीक व आकर्षक नक्काशी (कारीगरी) भी की गई है, जो सभी को मंत्रमुग्ध कर देगी।

    श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बदला गया पारंपरिक मार्ग, मंडी चौराहा से शुरू होगी यात्रा

    जिला प्रशासन और इस्कॉन समिति ने इस बार रथयात्रा के मार्ग और स्वरूप में एक बड़ा व्यावहारिक बदलाव किया है। हर वर्ष पारंपरिक रूप से बुधवारिया क्षेत्र से निकलने वाली यह रथयात्रा इस बार आगर रोड पर स्थित मंडी चौराहा से शुरू की जाएगी।

    इस मार्ग परिवर्तन का मुख्य उद्देश्य यह है कि चौड़ी सड़क होने के कारण अधिक से अधिक श्रद्धालु बिना किसी असुविधा के इस पावन यात्रा का हिस्सा बन सकें और तीनों विशाल रथों को आसानी से खींचा जा सके। इस बार यात्रा में विशाल रथों के आगे-आगे सजे-धजे हाथी, घोड़े, पारंपरिक बग्घियां, विभिन्न राज्यों की कीर्तन मंडलियां और सजीव झांकियां मुख्य आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इसके अलावा, देश और विदेश (विदेशी भक्तों) से आए हजारों श्रद्धालु ढोल-मंजीरों की थाप पर 'हरे कृष्णा हरे रामा' महामंत्र का संकीर्तन करते हुए थिरकते नजर आएंगे।

    खाती समाज की पारंपरिक यात्रा का मार्ग हुआ छोटा, केवल गोपाल मंदिर तक होगा भ्रमण

    इस्कॉन मंदिर के इस भव्य आयोजन के समानांतर, उज्जैन शहर में खाती समाज की ओर से भी प्रतिवर्ष की भांति ढाबा रोड से भगवान जगन्नाथ की एक और अत्यंत प्राचीन व पारंपरिक रथयात्रा निकाली जाएगी।

    हालांकि, आगामी सिंहस्थ महापर्व की तैयारियों के मद्देनजर शहर में चल रहे व्यापक सड़क चौड़ीकरण और निर्माण कार्यों के कारण इस वर्ष खाती समाज की यात्रा के मार्ग को जनसुरक्षा के लिहाज से छोटा किया गया है। समिति ने निर्णय लिया है कि यह रथयात्रा अपने निर्धारित बड़े मार्ग पर न जाते हुए केवल गोपाल मंदिर तक ही जाएगी और वहीं पर भगवान की महाआरती के साथ इसका समापन होगा।

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