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    2000 पन्नों की चार्जशीट और कई बड़े खुलासे: नासिक टीसीएस मामले में पुलिस ने कोर्ट में पेश किए पुख्ता सबूत

    नासिक | टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) परिसर से जुड़े कथित कार्यस्थल यौन उत्पीड़न, महिलाओं से अभद्रता, जबरन धर्म परिवर्तन के प्रयास और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के बेहद संवेदनशील मामले में नासिक सिटी पुलिस ने एक और बड़ी कानूनी कार्रवाई की है। पुलिस प्रशासन द्वारा इस बहुचर्चित प्रकरण में शुक्रवार को अदालत के समक्ष दूसरी चार्जशीट (आरोप पत्र) पेश कर दी गई है। यह नया आरोप पत्र करीब 2000 पन्नों का है, जिसमें आरोपियों के खिलाफ कई पुख्ता सबूत और गवाहों के बयान शामिल किए गए हैं।

    विशेष जांच दल (SIT) की तफ्तीश के बाद 2000 पन्नों का आरोप पत्र पेश

    नासिक पुलिस के आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, विभिन्न महिला पीड़ितों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों के आधार पर मुंबई नाका और देवलाली कैंप पुलिस थानों में कुल 9 आपराधिक मुकदमे दर्ज किए गए थे। मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए नासिक के पुलिस आयुक्त संदीप कर्णिक ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। इसी एसआईटी की गहन पड़ताल के बाद राजा रफीक मेमन, शाह रुख हुसैन शौकत कुरैशी, अश्विनी अशोक चैनानी, तौसिफ बिलाल अत्तार, शफी भिकन शेख, दानिश एजाज शेख, निदा एजाज खान और आसिफ आलम अंसारी सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ यह 2000 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट नासिक की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत में दाखिल की गई है।

    भारतीय न्याय संहिता (BNS) और एट्रोसिटी एक्ट के तहत मुकदमे दर्ज

    इस पूरे मामले में कानून की कई गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है। मुंबई नाका थाने में दर्ज 8 मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत प्राथमिकी (FIR) दर्ज है, जिनमें कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न, छेड़छाड़, आपराधिक धमकी देने और महिलाओं की मर्यादा को ठेस पहुंचाने के आरोप शामिल हैं। वहीं दूसरी ओर, देवलाली कैंप पुलिस स्टेशन में दर्ज एक अन्य मामले (क्राइम नंबर 156/2026) में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के साथ-साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (एट्रोसिटी एक्ट) की विशेष धाराएं भी जोड़ी गई हैं।

    सभी आरोपियों की जमानत खारिज, पूरक चार्जशीट की तैयारी

    इस हाई-प्रोफाइल मामले में नासिक पुलिस द्वारा पहले ही 1500 पन्नों की एक प्राथमिक चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की जा चुकी है। सरकारी वकीलों की मजबूत दलीलों और पुलिस द्वारा जुटाए गए गंभीर साक्ष्यों को देखते हुए अदालत ने इस मामले के सभी आरोपियों की जमानत याचिकाएं पूरी तरह खारिज कर दी हैं, जिसके चलते सभी आरोपी फिलहाल जेल में हैं। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में उपलब्ध वैज्ञानिक और दस्तावेजी सबूतों के आधार पर यह दूसरी चार्जशीट दी गई है, लेकिन मामले की जांच अभी रोकी नहीं गई है। एसआईटी की टीम कुछ अन्य नए साक्ष्य जुटाने में लगी है, जिसके आधार पर आने वाले समय में एक पूरक (सप्लीमेंट्री) चार्जशीट भी कोर्ट में पेश की जा सकती है।

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