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    बेरहम बाजार: क्या एआई निगल जाएगा भारत की आईटी कंपनियों का भविष्य? 4.5 लाख करोड़ रुपये हवा हुए, अब आगे क्या?

    भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में फरवरी 2026 को शायद ब्लैक फरवरी के रूप में याद किया जाए। यह वह महीना है जब भारतीय अर्थव्यवस्था की सबसे मजबूत कंपनियों खासकर आईटी कंपनियों ने एक अभूतपूर्व झटके का सामना किया। जिन कंपनियों ने कभी भारतीय बाजार को बुलंदियों पर पहुंचाने में सबसे ज्यादा योगदान दिया था, अब बाजार उन्हीं कंपनियों के लिए जैसे बेरहम हो गया है। मात्र कुछ हफ्तों में ही देश की आईटी सेक्टर की कंपनियों से 50 बिलियन डॉलर मतलब करीब 4.5 लाख करोड़ रुपये का मार्केट कैप हवा हो गया है।बाजार में आई गिरावट कोई सामान्य समझना किसी बेवकूफी से कम नहीं होगा।। इसके केंद्र में है 'एंथ्रोपिक' का नया एआई टूल और निवेशकों का यह डर कि भारतीय आईटी कंपनियों का दशकों पुराना बिलिंग मॉडल अब ध्वस्त होने की कगार पर है। टीसीएस का रिलायंस के बाद दूसरे नंबर से फिसलकर छठे नंबर पर आना इस बदलाव की सबसे बड़ी गवाही है।आइए इस पूरे घटनाक्रम, इसके तकनीकी कारणों और भविष्य की रणनीतियों को इससे जुड़े सवालों के जवाब के जरिए डिकोड करने की कोशिश करते हैं। 

    आखिर भारतीय बाजार में अचानक इतनी दहशत क्यों है? ट्रिगर क्या था?

    जवाब: भारतीय शेयर बाजार के आईटी शेयरों में आई सुनामी का केंद्र बिंदु 30 जनवरी 2026 है। इसी दिन अमेरिकी एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने अपने क्लॉड कोवर्क प्लेटफॉर्म के लिए 11 नए ऑटोमेशन प्लग-इन्स लॉन्च किए। यह खबर जंगल की आग की तरह फैली क्योंकि ये प्लग-इन्स उन कार्यों को मिनटों में कर सकते हैं, जिनके लिए भारतीय आईटी कंपनियां हजारों इंजीनियरों का इस्तेमाल करती थीं। इसे विश्लेषकों ने 'SaaSpocalypse' यानी (सॉफ्टवेयर सेवाओं का अंत) जैसे नामों से नवाजा है।

    सवाल: क्या एआई वाकई भारतीय आईटी कंपिनयों के 'बिजनेस मॉडल' को खत्म खत्म कर सकता है?

    जवाब: खतरा वास्तविक और गंभीर है। भारतीय आईटी कंपनियों का का पारंपरिक बिजनेस मॉडल 'श्रम मध्यस्थता' और 'प्रति घंटा बिलिंग' पर आधारित रहा है। यानी, जितने ज्यादा लोग और जितने ज्यादा घंटे, उतना ज्यादा मुनाफा।लेकिन एंथ्रोपिक के आने के बाद कहानी ही बदल गई है। यह कुछ अलग ही फंडे पर काम कर रहा है। जैसे- डेटा एनालिस्ट प्लग-इन: पहले जिस डेटा को साफ करने और विजअलाइज करने में विश्लेषकों की टीम को हफ्ते लगते थे और हजारों डॉलर खर्च होते थे, अब वही काम एआई बिना मानवीय हस्तक्षेप के 2-3 दिनों में कर रहा है। और लागत आ रही है? मात्र 30-40 डॉलर प्रति हर महीने।, दूसरी चीज है- लीगल प्लग-इन: हजारों पन्नों के कॉन्ट्रैक्ट और दस्तावेजों की समीक्षा अब एआई मिनटों में कर रहा है।जब महीनों का काम मिनटों में होगा और इंसान की जरूरत नहीं होगी, तो कंपनियां बिल किस बात का बनाएंगी? यही वह डर है जिसने ब्रोकरेज फर्मों को यह कहने पर मजबूर कर दिया है कि आईटी सेवा प्रदाता कंपनियों का 40% तक का राजस्व जोखिम में है।

    सवाल: बाजार में गिरावट कितनी भयावह है? बड़ी कंपनियों का क्या हाल है?

    जवाब: शेयर बाजार के आंकड़ों पर नजर डालें तो पूरी स्थिति साफ हो जाती है। फरवरी 2026 के दूसरे हफ्ते में आईटी शेयरों ने कोरोना काल (मार्च 2020) के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट दर्ज की है। टीसीएस जो भी कभी देश की दूसरी सबसे मूल्यवान कंपनी थी अब अब छठे स्थान पर खिसक गई है। इसका मार्केट कैप 10 लाख करोड़ रुपये के मनोवैज्ञानिक स्तर से भी नीचे आ गया है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और आईसीआईसीआई बैंक अब उससे कहीं आगे निकल चुके हैं। टीसीएस अपने सर्वकालिक उच्च स्तर से लगभग 44% टूट चुका है। इन्फोसिस और विप्रो में भी 30% से 34% की भारी गिरावट दर्ज की गई है।

    सवाल: क्या नौकरियों पर भी संकट है? आंकड़े क्या कहते हैं?

    जवाब: यह इस रिपोर्ट का सबसे चिंताजनक पहलू है- रोजगार यानी नौकरी का जाना। 'बेंच स्ट्रेंथ' बढ़ाने का दौर खत्म हो चुका है। वित्त वर्ष 2026 के पहले 9 महीनों में भारत की शीर्ष पांच आईटी कंपनियों ने नेट आधार पर  केवल 17 कर्मचारी जोड़े हैं। तुलना के लिए, पिछले साल इसी अवधि में यह संख्या 17,764 थी। एंथ्रोपिक के सीईओ ने इस बारे में एक बड़ा दावा भी किया है। उनका मानना है कि अगले एक से पांच वर्षों में 50% एंट्री-लेवल व्हाइट-कॉलर नौकरियां (जैसे जूनियर कोडर, कंटेंट राइटर) समाप्त हो जाएंगी। दूसरी ओर, नौकरियों में कुशलता भी एक समस्या बनकर उभरी है। 10 एआई नौकरियों के लिए देश में केवल एक योग्य इंजीनियर उपलब्ध है। 2026 के अंत तक 14 लाख एआई पेशेवरों की कमी हो सकती है।

    सवाल: क्या सब कुछ खत्म हो गया है या उम्मीद की कोई किरण बाकी है? 

    जवाब: भारत की आईटी कंपनियों के शेयरों में गिरावट के बाद बाजार में जहां हाहाकार है। पर एक उम्मीद की किरण दिखी है। दुनिया की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित वित्तीय सेवा संस्थानों (बैंकिंग) में से एक जेपी मॉर्गन इस गिरावट को एक अलग नजरिए से देख रही है। भारतीय आईटी कंपनियों को तकनीकी दुनिया का प्लंबर कहा है।  इसकी टिप्पणी क्यों अहम है क्योंकि यह 2.35 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की संपत्ति वाला संस्थान है। यह अमेरिका का सबसे बड़ा और मार्केट कैपिटल के मामले में दुनिया के सबसे मूल्यवान बैंकों में से एक है। यह निवेश बैंकिंग, संपत्ति प्रबंधन और वाणिज्यिक बैंकिंग जैसी सेवाएं प्रदान करता है। उनका तर्क है कि एआई जादू नहीं है। बड़ी कंपनियों के पुराने सिस्टम को ठीक करने, एआई को सुरक्षित रूप से इंटीग्रेट करने और डेटा पाइपलाइन बनाने के लिए इन्हीं प्लंबरों जैसे टीसीएस और इंफोसिस की जरूरत पड़ेगी, ऐसे में कोई कहे की इनका काम खत्म हो गया, ऐसा सही नहीं लगता। जेपी मॉर्गन का मानना है कि शेयर की कीमतें संकट के स्तर पर जरूर आ गई हैं, यह कुछ 2008 की मंदी जैसा है। पर यह वास्तव में डीप वैल्यू की स्थिति और इसे खरीदने के मौके के रूप में देखा जा सकता है। जेपी मॉर्गन की टिप्पणी अहम इसलिए है क्योंकि यह 2.35 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की संपत्ति वाला संस्थान है। यह अमेरिका का सबसे बड़ा और मार्केट कैपिटल के मामले में दुनिया के सबसे मूल्यवान बैंकों में से एक है। 

    सवाल: एक निवेशक के नजरिए से इस पूरी कहानी का मतलब क्या समझा जाए?

    जवाब: भारत की आईटी कंपनियों के शेयर अपने सर्वश्रेष्ठ भाव की तुलना में लगभग आधी कीमतों पर बिक रहे हैं। पर इसका यह मतलब कतई नहीं है कि सबकुछ खत्म ही हो गया। बड़े वित्तीय जानकार भी मानते हैं कि भारतीय आईटी सेक्टर खत्म नहीं हो रहा, बल्कि एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। कुछ समय के लिए केवल भुगतान का दौर खत्म हो गया है और फिलहाल परिणाम के लिए भुगतान (पेमेंट फोर आउटपुर) का दौर शुरू हो गया है। इस दौर में जो कंपनियां खुद को एआई-फर्स्ट कंपनी के रूप में ढाल लेंगीं, उनका डंका आगे भी बाजार में बजना जारी रहेगा। फिलहाल जहां तक निवेश की बात है, तो यह किसी अधिकृत विशेषज्ञ की सलाह से ही करना सही होगा।निवेशक विशेषज्ञों की राय लेकर बार्बेल अप्रोच अपना सकते हैं। इसके तहत एक तरफ अत्यधिक गिरे हुए लार्ज-कैप शेयरों में निवेश किया जाता है तो और दूसरी तरफ एआई इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी ग्रोथ कंपनियों को तवज्जो दी जाती है।बड़े गिरावट के समय देखा गया है कि अक्सर लार्ज कैप ही टिक पाते हैं। टीसीएस और इन्फोसिस के पास मजबूत बैलेंस शीट और जीरो डेट है, जो उन्हें एआई में निवेश करने और खुद को बदलने की ताकत देता है। एक निवेशक के रूप में किसी भी हालत में लोगों को गिरते चाकू पकड़ने से बचना चाहिए। तकनीकी रूप से अभी शेयर अपने मूविंग एवरेज से नीचे हैं। एकमुश्त पैसा लगाने के बजाय निवेशकों के लिए एसआईपी या बॉय ऑन डिप्स की रणनीति सही रणनीति काम कर सकती है।अस्वीकरण: शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। इस खबर में हम किसी शेयर में निवेश की सलाह नहीं दे रहे। किसी भी निवेश निर्णय को लेने से पहले अपने पंजीकृत वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें। लेखक या संस्थान किसी भी वित्तीय नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।

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