18 फरवरी को काले खां बाग में आयोजन, एक दिन पूर्व होगा श्री श्याम भजन जागरण
किशनगढ़ बास। शहर के काले खां बाग स्थित संत काले खां महाराज (उस्ताद जी बाबा) के स्थान पर 18 फरवरी, बुधवार को भक्तों की ओर से तृतीय विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इससे एक दिन पूर्व रात्रि में श्री श्याम बाबा के भजनों का गुणगान एवं जागरण कार्यक्रम आयोजित होगा।
भक्तजन भंडारे और जागरण की तैयारियों में जोर-शोर से जुटे हुए हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि संत काले खां महाराज एक सिद्ध तपस्वी संत थे, जिन्हें भगवान श्रीकृष्ण के साक्षात दर्शन हुए थे।
साहित्यकार, लेखक एवं कृषि पंडित पद्मश्री से सम्मानित 89 वर्षीय सूर्य देव सिंह बारेठ बताते हैं कि संत काले खां उस्ताद जी की ख्याति दूर-दूर तक थी। वे भगवान श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त थे। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें साक्षात दर्शन दिए।
कहा जाता है कि जब यह बात अलवर के महाराजा जयसिंह जी को ज्ञात हुई तो उनके मन में भी भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन की तीव्र इच्छा जागी। वे संत काले खां की कुटिया पर पहुंचे और उनसे श्रीकृष्ण के दर्शन कराने का आग्रह किया। प्रारंभ में संत ने मना किया, किंतु महाराजा के आग्रह पर वे राजी हुए।
बताया जाता है कि संत काले खां ने महाराजा से आंखें बंद करने को कहा। जब आंखें खोलने को कहा गया तो उनके सामने तेज प्रकाश के बीच भगवान श्रीकृष्ण और राधा का दिव्य स्वरूप प्रकट हुआ। यह दृश्य देखकर महाराजा जयसिंह भाव-विभोर हो गए।
भगवान के साक्षात दर्शन के पश्चात महाराजा जयसिंह ने संत काले खां के स्थान के लिए 12 बीघा भूमि ‘काले खां बाग’ के नाम से अलॉट कर दी। आज यह स्थान काले खां बाग के नाम से प्रसिद्ध है। यहां न्यायिक, प्रशासनिक, राजस्व एवं पुलिस अधिकारियों के आवास सहित नगर पालिका, पीडब्ल्यूडी, वन विभाग, शिक्षा विभाग, पशु चिकित्सालय, कृषि विभाग, जेल, नरेगा आदि कार्यालय संचालित हो रहे हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का विश्राम भवन भी यहीं स्थित है, जहां वर्तमान में बालिका महाविद्यालय संचालित है।
प्रत्येक गुरुवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर प्रसाद चढ़ाते हैं और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। शहर के अनेक परिवार ऐसे हैं जिनके पूर्वज संत काले खां उस्ताद जी बाबा के शिष्य रहे हैं। वे अपने घरों और दुकानों में बाबा की तस्वीर स्थापित कर प्रतिदिन नमन करते हैं।
करीब 115 वर्ष पुरानी छतरीनुमा कुटिया आज भी बाबा की स्मृतियों को संजोए हुए है। यहां सेवा करने वाली महिला का परिवार नियमित रूप से स्थान की देखरेख करता है। मान्यता है कि संत काले खां बकरी चराते हुए यहां आए थे और यहीं भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन हो गए।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि जनप्रतिनिधि और अधिकारी थोड़ी और रुचि लें तो इस ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल को और अधिक सुंदर व व्यवस्थित बनाया जा सकता है।
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