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    राम मंदिर दान विवाद में अखिलेश का बड़ा आरोप, बोले- दिल्ली-लखनऊ की लड़ाई में दब गई जांच

    लखनऊ। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर परोक्ष रूप से बड़ा जुबानी हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर के कथित चंदे की चोरी से जुड़े मामले की जांच को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) जैसी राष्ट्रीय एजेंसियों को न देकर विशेष जांच दल (एसआईटी) के हवाले इसलिए किया गया, क्योंकि सत्तारूढ़ दल के अंदर 'भीतरी सत्ता का घमासान' चरम पर है. सपा प्रमुख ने बीजेपी का नाम लिए बगैर इशारा किया कि इस दल में सत्ता के दो अलग-अलग ध्रुव काम कर रहे हैं, जिनमें से एक लखनऊ में सक्रिय है और दूसरा दिल्ली में. उनका कहना है कि इस संवेदनशील जांच को मोड़ने का तरीका पूरी तरह से इसी आंतरिक खींचतान का नतीजा है.

    केंद्रीय एजेंसियों के बजाय एसआईटी को जांच सौंपने पर उठाए सवाल

    मीडियाकर्मियों द्वारा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), सीबीआई और आयकर विभाग जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों की भूमिका पर सवाल किए जाने पर अखिलेश यादव ने मामले को और विस्तार से रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि इस पूरे समीकरण में दिल्ली के हस्तक्षेप से पहले ही लखनऊ के गुट ने पूरी कमान अपने हाथों में ले ली ताकि चीजें उनके नियंत्रण से बाहर न जाएं. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि एसआईटी का गठन और उसकी रिपोर्ट सौंपने की प्रक्रिया ही इस अंदरूनी राजनीतिक समीकरण का सबसे बड़ा सबूत है. पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि चंदे और चढ़ावे की बड़ी रकम को देखकर कुछ लोगों ने अपनी मर्यादाएं भुला दी हैं और भगवान राम के आदर्शों की 'लक्ष्मण रेखा' को पूरी तरह लांघ दिया है. वे जनता के इस तीखे आक्रोश का सामना करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं, इसलिए सामने आने से बच रहे हैं.

    बीजेपी का तीखा पलटवार और विपक्षी दलों की मंशा पर उठाए सवाल

    राम मंदिर दान विवाद को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार पर हो रहे हमलों के बीच बीजेपी ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव को आड़े हाथों लिया है. विपक्ष की तीखी बयानबाजी का जवाब देते हुए राज्य के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इस पूरे प्रकरण को बेहद खेदजनक बताया. हालांकि, उन्होंने विपक्षी खेमे पर इस पूरे विषय को लेकर घटिया राजनीति करने का सीधा आरोप भी मढ़ा. उपमुख्यमंत्री ने पलटवार करते हुए कहा कि देश का प्रत्येक नागरिक और सनातन परंपरा को मानने वाला व्यक्ति इस बात से भली-भांति वाकिफ है कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का रुख हमेशा से राम मंदिर के निर्माण के खिलाफ रहा है.

    अदालत के पुराने तर्कों और राम मंदिर विरोध का दिया हवाला

    उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अतीत की घटनाओं को याद दिलाते हुए कहा कि ये वही राजनीतिक दल हैं जिन्होंने एक समय पर भगवान राम के अस्तित्व और उनके जन्मस्थान अयोध्या को लेकर तरह-तरह के भ्रामक दावे किए थे. उन्होंने पूर्व में सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष भी ऐसे तर्क पेश किए थे जिनसे प्रभु श्री राम की जन्मस्थली की प्रामाणिकता पर सवाल खड़े होते थे. उन्होंने दृढ़ता से कहा कि जिन पार्टियों ने हमेशा राम मंदिर आंदोलन की राह में रोड़े अटकाए और भगवान राम के विरुद्ध टिप्पणियां कीं, उन्हें आज इस पवित्र विषय पर सवाल उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है. उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जनता इन बयानों को कभी नहीं भूलेगी और विपक्ष को अपनी इस नकारात्मक राजनीति का खामियाजा भुगतना पड़ेगा.

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