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    “355 जांबाज सैन्य अधिकारियों के सामने बोले सेना प्रमुख: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ मिसाल है कि भारत अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है”

    पुणे | महाराष्ट्र के खड़कवासला स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) में 150वें कोर्स की भव्य पासिंग-आउट परेड संपन्न हुई, जिसकी समीक्षा सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने की। इस ऐतिहासिक मौके पर उन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस अभियान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब भारत की राष्ट्रीय इच्छाशक्ति, सटीकता और दृढ़ संकल्प एक साथ मिलते हैं, तो देश किसी भी उकसावे का मुंहतोड़ जवाब कैसे देता है। सेना प्रमुख ने जोर देकर कहा कि इस सैन्य कार्रवाई ने देश की सुरक्षा प्रतिक्रिया का एक नया पैमाना तय किया है, जिसे आगे ले जाने का जिम्मा अब इन नए सैन्य अधिकारियों पर है।

    वैश्विक सुरक्षा चुनौतियां और हाइब्रिड युद्ध की तैयारी

    पासिंग-आउट परेड को संबोधित करते हुए जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बदलते वैश्विक परिदृश्य पर अपनी बात रखी। उन्होंने कैडेट्स को सचेत किया कि वर्तमान समय में सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां बेहद जटिल और गतिशील हो चुकी हैं। अब खतरे केवल पारंपरिक मोर्चों या वर्दीधारी दुश्मनों तक सीमित नहीं रह गए हैं। आज का सुरक्षा वातावरण 'ग्रे-जोन' (अस्पष्ट संघर्ष क्षेत्रों) से लेकर तीव्र गति वाले 'हाइब्रिड युद्ध' तक फैल चुका है। ऐसे माहौल में देश की रक्षा के लिए सैनिकों को अत्यधिक त्वरित निर्णय लेने और रणनीतिक सोच के साथ काम करने की आवश्यकता है।

    तीनों सेनाओं का समन्वय और एनडीए की नींव

    जनरल द्विवेदी ने कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' की सबसे बड़ी सफलता तीनों सेनाओं (थल सेना, नौसेना और वायुसेना) के बीच का बेजोड़ तालमेल और एकीकृत जवाबी कार्रवाई थी। उन्होंने कैडेट्स को याद दिलाया कि इस संयुक्तता और आपसी समन्वय की नींव एनडीए में उनके प्रशिक्षण के पहले दिन से ही रखी जाती है। उन्होंने युवा अधिकारियों को प्रेरित करते हुए कहा कि भविष्य में वे चाहे किसी भी विंग (सेवा) का हिस्सा बनें, अंततः उन्हें देश की संप्रभुता के लिए एक साथ कंधे से कंधा मिलाकर ही काम करना होगा।

    सेना प्रमुख के व्यक्तिगत अनुभव और विदेशी कैडेट्स की सराहना

    समारोह के दौरान सेना प्रमुख भावुक भी नजर आए। उन्होंने साझा किया कि ठीक 42 वर्ष पहले वे खुद इसी क्वार्टरडेक से पास-आउट होकर निकले थे। उन्होंने कहा, "आज मैं वर्दी में अपने करियर के अंतिम पड़ाव पर हूं, जबकि आप अपनी राष्ट्र सेवा की यात्रा शुरू कर रहे हैं।" उन्होंने परेड कमांडर और सभी कैडेट्स के कड़े अनुशासन की प्रशंसा की और सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए 'चीता स्क्वाड्रन' को प्रतिष्ठित विजेता बैनर मिलने पर बधाई दी। इसके साथ ही, उन्होंने इस कोर्स से उत्तीर्ण हुए 12 मित्र देशों के 24 विदेशी कैडेट्स का भी विशेष रूप से स्वागत किया और कहा कि अलग संस्कृतियों से होने के बावजूद यहां से सभी कैडेट समान मानवीय मूल्यों, प्रशिक्षण और एक ही उद्देश्य के साथ विदा हो रहे हैं।

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