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    बड़ी राहत: अजीतपुरा का ऐतिहासिक खनन विरोधी धरना 291 दिन बाद समाप्त, एक ब्लॉक बंद करने पर बनी सहमति

    जयपुर | अजीतपुरा-कुजोता क्षेत्र में आबादी वाले इलाके के पास चल रही चूना पत्थर (लाइम स्टोन) खनन परियोजना के खिलाफ पिछले दो सौ इक्यानवे दिनों से जारी ग्रामीणों का लंबा गतिरोध आखिरकार खत्म हो गया है। मंगलवार देर रात स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों और आंदोलनकारी ग्रामीणों के बीच हुई एक मैराथन समझौता वार्ता के बाद धरना समाप्त करने का आधिकारिक निर्णय लिया गया। इस उच्चस्तरीय बैठक में ग्रामीणों की मुख्य मांगों को स्वीकार कर लिया गया, जिसके बाद आंदोलनकारियों ने अपना विरोध प्रदर्शन वापस लेने का ऐलान किया। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि रिहायशी इलाके के पास स्थित ब्लॉक संख्या एक में माइनिंग का काम पूरी तरह से बंद कराया जाएगा और हाल ही में हुई हिंसक झड़प के दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

    ब्लास्टिंग के विरोध में भड़की थी हिंसा, छह से अधिक ग्रामीण हुए थे जख्मी

    इस विवाद की पृष्ठभूमि में लंबे समय से स्थानीय लोग खान में होने वाले भारी धमाकों और ब्लास्टिंग का विरोध कर रहे थे, जिससे उनके मकानों और जनजीवन को खतरा पैदा हो रहा था। सोमवार को जब ग्रामीण दोबारा शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए इकट्ठा हो रहे थे, तभी खनन समर्थकों और कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा कथित तौर पर हवाई फायरिंग, लाठी-डंडों से हमला और भारी पथराव किया गया। इस हिंसक वारदात में महेंद्र मीणा, मदनलाल आर्य, दशरथ बावरिया, सुगनचंद आर्य और करिश्मा सहित छह से अधिक ग्रामीण लहूलुहान हो गए थे। इनमें से गंभीर रूप से घायल चार लोगों को बेहतर इलाज के लिए जयपुर के अस्पताल में स्थानांतरित (रेफर) किया गया था, जहां फिलहाल उनकी स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। इस जानलेवा हमले के बाद क्षेत्र में भारी तनाव फैल गया था और ग्रामीणों की ओर से शीशराम जाट ने सरूण्ड थाने में मुकदमा दर्ज कराया था।

    इन प्रमुख शर्तों पर बनी सहमति, पुलिस वेरिफिकेशन के बाद ही काम करेंगे श्रमिक

    देर रात तक चली इस महत्वपूर्ण वार्ता में कानून व्यवस्था बनाए रखने और ग्रामीणों के हितों की रक्षा के लिए कई कड़े फैसले लिए गए, जिन पर दोनों पक्षों ने सहमति जताई:

    • आबादी क्षेत्र के बिल्कुल नजदीक स्थित माइनिंग ब्लॉक नंबर एक में खनन गतिविधियों को तत्काल प्रभाव से पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा।

    • आंदोलन के दौरान ग्रामीणों पर दर्ज किए गए मुकदमों की जांच निष्पक्षता और मेरिट के आधार पर की जाएगी।

    • सोमवार को ग्रामीणों पर हुए कातिलाना हमले के नामजद आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।

    • खदान क्षेत्र में काम करने वाले सभी बाहरी मजदूरों और स्टाफ का स्थानीय पुलिस से अनिवार्य रूप से चरित्र सत्यापन (वेरिफिकेशन) कराया जाएगा।

    • किसी भी प्रकार की आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति को खान परिसर में नौकरी पर रखने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

    • खनन के दूसरे हिस्से यानी 'बी ब्लॉक' में भी रिहायशी सीमा से तीन सौ मीटर की दूरी तक किसी भी प्रकार का माइनिंग कार्य नहीं किया जा सकेगा।

    भारी पुलिस बल की मौजूदगी में हुआ समझौता, शर्तों के उल्लंघन पर दोबारा आंदोलन की चेतावनी

    इस संवेदनशील मामले को सुलझाने के लिए प्रशासनिक अमला पूरी मुस्तैदी के साथ मैदान में डटा रहा। वार्ता के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए घटना स्थल और आसपास के गांवों में सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए थे। मौके पर उपखंड अधिकारी (एसडीएम) योगेश सिंह देवल, पुलिस उपाधीक्षक राजेंद्र बुरड़क, सहायक खनि अभियंता अमीचंद दहूरियाव सहित पांच थानों का भारी पुलिस जाब्ता और प्रशासनिक अधिकारी तैनात रहे। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि गुजरात की एक निजी कंपनी से जुड़े तीन साझेदारों के नाम पर यह खनन पट्टा आवंटित है। इस बीच, धरना संयोजक एवं पूर्व सरपंच नेतराम ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने समझौते की शर्तों को लागू करने में ढिलाई बरती या वादों से मुकरा, तो ग्रामीण अपने अस्तित्व की लड़ाई के लिए दोबारा उग्र आंदोलन शुरू करने को मजबूर होंगे।

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