More
    Homeराजनीतिकांग्रेस की एक नवंबर की रैली पर विवाद, वीएचपी ने हिंदू त्योहारों...

    कांग्रेस की एक नवंबर की रैली पर विवाद, वीएचपी ने हिंदू त्योहारों और कारोबार का मुद्दा उठाया

    नई दिल्ली। आगामी 1 नवंबर को राजधानी के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में विपक्षी दलों द्वारा आयोजित की जाने वाली विशाल रैली को लेकर विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने कांग्रेस और इंडिया गठबंधन पर जोरदार हमला बोला है। संगठन का आरोप है कि मुख्य त्योहारों के सीजन के दौरान इस तरह के बड़े राजनीतिक आयोजनों से आम जनता के उत्सव की खुशियों में बाधा पहुँचती है और देश के व्यापारिक गतिविधियों को भारी नुकसान झेलना पड़ता है। वीएचपी ने विपक्षी खेमे से पुरजोर अपील की है कि वे आगामी पर्वों की संवेदनशीलता को देखते हुए ऐसे कार्यक्रमों से परहेज करें, जिससे आम नागरिकों और व्यापारियों को भारी असुविधा का सामना न करना पड़े।

    वीएचपी ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर साधा निशाना

    विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जारी अपने बयान में कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के रवैये पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली के व्यापारी वर्ग ने 1 नवंबर की प्रस्तावित रैली को आगे बढ़ाने का कई बार अनुरोध किया था, लेकिन कांग्रेस नेतृत्व ने उनकी जायज मांगों को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया। बंसल ने तंज कसते हुए कहा कि यदि यही निवेदन किसी अन्य विशिष्ट संगठन की ओर से आया होता, तो शायद विपक्षी दल तुरंत अपनी रैली की तारीख को स्थगित करने के लिए सहर्ष तैयार हो जाते।

    अहोई अष्टमी के पावन अवसर पर रैली के आयोजन का विरोध

    अपने वक्तव्य में विनोद बंसल ने रेखांकित किया कि 1 नवंबर को अहोई अष्टमी का पवित्र पर्व भी मनाया जाना है, जिस दिन माताएं अपने संतानों की दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य की कामना के लिए कठिन व्रत रखती हैं। वीएचपी का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण धार्मिक और पारिवारिक अवसर पर रैली के आयोजन से श्रद्धालुओं की आवाजाही और त्योहार की तैयारियों पर सीधा प्रतिकूल असर पड़ेगा। संगठन ने विपक्षी नेताओं से आग्रह किया है कि अपने राजनीतिक विरोध और प्रदर्शनों के बीच उन्हें देश के बहुसंख्यक समाज की भावनाओं और परंपराओं का भी समुचित सम्मान करना चाहिए।

    त्योहारों के मौसम में कारोबार प्रभावित होने की व्यापारियों को चिंता

    उल्लेखनीय है कि रैली की तारीख में बदलाव की यह मांग केवल धार्मिक संगठनों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि राजधानी के व्यापारी वर्ग ने भी इसके खिलाफ आवाज उठाई है। दिल्ली के कश्मीरी गेट क्षेत्र में व्यापारियों ने प्रदर्शन कर विपक्षी गठबंधन से दीपावली के बाद ही रैली आयोजित करने की अपील की थी। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के पदाधिकारियों का कहना है कि इस विषय पर गठबंधन के सभी घटक दलों के साथ-साथ वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं को पत्र भेजे गए हैं। व्यापारियों को आशंका है कि रामलीला मैदान में इतनी बड़ी सभा के चलते सुरक्षा के कड़े इंतजाम, सड़कों पर बैरिकेडिंग और रूट डायवर्जन के कारण बाजारों तक ग्राहकों का पहुंचना अत्यंत दुष्कर हो जाएगा, जिससे मुख्य त्योहारी सीजन में दुकानदारों की बिक्री पर सीधा बुरा असर पड़ेगा।

    रैली के मुख्य मुद्दे और राहुल गांधी का पलटवार

    विपक्ष की इस प्रस्तावित रैली का मुख्य उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मामलों को लेकर सरकार को घेरना तथा मुख्य चुनाव आयुक्त के त्यागपत्र की मांग करना है। दूसरी ओर, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने व्यापारियों के विरोध पर पलटवार करते हुए बयान दिया है कि यदि व्यापारी वर्ग मतदाता सूची से जुड़े इन गंभीर मुद्दों पर सरकार से मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग करे, तो यह राजनीतिक विरोध पल भर में समाप्त हो सकता है। वहीं वीएचपी प्रवक्ता ने विपक्षी समूहों को आड़े हाथों लेते हुए आरोप लगाया है कि नवरात्रि से लेकर दिवाली तक त्योहारों के माहौल को प्रभावित करने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिसे देश का समाज और व्यापारी वर्ग कभी स्वीकार नहीं करेगा।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here