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    शादी के बाद विवाद, दुल्हन ने ससुराल जाने से किया इनकार, थाने में पहुंचा मामला

    डबरा। मध्य प्रदेश के डबरा में एक नवविवाहित दुल्हन की शादी के अरमान उस समय बिखर गए, जब उसे ससुराल की चौखट पर कदम रखने से पहले अचानक पुलिस थाने की दहलीज पर पहुंचना पड़ा। विवाह के लाल जोड़े में सजी, हाथों में चूड़ा और पिया के नाम की मेहंदी रचाए वह दुल्हन, जिसकी आँखों में एक नए जीवन के हसीन सपने थे, विदाई के ठीक पहले खुद को पुलिस कोतवाली के कमरों में पाकर स्तब्ध थी। यह कोई पारिवारिक विवाद या आपराधिक षड्यंत्र नहीं था, बल्कि एक सामूहिक विवाह सम्मेलन के प्रबंधकों द्वारा की गई वादाखिलाफी का नतीजा था, जिसने शादी के उत्सव को अचानक कानूनी लड़ाई में तब्दील कर दिया। डबरा सिटी कोतवाली में शुक्रवार की देर रात घटित हुए इस अनोखे मामले ने न केवल पुलिस महकमे को हैरान कर दिया, बल्कि समूचे इलाके में सनसनी फैला दी। अपनी विदाई की रस्मों को बीच में ही रोककर न्याय की गुहार लगाने वाली इस दुल्हन की नाराजगी की मुख्य वजह वह गृहस्थी का साजो-सामान और दोपहिया वाहन (मोटरसाइकिल) था, जिसे आयोजन समिति ने शादी के तोहफे के रूप में देने का लिखित आश्वासन दिया था, परंतु अंतिम क्षणों में वे अपनी बात से साफ पलट गए।

    लाखों रुपये जमा कराने के बाद भी ऐन वक्त पर मुकर गए आयोजन समिति के पदाधिकारी

    यह पूरा मामला रंग महल गार्डन में 'ईशानी शिक्षा एवं जन कल्याण समिति' द्वारा आयोजित एक सर्वजातीय सामूहिक विवाह सम्मेलन से जुड़ा हुआ है। मीट मार्केट क्षेत्र की निवासी लवली वाल्मीकि का पाणिग्रहण संस्कार इसी पंडाल में झांसी से आए सुनील वाल्मीकि के साथ पूरे विधि-विधान से संपन्न हुआ था। पीड़ित वधु पक्ष का सीधा आरोप है कि विवाह पक्का होने के समय समिति के पदाधिकारियों के पास 90 हजार रुपये की मोटी रकम अग्रिम जमा कराई गई थी, और लगभग इतनी ही धनराशि वर पक्ष द्वारा भी आयोजकों को दी गई थी। यह भारी-भरकम राशि केवल इसी शर्त पर दी गई थी क्योंकि आयोजकों ने दोनों परिवारों को भरोसा दिया था कि विवाह संपन्न होने पर वर-वधू को एक नई मोटरसाइकिल सहित गृहस्थी स्थापना का पूरा आवश्यक सामान भेंट किया जाएगा। दोनों पक्षों ने गरीब होने के कारण इस सामूहिक मंच और आयोजकों के दावों पर अटूट विश्वास कर लिया था।

    सामान मांगने पर आयोजकों ने दिखाई धौंस तो विदाई रोककर लाल जोड़े में ही थाने पहुंची दुल्हन

    पवित्र अग्नि के फेरे और सिंदूरदान की रस्में पूरी होने के बाद जब विदाई की वेला आई, तो वर पक्ष के लोगों ने वादे के अनुसार समिति के सदस्यों से गाड़ी और गृहस्थी के सामान की मांग की। आरोप है कि इस पर समिति के लोग आनाकानी करने लगे और कोई भी संतोषजनक उत्तर देने के बजाय टालमटोल करने लगे। जब विवाद बढ़ा तो आयोजकों ने सामान देने से साफ मना कर दिया, जिससे दोनों पक्षों का धैर्य जवाब दे गया। आयोजकों द्वारा सरेआम छले जाने से आहत होकर दुल्हन लवली ने एक बेहद साहसी और ऐतिहासिक निर्णय लिया। उसने अपनी विदाई की रस्म को तत्काल प्रभाव से रुकवा दिया और अपने विवाह के भारी जोड़े में ही सीधे डबरा सिटी थाने जा पहुंची। थाने के मुख्य द्वार पर लाल जोड़े में सजी-धजी दुल्हन को देखकर वहां ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी भी एक पल के लिए भौंचक्के रह गए।

    एसडीओपी ने दिलाया उचित विधिक कार्रवाई का भरोसा तब जाकर ससुराल रवाना हुई नवविवाहिता

    थाने में मचे इस हंगामे और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसडीओपी सौरभ कुमार ने अविलंब पीड़ित दुल्हन और उसके माता-पिता की पूरी व्यथा सुनी। उन्होंने पीड़ित परिवार को आश्वस्त किया कि पुलिस इस धोखेबाजी को लेकर बेहद गंभीर है और आयोजन समिति के खिलाफ निष्पक्ष व कड़ी विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। पुलिस अधिकारी ने स्वयं हस्तक्षेप करते हुए आयोजकों को तलब करने और नियमानुसार पूरा सामान दिलवाने का ठोस आश्वासन दिया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की इस त्वरित समझाइश और ढाढस बंधाने के बाद दुल्हन लवली का गुस्सा शांत हुआ और उसकी आँखों में छाई मायूसी उम्मीद में बदल गई, जिसके बाद वह मुस्कुराते हुए अपने ससुराल के लिए रवाना हुई। इस अप्रत्याशित घटना ने एक बार फिर मध्य प्रदेश में कुकुरमुत्ते की तरह खुल रहे सामूहिक विवाह सम्मेलनों की प्रामाणिकता, उनकी वित्तीय पारदर्शिता और प्रशासनिक निगरानी की सख्त जरूरत पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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