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    त्योहारी सीजन से पहले बढ़ा LPG का दाम, कमर्शियल सिलेंडर की कीमतें बढ़ीं

    आगामी त्योहारी सीजन की शुरुआत से ठीक पहले देश भर में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ा दिए गए हैं। तेल एवं गैस विपणन कंपनियों ने 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में 60 से 70 रुपये तक की बढ़ोतरी की है। स्थानीय करों (राज्यों के वैट और अन्य शुल्कों) के आधार पर देश के अलग-अलग शहरों में कमर्शियल सिलेंडर के दाम भिन्न-भिन्न होते हैं, इसलिए नई संशोधित दरें भी शहरवार अलग लागू होंगी। राहत की बात यह है कि इस बार आम उपभोक्ताओं के घरों में उपयोग होने वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है, और उनके दाम यथावत बने हुए हैं।

    त्योहारों के बीच महंगाई का झटका, राजधानी दिल्ली में नई दरें

    आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम में 62.50 रुपये की वृद्धि दर्ज की गई है। इस बढ़ोतरी के बाद अब दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर की नई कीमत बढ़कर 2,810 रुपये हो गई है। चूँकि त्योहारी सीजन के दौरान होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे और कैटरिंग व्यवसायों में व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की खपत और माँग काफी बढ़ जाती है, ऐसे में अचानक हुए इस मूल्य इजाफे से इन व्यावसायिक क्षेत्रों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ना तय है। उल्लेखनीय है कि इससे ठीक पहले सितंबर माह में भी कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 9.50 रुपये की मामूली वृद्धि की गई थी।

    होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारों पर पड़ेगा सीधा असर

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस मूल्य वृद्धि का सबसे अधिक असर खाद्य एवं आतिथ्य उद्योग पर पड़ेगा। अधिकांश होटल, रेस्टोरेंट, स्वीट हाउस और छोटे भोजनालय अपने दैनिक कारोबार तथा भोजन पकाने जैसी व्यावसायिक गतिविधियों के लिए बड़े पैमाने पर कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों का ही उपयोग करते हैं।

    गैस सिलिंडर के दाम बढ़ने से इन संस्थानों की परिचालन लागत (ऑपरेटिंग कॉस्ट) में सीधा उछाल आएगा। कम मुनाफा मार्जिन पर अपने व्यापार का संचालन करने वाले छोटे दुकानदारों और ढाबा संचालकों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है। वाणिज्यिक एलपीजी की कीमतें बढ़ने से अंततः होटल और रेस्टोरेंट में परोसे जाने वाले खाद्य पदार्थों एवं पेय पदार्थों की लागत भी व्यापक रूप से प्रभावित हो सकती है, जिससे बचने के लिए कई कारोबारी अपनी बढ़ी हुई अतिरिक्त लागत का बोझ सीधे ग्राहकों पर यानी खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ाकर डाल सकते हैं।

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