उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में होने वाली विश्व प्रसिद्ध 'भस्म आरती' देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है। तड़के होने वाली इस अलौकिक आरती में शामिल होने के लिए भक्तों को पहले से विशेष पास या अनुमति लेनी होती है। भस्म आरती के पासों की लगातार बढ़ती मांग और सीमित सीटों को देखते हुए अब मंदिर प्रबंध समिति दर्शन व्यवस्था में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव करने जा रही है, जिससे आम भक्तों को बाबा महाकाल के दर्शन आसानी से मिल सकेंगे।
आधार कार्ड और मोबाइल नंबर से होगी निगरानी
वर्तमान व्यवस्था में कुछ लोग अलग-अलग मोबाइल नंबरों का उपयोग करके बार-बार भस्म आरती की अनुमति (पास) हासिल कर लेते हैं। इसके कारण दूर-दराज से पहली बार उज्जैन आने वाले हजारों आम श्रद्धालु इस दिव्य आरती के दर्शन से वंचित रह जाते हैं। इस गड़बड़ी और एकाधिकार को रोकने के लिए मंदिर समिति अब तकनीक का सहारा लेने जा रही है:
3 महीने का प्रतिबंध: नई प्रणाली के तहत श्रद्धालुओं के बुकिंग डेटा की निगरानी सीधे उनके आधार कार्ड और मोबाइल नंबर के जरिए की जाएगी।
समान अवसर: यदि किसी श्रद्धालु ने एक बार भस्म आरती के दर्शन कर लिए हैं, तो उस आधार कार्ड पर अगले 3 महीने तक दोबारा भस्म आरती की अनुमति नहीं मिल सकेगी।
पारदर्शिता: मंदिर प्रशासन का मानना है कि इस डिजिटल कड़ाई से दर्शन प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष बनेगी। खासकर सावन और भाद्रपद जैसे व्यस्त महीनों में वीआईपी (VIP) या प्रभावशाली लोगों के दबाव के कारण जो सामान्य भक्त पीछे छूट जाते थे, अब उन्हें समान अवसर मिल सकेगा।
आम श्रद्धालुओं को मिलेगा सीधा फायदा
महाकाल मंदिर में हर दिन लगभग 1700 श्रद्धालुओं को ही भस्म आरती में शामिल होने की अनुमति दी जाती है, जिसमें ऑनलाइन और ऑफलाइन (प्रोटोकॉल) दोनों श्रेणियां शामिल हैं। बढ़ती भीड़ के सामने यह संख्या बेहद कम है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि पासों का वितरण अधिक संतुलित और पारदर्शी तरीके से हो सकेगा। जो श्रद्धालु महीनों से अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, उन्हें अब आसानी से अनुमति मिल जाएगी और बिचौलियों या बार-बार पास बुक करने वालों पर पूरी तरह लगाम लग सकेगी।
तकनीक से सुधरेगा भीड़ प्रबंधन
धार्मिक मामलों के जानकारों के अनुसार, देश के अन्य बड़े और प्रमुख धार्मिक स्थलों जैसे तिरुपति बालाजी और माता वैष्णो देवी की तर्ज पर अब महाकाल मंदिर में भी भीड़ प्रबंधन के लिए डिजिटल तकनीक का उपयोग बेहद जरूरी हो गया है। मंदिर समिति का कहना है कि इस नई व्यवस्था का तकनीकी सिस्टम (सॉफ्टवेयर) लगभग तैयार किया जा रहा है और इसे जल्द ही आधिकारिक तौर पर लागू कर दिया जाएगा। यदि ऐसा होता है, तो आने वाले सावन के महीने में बाबा महाकाल के दरबार पहुंचने वाले लाखों भक्तों को अधिक व्यवस्थित, सुलभ और निष्पक्ष दर्शन का लाभ मिल सकेगा।


