जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा शुरू की गई 'औद्योगिक पार्क प्रोत्साहन नीति' के तहत अब राज्य में प्राइवेट डेवलपर्स की मदद से विश्व स्तरीय औद्योगिक पार्क बनाने का काम शुरू हो गया है। इस नई नीति के जरिए रीको (RIICO) प्रदेश के 9 अलग-अलग स्थानों पर करीब 645 हेक्टेयर जमीन पर नए औद्योगिक पार्क विकसित करने जा रहा है, जिसके लिए आगामी 1 जून से आवेदन भी शुरू हो रहे हैं। रीको के प्रबंध निदेशक सुरेश ओला ने बताया कि इस नीति का मुख्य उद्देश्य राज्य के जमीन, पानी और बिजली जैसे संसाधनों का सही इस्तेमाल करना और बेहतरीन लॉजिस्टिक्स सुविधाएं तैयार करना है, जिससे राजस्थान देश-विदेश के निवेशकों के लिए एक भरोसेमंद और भविष्य के लिए तैयार इंडस्ट्रियल हब बन सके।
निजी डेवलपर्स और पीपीपी मोड से विकास
इस नीति के बेहतर क्रियान्वयन के लिए कुल चार मॉडल (A, B, C और D) बनाए गए हैं, जिनमें से फिलहाल मॉडल 'ए' और 'डी' के तहत काम शुरू किया जा रहा है। मॉडल 'ए' के अंतर्गत रीको द्वारा दी गई लगभग 374 हेक्टेयर जमीन पर पूरी तरह निजी डेवलपर्स औद्योगिक पार्कों का विकास करेंगे। इसके लिए बालोतरा, धौलपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, दौसा, बूंदी और डीडवाना कुचामन के विभिन्न गांवों में जमीन चिन्हित की गई है। वहीं दूसरी तरफ, मॉडल 'डी' को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप यानी पीपीपी (PPP) मोड पर रखा गया है, जिसके तहत अजमेर और दौसा के गांवों की करीब 271 हेक्टेयर जमीन पर औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे।
चार अलग-अलग मॉडलों की व्यवस्था
अगर इस नीति के चारों मॉडलों को समझें, तो मॉडल-ए में रीको की जमीन पर प्राइवेट डेवलपर काम करेंगे, जबकि मॉडल-बी में 80 फीसदी जमीन डेवलपर की और 20 फीसदी जमीन रीको की होगी। मॉडल-सी के तहत पार्क के लिए पूरी जमीन का इंतजाम खुद डेवलपर को ही करना होगा और मॉडल-डी पूरी तरह पीपीपी पार्टनरशिप पर आधारित रहेगा। सरकार ने इस नीति के तहत यह नियम भी तय किया है कि प्राइवेट सेक्टर में बनने वाले इन औद्योगिक पार्कों का क्षेत्रफल कम से कम 50 एकड़ होना जरूरी है और वहां न्यूनतम 10 औद्योगिक इकाइयां (कंपनियां या फैक्ट्रियां) स्थापित करना अनिवार्य होगा।


